Home » लंदन और दुबई के बाजारों में घुली झारखंड के आमों की मिठास, ‘पलाश’ ब्रांड के दम पर दीदियों ने किया लाखों का बिजनेस
सात समंदर पार पहुंचा झारखंड का ‘पलाश आम’: लंदन और दुबई के सुपरमार्केट्स में बढ़ी मांग; सखी मंडल की दीदियों ने रच दिया इतिहास!
बिरसा हरित ग्राम योजना से लहलहाए 1.86 लाख एकड़ के बागान; अब तक ₹60.51 लाख से अधिक का बंपर कारोबार, ब्लिंकिट और रिलायंस फ्रेश पर भी बिकेगा झारखंडी आम
रांची, 17 जून 2026:
मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन की दूरदर्शी सोच और झारखंड के ग्रामीण इलाकों की सखी मंडल की दीदियों (महिला किसानों) की कड़ी मेहनत के अनूठे संगम ने एक नया इतिहास रच दिया है। झारखंड सरकार द्वारा संचालित ‘पलाश’ ब्रांड के तहत ‘झारखंड मैंगो मार्केटिंग इनिशिएटिव’ ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तकदीर बदल दी है। आज झारखंड की माटी में उपजा प्रीमियम आम न केवल देश के बड़े रिटेल चेन बल्कि सात समंदर पार अंतरराष्ट्रीय बाजारों (लंदन और दुबई) में भी अपनी मिठास घोल रहा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस अनूठी मुहिम के तहत अब तक 2,24,200 किलोग्राम (2240 क्विंटल) से अधिक आमों की रिकॉर्ड बिक्री की जा चुकी है, जिससे ग्रामीण महिलाओं ने मात्र कुछ ही हफ्तों में ₹60.51 लाख से अधिक का सीधा कारोबार कर लिया है।
📊 झारखंड मैंगो इनिशिएटिव 2026: एक नजर में मुख्य आंकड़े
झारखंड के आम उत्पादन, वैश्विक निर्यात और बाजार के सुव्यवस्थित वर्गीकरण का पूरा विवरण नीचे तालिका में दिया गया है:
मुख्य पहलू (Key Aspect)
|
जमीनी हकीकत और वित्तीय आंकड़े
|
कुल बागान क्षेत्र
|
राज्य के 1.86 लाख एकड़ क्षेत्र में फैले हैं आम के लहलहाते बगीचे।
|
लाभान्वित परिवार
|
लगभग 2.15 लाख ग्रामीण परिवारों को सीधे मिली स्थायी आजीविका।
|
इस सीजन का अनुमान
|
52,000 एकड़ बागान तुड़ाई के लिए तैयार, 50,000 मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य।
|
लंदन (UK) निर्यात
|
सिमडेगा ज़िले से 1,580 किलोग्राम प्रीमियम आम सीधे लंदन भेजे गए।
|
दुबई (UAE) निर्यात
|
रामगढ़ क्लस्टर से 1,500 मीट्रिक टन से अधिक आम दुबई एक्सपोर्ट हुए।
|
कुल FPOs की भागीदारी
|
राज्यभर के 115 फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन्स पलाश नेटवर्क से जुड़े।
|
👑 कोरोना काल की ‘बिरसा हरित ग्राम योजना’ आज बनी वरदान
मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से कोरोना संक्रमण काल में ‘बिरसा हरित ग्राम योजना’ की शुरुआत हुई थी। उस संकट काल में अपने गांव लौटे प्रवासी श्रमिकों और सखी मंडल की दीदियों ने बंजर जमीनों पर फलदार पौधे लगाए थे। आज वही मेहनत रंग लाई है।
इस पूरी मुहिम की सबसे खास बात यह है कि आम के कलेक्शन, ग्रेडिंग, पैकेजिंग से लेकर उसकी ब्रांडिंग और पूरी मार्केटिंग की कमान ग्रामीण महिलाएं (सखी मंडल की दीदियाँ) खुद संभाल रही हैं। उन्हें जेएसएलपीएस (JSLPS) द्वारा संगठित बाजार और सही मूल्य उपलब्ध कराया जा रहा है। गुणवत्ता बनाए रखने के लिए ICAR-RCER, पलांडू द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
🎯 ग्रेडिंग सिस्टम से किसानों को मिल रहा अधिकतम मुनाफा
आमों की सही कीमत दिलाने के लिए बाजार को तीन स्पष्ट श्रेणियों में बांटा गया है:
Grade A (प्रीमियम): यह आम APEDA प्रमाणित निर्यातकों के माध्यम से यूएई, सऊदी अरब और यूके भेजे जा रहे हैं। घरेलू बाजार में इन्हें पलाश मार्ट और अपना मार्ट पर 60 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जा रहा है। गुमला के FPOs ने अकेले अपना मार्ट को 2,000 किलो आम की आपूर्ति की है।
Grade B (कमर्शियल): इन्हें देश के संगठित खुदरा बाजारों और पलाश के रिटेल चैनलों में सीधे भेजा जा रहा है।
Grade C (लोकल रिटेल): आम जनता तक सीधे पहुंच बनाने के लिए इन्हें स्थानीय बाजारों, पलाश कैनोपी कियोस्क, बस स्टैंडों और साप्ताहिक हाट-बाजारों के माध्यम से बेचा जा रहा है।
🚀 ब्लिंकिट और रिलायंस फ्रेश के साथ डील अंतिम चरण में
झारखंड के इस रसीले आम की भारी डिमांड को देखते हुए पलाश ब्रांड अब क्विक-कॉमर्स और बड़े कॉर्पोरेट रिटेलर्स की तरफ कदम बढ़ा रहा है। पलाश के बाजार विस्तार के लिए देश की दिग्गज कंपनियों जैसे ब्लिंकिट (Blinkit), रिलायंस फ्रेश (Reliance Fresh) और कशिश मॉल जैसे बड़े कॉर्पोरेट घरानों के साथ बातचीत अंतिम चरण में है। बहुत जल्द शहरी उपभोक्ता घर बैठे ऑनलाइन ऐप से झारखंड की दीदियों के हाथों का तोड़ा हुआ ताजा आम मंगा सकेंगे।
👥 जमीनी स्तर पर ‘बायर-सेलर मीट’ से मजबूत हो रहा नेटवर्क
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य में सक्रिय लगभग 115 FPOs को पलाश मैंगो कैनोपी काउंटर्स से जोड़ा गया है, जो जिला-वार संग्रह और बिक्री का काम देख रहे हैं। बाजार को और मजबूत करने के लिए ब्लॉक और जिला स्तर पर फार्मर्स मेला तथा ‘बायर-सेलर मीट’ (क्रिता-विक्रेता सम्मेलन) आयोजित की जा रही हैं ताकि बिचौलियों को खत्म कर मुनाफा सीधे किसानों के बैंक खातों तक पहुंचाया जा सके।