रिश्तों का अंत! प्रेम विवाह से टूटे पिता ने गिरिडीह के राजदह धाम में जीवित बेटी का किया ‘पिंडदान’; घर में गूंजनी थी शहनाई, पर हो गया यह कांड
20 जून को आनी थी बारात, 12 जून को प्रेमी संग भागी सलोनी (बदला हुआ नाम); सोशल मीडिया पर शादी का वीडियो देख आहत हुए परिजन, समाज के सामने हमेशा के लिए तोड़ा नाता
गिरिडीह/कोडरमा, 17 जून 2026:
झारखंड के गिरिडीह और कोडरमा जिले के सीमावर्ती इलाके से एक ऐसी भावुक और हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने सामाजिक ताने-बाने और पुरानी व नई पीढ़ी के बीच बढ़ते वैचारिक मतभेद को चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। कोडरमा जिले के डोमचांच थाना क्षेत्र के रहने वाले एक पिता ने अपनी ही जीवित बेटी से सारे रिश्ते हमेशा के लिए खत्म करते हुए, पवित्र धार्मिक स्थल राजदह धाम में उसका प्रतीकात्मक पिंडदान (Symbolic Pind Daan) कर दिया।
हिंदू सनातन धर्म में पिंडदान आमतौर पर मृत पूर्वजों और आत्मा की शांति के लिए किया जाता है। ऐसे में एक जीवित संतान का जीते-जी पिंडदान कर देना अत्यंत दुर्लभ और क्षेत्र में भारी चर्चा का विषय बन गया है।
📊 घटनाक्रम: शहनाई की गूंज से ‘पिंडदान’ के तर्पण तक की पूरी टाइमलाइन
घर में शादी की खुशियों के बीच कैसे एक फैसले ने सब कुछ बदल दिया, इसकी पूरी टाइमलाइन नीचे तालिका में दी गई है:
मुख्य तारीखें (Timeline 2026) |
घर और समाज में क्या कुछ घटा? |
|---|---|
12 जून की रात |
तिलक, बारात और शादी के भोज की पूरी तैयारी के बीच युवती अचानक घर छोड़कर फरार हो गई। |
15-16 जून (लगभग) |
प्रेमी जोड़े ने सोशल मीडिया (Facebook/Instagram) पर शादी का वीडियो शेयर कर परिजनों को सूचना दी। |
17 जून 2026 (आज) |
आहत पिता और ग्रामीणों ने गिरिडीह के उत्तरवाहिनी तट (राजदह धाम) पर जाकर मुंडन कराया और पिंडदान किया। |
20 जून 2026 (तय तिथि) |
इस तारीख को लड़की की तयशुदा शादी होनी थी, घर में बारात आने वाली थी। |
💔 “हमारे लिए वो मर चुकी है…” — सोशल मीडिया पर वीडियो देख टूटा परिवार
मिली जानकारी के अनुसार, युवती की शादी परिवार की रजामंदी से आगामी 20 जून को होनी तय हुई थी। कार्ड बांटे जा चुके थे, रिश्तेदारों का आना शुरू हो चुका था और टेंट-भोज की सारी बुकिंग हो चुकी थी। लेकिन 12 जून की रात युवती अपने प्रेमी के साथ चुपके से निकल गई।
कुछ दिनों बाद जब दोनों प्रेमियों ने अपनी शादी का वीडियो सोशल मीडिया पर डाला, तो लड़की के परिवार को इस सामूहिक झटके का अहसास हुआ। समाज में हुई इस कथित बदनामी और भावनात्मक आघात से टूट चुके पिता ने बड़ा फैसला लिया। वे अपने सगे-संबंधियों और गांव के गणमान्य लोगों के साथ गिरिडीह के प्रसिद्ध उत्तरवाहिनी तट स्थित राजदह धाम पहुंचे। वहां बकायदा मुंडन कराकर, आचार्य की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अपनी जीवित बेटी को मृत मानकर उसका तर्पण और पिंडदान कर दिया।
💬 “मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका है परिवार”
राजदह धाम में भावुक क्षणों के बीच पिता ने कहा कि इस कदम ने उनके पूरे हंसते-खेलते परिवार को मानसिक रूप से पूरी तरह झकझोर दिया है। समाज और अपनों के बीच वे खुद को भावनात्मक रूप से मृत महसूस कर रहे हैं, इसलिए उन्होंने अपनी मर्जी से भागकर शादी करने वाली बेटी को हमेशा-हमेशा के लिए अपने जीवन और वंशावली से मृत मान लिया है।
🗣️ सोशल मीडिया पर बंटी लोगों की राय: सम्मान बनाम व्यक्तिगत स्वतंत्रता
इस अनोखी और दर्दनाक घटना के बाद कोडरमा और गिरिडीह के स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप्स और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। समाज का एक बड़ा वर्ग इसे दो अलग-अलग नजरियों से देख रहा है:
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परंपरा और माता-पिता का पक्ष: कुछ लोगों का कहना है कि जिस माता-पिता ने उंगली पकड़कर चलना सिखाया, उनकी इज्जत और लाखों रुपये के खर्च को दांव पर लगाकर शादी के ठीक 8 दिन पहले भाग जाना किसी भी माता-पिता को जीते-जी मार देने जैसा है। इसलिए पिता की पीड़ा और उनका गुस्सा पूरी तरह स्वाभाविक है।
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नई पीढ़ी और आधुनिक पक्ष: इसके विपरीत, युवाओं और बुद्धिजीवियों के एक वर्ग का मानना है कि आज के आधुनिक दौर में बालिग युवाओं को अपने जीवनसाथी को चुनने का पूरा कानूनी अधिकार है। किसी भी फैसले पर परिवार और बच्चों के बीच संवाद होना चाहिए, नाता तोड़ना या इस तरह जीते-जी पिंडदान करना अंधविश्वास और रूढ़िवादिता को बढ़ावा देता है।




















