Home » Giridih Assembly Bypoll 2026: क्या मतदाता पुनरीक्षण के बीच टलेगा गिरिडीह उपचुनाव? जानें क्या कहते हैं नियम
मतदाता पुनरीक्षण कार्य के बीच नहीं हो सकता गिरिडीह का उपचुनाव, जानिए क्या कहते हैं नियम और कब है संभावना !
रांची: झारखंड की राजनीतिक गलियारों में गिरिडीह विधानसभा सीट (32-गिरिडीह) पर होने वाले भावी उपचुनाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में गिरिडीह से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के विधायक और राज्य सरकार में मंत्री रहे सुदिव्य कुमार सोनू के असमय निधन के कारण यह सीट खाली हुई है। सीट रिक्त होने के बाद उपचुनाव की प्रक्रिया को लेकर चुनाव विशेषज्ञों और राजनीतिक जानकारों ने स्थिति स्पष्ट की है।
मतदाता पुनरीक्षण कार्य बना वजह
झारखंड में इस समय 19 अक्टूबर से मतदाता पुनरीक्षण (Electoral Roll Revision) का कार्य संचालित किया जा रहा है। चुनाव आयोग के तय शेड्यूल के मुताबिक, इस पुनरीक्षण का अंतिम प्रकाशन 15 नवंबर को होने की संभावना है।
चुनाव नियमों और संवैधानिक जानकारों के अनुसार, जब तक राज्य या संबंधित क्षेत्र में मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य चल रहा होता है, तब तक किसी भी प्रकार का चुनाव या उपचुनाव आयोजित नहीं कराया जा सकता है। मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन से पूर्व चुनाव प्रक्रिया शुरू करना प्रशासनिक और कानूनी दृष्टिकोण से संभव नहीं होता है।
5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के साथ उपचुनाव की संभावना
चूंकि 15 नवंबर तक मतदाता सूची का पुनरीक्षण पूरा होगा, इसलिए यह स्पष्ट है कि गिरिडीह उपचुनाव तत्काल नहीं हो सकता। ऐसे में जानकारों का मानना है कि निर्वाचन आयोग (ECI) गिरिडीह उपचुनाव को देश के पांच राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों के साथ आयोजित कराने का फैसला ले सकता है।
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर विधानसभाओं का कार्यकाल अगले वर्ष 13 मार्च को समाप्त हो रहा है। इन पांचों राज्यों में अगले वर्ष फरवरी में विधानसभा चुनाव होने की प्रबल संभावना है। प्रशासनिक सहूलियत और चुनावी तैयारी के मद्देनजर चुनाव आयोग गिरिडीह सीट पर भी इन्हीं राज्यों के साथ फरवरी में मतदान करा सकता है।
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से खाली हुई सीट
गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र (Seat No. 32) का प्रतिनिधित्व झामुमो के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू कर रहे थे। हाल ही में उनके असमय निधन से झामुमो और राज्य सरकार को गहरा झटका लगा है। अब नियमानुसार खाली हुई इस सीट पर 6 महीने के भीतर उपचुनाव कराया जाना अनिवार्य है, लेकिन पुनरीक्षण कार्य और आगामी आम चुनावों के समीकरणों को देखते हुए उपचुनाव की तारीखों की घोषणा में मतदाता सूची प्रकाशन तक का समय लग सकता है।