Home » झारखंड में पेसा नियमावली पर बोले ग्राम प्रधान, मंत्री दीपिका पांडेय से की मुलाकात
झारखंड में PESA नियमावली पर बड़ा कदम: अफवाहों और भ्रांतियों को दूर करेगी सरकार, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने ग्राम प्रधानों को दिया भरोसा
रांची: झारखंड की नवनियुक्त ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह से सरायकेला-खरसावाँ जिले के ‘ग्राम प्रधान महासभा’ के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान राज्य में पेसा (PESA) नियमावली लागू किए जाने को लेकर जहां एक तरफ खुशी जताई गई, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर फैली कुछ शंकाओं को दूर करने की भी मांग उठी।
🤝 पेसा नियमावली लागू करने के लिए जताया आभार, भ्रांतियां दूर करने की मांग
मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार द्वारा पेसा नियमावली को धरातल पर उतारने के ऐतिहासिक फैसले के लिए मंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही ग्राम प्रधानों ने दो मुख्य बातें मंत्री के समक्ष रखीं:
अफवाहों पर रोक: पेसा नियमावली को लेकर क्षेत्र में फैलाई जा रही विभिन्न प्रकार की भ्रांतियों और भ्रम को दूर करने के लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक हस्तक्षेप किया जाए।
चयन प्रक्रिया पर शंका: ग्राम प्रधानों के चयन (Selection) संबंधी अपनी कुछ मांगों और तकनीकी शंकाओं से मंत्री को अवगत कराया।
🛡️ “पारंपरिक स्वशासन और आदिवासी संस्कृति की रक्षा हमारा लक्ष्य” — मंत्री दीपिका पांडेय सिंह
प्रतिनिधिमंडल की बातों को बेहद गंभीरता और ध्यान से सुनने के बाद ग्रामीण विकास मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह ने उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी सभी न्यायसंगत मांगों, सुझावों और शंकाओं पर सरकार संवेदनशीलता के साथ विचार करेगी। मंत्री ने पेसा का विजन साफ करते हुए कहा:
“पेसा (PESA) नियमावली का असली उद्देश्य झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) में ग्राम सभाओं को उनका संवैधानिक अधिकार सौंपना है। इसके जरिए जल-जंगल-जमीन जैसे स्थानीय संसाधनों के प्रबंधन में समुदाय की सीधी भागीदारी सुनिश्चित होगी। यह नियमावली आदिवासी समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों और स्वशासन की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करेगी।”
उन्होंने आगे कहा कि झारखंड की मूल पहचान ही यहाँ की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक सामाजिक संरचना से है। राज्य सरकार का मकसद सिर्फ ग्राम सभाओं को कागजों पर सशक्त बनाना नहीं, बल्कि जनजातीय समुदाय को उनकी मूल परंपरा और स्वशासन की भावना के अनुरूप विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।
👥 मुलाकात के दौरान ये प्रमुख प्रतिनिधि रहे मौजूद
सरायकेला-खरसावां से आए इस प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से श्यामल पांडे, अरूप सिंह, वासुदेव महतो, लक्ष्मण गोप, महादेव सिंह, पद्मलोचन गोप, प्रेमचंद महतो, ज्ञानचंद महतो, कार्तिक चंद्र महतो, रामापति महतो, बी. गोराई और प्रभात रंजन महतो सहित कई अन्य ग्राम प्रधान व सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।