Home » भाजपा का ‘संविधान हत्या दिवस’ सिर्फ राजनीतिक पाखंड: झारखंड कांग्रेस का तीखा हमला
भाजपा का ‘संविधान हत्या दिवस’ राजनीतिक पाखंड और इतिहास को तोड़ने की साजिश: झारखंड कांग्रेस
रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने भाजपा द्वारा मनाए जा रहे तथाकथित “संविधान हत्या दिवस” पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने इसे पूरी तरह से राजनीतिक पाखंड और इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।
राकेश सिन्हा का बड़ा बयान:
“जिस भाजपा और उसके वैचारिक संगठन ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर संविधान निर्माण तक हर महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रक्रिया से खुद को हमेशा अलग रखा, वह आज संविधान की दुहाई देकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।”
“आपातकाल से सीखें, पर इतिहास का राजनीतिकरण न करें”
कांग्रेस मीडिया प्रभारी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस मानती है कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जिससे सीख लेकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को और मजबूत किया जाना चाहिए। लेकिन भाजपा का उद्देश्य इतिहास से सीख लेना नहीं, बल्कि वर्तमान समय की अपनी विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाना है।
⚠️ वर्तमान सरकार पर कांग्रेस के 4 सीधे आरोप
राकेश सिन्हा ने देश की मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए केंद्र की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया और कहा कि आज संविधान की वास्तविक गरिमा खतरे में है:
संस्थाओं पर प्रहार: देश में आज लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता (Autonomy) पर लगातार गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
एजेंसियों का दुरुपयोग: विपक्षी नेताओं की आवाज को दबाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है।
संसद में विपक्ष की अनदेखी: देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद में विपक्ष की आवाज को अनसुना और कमजोर किया जा रहा है।
संवैधानिक पदों की गरिमा: संवैधानिक पदों के महत्व और उनकी निष्पक्षता को लगातार कमजोर करने की कोशिशें जारी हैं।
##💬 “संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, देश की आत्मा है”
प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से सिन्हा ने कहा कि संविधान की हत्या केवल किसी एक ऐतिहासिक घटना से नहीं होती। बल्कि संविधान तब लहूलुहान होता है जब:
लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रहार हो।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech) छीनी जाए।
देश के संघीय ढांचे को चोट पहुंचाई जाए।
सामाजिक न्याय की भावना को कुचला जाए।
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा सरकार के पिछले वर्षों का रिकॉर्ड इसी नकारात्मक दिशा की ओर संकेत करता है। ऐसे में संविधान की रक्षा का उपदेश भाजपा को शोभा नहीं देता, बल्कि देश की जनता खुद भाजपा को यह पाठ पढ़ा रही है।
भाजपा को कांग्रेस की नसीहत:
संविधान की रक्षा का सबसे बड़ा दायित्व उन लोगों पर है जो सत्ता की कुर्सी पर बैठे हैं। भाजपा यदि वास्तव में संविधान के प्रति रत्ती भर भी प्रतिबद्ध है, तो उसे यह राजनीतिक नौटंकी तुरंत छोड़ देनी चाहिए। सरकार को लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, विपक्ष के सम्मान और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए।