Home » चीनी-प्याज की महंगाई पर बिफरे सरयू राय, PM मोदी और CM हेमंत को टैग कर दी ये चेतावनी
चीनी-प्याज की महंगाई से झारखंड पर बढ़ा दबाव; विधायक सरयू राय ने PM मोदी, CM हेमंत और डॉ. इरफान को टैग कर किया ट्वीट !
जमशेदपुर। चीनी और प्याज की लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब झारखंड के बाजारों पर पड़ता दिख रहा है। जमाखोरी और कृत्रिम किल्लत की आशंका को देखते हुए जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने केंद्र और राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।
रविवार को सरयू राय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य के खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले मंत्री डॉ. इरफान अंसारी को टैग करते हुए सख्त कदम उठाने की अपील की।
‘मिलों से ही बढ़ रहे हैं दाम, अभी से हो निगरानी’
सरयू राय ने कहा कि झारखंड जैसे उपभोग वाले राज्य में, जहाँ अधिकांश खाद्य सामग्रियाँ दूसरे राज्यों से आती हैं, मिल स्तर पर कीमतों में तेजी का सीधा असर यहाँ के थोक और खुदरा बाजारों पर पड़ता है।
“सरकार को कीमत बढ़ने का इंतजार करने के बजाय अभी से आपूर्ति और स्टॉक की निगरानी शुरू कर देनी चाहिए। बाजार में जमाखोरी और कार्टेल पर सख्त अंकुश लगाया जाए ताकि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।”
— सरयू राय, विधायक
मिलों के आंकड़ों के साथ उठाए गंभीर सवाल
22 अगस्त के उपलब्ध मिल रेट का हवाला देते हुए सरयू राय ने चीनी की बढ़ती कीमतों पर सवाल उठाए:
राज्य / मिल का नामचीनी का मिल रेट (प्रति क्विंटल)
उत्तर प्रदेश (सहकारी मिलें)₹5,820 से ₹6,000
मोहीउद्दीनपुर मिल (UP)₹6,000
पिपराइच एवं मुंडेरवा मिल (UP)₹6,200
महाराष्ट्र (एम-30 चीनी)₹6,800 (+ GST अतिरिक्त)
महाराष्ट्र (एसएस-30 / एस-30)₹6,675 से ₹6,700 (+ GST)
उन्होंने स्पष्ट किया कि मिल स्तर पर ही चीनी का भाव ₹66.75 से ₹68 प्रति किलो तक पहुँच गया है। ऐसे में यह तेजी जल्द ही स्थानीय बाजार को भी प्रभावित करेगी।
नई फसल से ठीक पहले दामों में उछाल समझ से परे
श्री राय ने तर्क दिया कि महज 30 से 45 दिनों के बाद गन्ने की नई फसल बाजार में आने वाली है। ऐसे समय में चीनी के दाम में अचानक उछाल आना समझ से परे है।
जमाखोरी की जाँच: सरकार को थोक विक्रेताओं और बड़े स्टॉकिस्टों के पास मौजूद चीनी के स्टॉक की तुरंत जाँच करनी चाहिए।
पुराने रेट पर बिक्री: जब नई फसल में कम समय बचा है, तो बढ़ी हुई कीमतों का बोझ जनता पर न डाला जाए और पुरानी दर पर ही चीनी उपलब्ध कराई जाए।
प्याज की कीमतों पर नाफेड (NAFED) की भूमिका पर उठाए सवाल
चीनी के साथ-साथ प्याज के बढ़ते दामों पर भी विधायक ने चिंता जताई:
महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे जमाखोर सक्रिय हो सकते हैं।
नाफेड (NAFED) की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी हस्तक्षेप का असर धरातल पर दिखना चाहिए।
प्रमुख शहरों में जाँच: जमशेदपुर, रांची और धनबाद जैसे बड़े बाजारों में कीमतों में अचानक तेजी आने पर प्रशासन को स्रोत (सोर्स) स्तर तक जाकर जाँच करनी चाहिए।
छोटे कारोबारियों और आम जनता का बजट बिगड़ेगा
सरयू राय ने अंत में चेतावनी दी कि इस महंगाई का असर सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं रहेगा। इससे घरेलू बजट के साथ-साथ होटल-रेस्तरां, मिठाई कारोबार और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े छोटे व्यापारी बुरी तरह प्रभावित होंगे। इसलिए प्रशासन को कार्टेल, कृत्रिम कमी और जमाखोरी तीनों पर एक साथ प्रहार करना होगा।