Home » झारखंड की महिलाओं के उत्पाद दुबई के बाद अब लंदन पहुंचे: मंत्री दीपिका पांडेय
“दुबई के बाद अब लंदन के बाजारों में धूम मचा रहे हैं झारखंड के उत्पाद” — मारवाड़ी भवन में बोलीं मंत्री दीपिका पांडेय सिंह
रांची: झारखंड की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह रांची के ऐतिहासिक मारवाड़ी भवन में आयोजित ‘परंपरा प्रदर्शनी’ के प्री-लॉन्च समारोह सह “अपनों की उड़ान” कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। मारवाड़ी सहायक समिति द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके हुनर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने पर विस्तृत चर्चा हुई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने महिलाओं की उद्यमशीलता की जमकर तारीफ की और मारवाड़ी समाज के 115 वर्षों के गौरवशाली इतिहास व सामाजिक योगदान को सराहा।
🌍 जेएसएलपीएस (JSLPS) की ताकत: दुबई के बाद अब लंदन पहुंचे झारखंड के उत्पाद
झारखंड की ग्रामीण महिलाओं की सफलता की कहानी साझा करते हुए मंत्री ने एक बेहद गौरवशाली आंकड़ा पेश किया:
32 लाख महिलाओं का नेटवर्क: झारखंड में JSLPS (झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी) से जुड़कर आज 32 लाख से अधिक महिलाएं अपनी स्वतंत्र पहचान बना रही हैं।
बिरसा हरित ग्राम योजना: इस योजना के तहत ग्रामीण महिलाओं द्वारा की जा रही आम की बागवानी एक मिसाल बन चुकी है।
ग्लोबल मार्केट में एंट्री: दीदियों द्वारा तैयार उत्पाद अब अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में तहलका मचा रहे हैं। पिछले वर्ष जहां ये उत्पाद दुबई के बाजारों तक पहुंचे थे, वहीं इस वर्ष लंदन तक इन्होंने अपनी मजबूत पहचान बना ली है।
🏬 “ग्रामीण महिलाओं को भी मारवाड़ी समाज जैसा मजबूत मंच मिलना चाहिए”
मंत्री ने व्यापार के क्षेत्र में मारवाड़ी समाज के कौशल की सराहना करते हुए कहा:
“जब भी देश में उद्योग और उद्यमिता की बात होगी, मारवाड़ी समाज का नाम सबसे पहले आएगा। अपने परिश्रम और दूरदृष्टि से इस समाज ने खुद को एक आदर्श के रूप में स्थापित किया है। ग्रामीण परिवेश की महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती मार्केट और मार्केटिंग (विपणन) की होती है। हमारा विभाग उन्हें सीधे बाजारों से जोड़ रहा है। हमें ग्रामीण महिलाओं को भी ऐसा मंच देना है, ताकि वे भविष्य में खुद बड़ी उद्यमी बनकर दूसरों को रोजगार दे सकें।”
🌾 ग्रामीण इकोनॉमी को बदलने के लिए 3 बड़े सुझाव
केवल पारंपरिक खेती पर निर्भरता कम करने के लिए मंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों को बिजनेस मॉडल से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया:
वैल्यू एडिशन और प्रोसेसिंग: कृषि उत्पादों की बर्बादी को रोकने के लिए गांवों में कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और प्रोसेसिंग यूनिट्स (प्रसंस्करण इकाइयां) लगाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सिल्क उद्योग का आधुनिकीकरण: झारखंड का तसर सिल्क पूरी दुनिया में मशहूर है। बेहतर फिनिशिंग, डिजाइनिंग और एम्ब्रॉयडरी के जरिए इसे वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जाएगा।
कृषि आधारित उद्योग: खेती को अब केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि एक मुनाफे वाले व्यवसाय के रूप में विकसित करना होगा।
👥 कार्यक्रम में मारवाड़ी समाज के ये दिग्गज रहे मौजूद
इस प्रेरणादायी प्री-लॉन्च समारोह में मारवाड़ी सहायक समिति के अध्यक्ष पवन शर्मा, सचिव विनोद जैन, प्रोजेक्ट चेयरमैन अरुण भारतीय और संयोजक विनीता सिंघानिया मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इनके अलावा मोनिका गोयंका, शिखा जैन अग्रवाल, खुशबू अग्रवाल, मोनिका अग्रवाल, सुमित लाठ, और प्रियंका जैन सहित समिति के कई अन्य सह-संयोजक एवं गणमान्य सदस्य मौजूद थे।