Home » झारखंड के 11 स्वदेशी उत्पादों को एक साथ मिला GI टैग; कुचाई सिल्क, डोकरा क्राफ्ट और केसरिया कलाकंद की बढ़ी वैश्विक धमक
झारखंड की कला और संस्कृति का वैश्विक डंका: राज्य के 11 और उत्पादों को मिला प्रतिष्ठित ‘GI टैग’; झारक्राफ्ट ने रचा इतिहास
साल 2019 तक सिर्फ 1 उत्पाद के पास था यह दर्जा, अब संख्या बढ़कर हुई 12; आदिवासी आभूषण, जादुपटुआ पेंटिंग और बांस शिल्प को मिली कानूनी सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय पहचान
रांची, 17 जून 2026:
झारखंड की अनूठी कला, समृद्ध पारंपरिक शिल्प, हस्तशिल्प और लजीज व्यंजनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार को एक बहुत बड़ी ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। जीआई (भौगोलिक संकेतक) रजिस्ट्री ने झारखंड के 11 और महत्वपूर्ण स्वदेशी उत्पादों को एक साथ जीआई (GI) टैग प्रदान कर दिया है।
इस अभूतपूर्व उपलब्धि के बाद झारखंड के पारंपरिक उत्पादों को न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी सुरक्षा मिलेगी, बल्कि बाजार में नकली उत्पादों पर लगाम कसने के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों और किसानों को उनकी कला का सही मूल्य मिल सकेगा।
📊 झारखंड का जीआई (GI) क्लब 2026: एक नजर में
वर्ष 2019 तक झारखंड के पास केवल एक जीआई-टैग उत्पाद था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 12 हो गई है। जीआई क्लब में शामिल हुए सभी नए 11 उत्पादों की सूची नीचे तालिका में दी गई है
क्र.सं.
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जीआई (GI) क्लब में शामिल झारखंड के 11 नए गौरव
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उत्पाद की श्रेणी (Type)
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1
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कुचाई सिल्क साड़ी और कपड़े
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वस्त्र एवं परिधान
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2
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भगैया साड़ी और कपड़े
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वस्त्र एवं परिधान
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3
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झारखंड की टसर सिल्क साड़ियाँ और कपड़े
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वस्त्र एवं परिधान
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4
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झारखंड पंछी परहान पंछी साड़ी और कपड़े
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पारंपरिक जनजातीय परिधान
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5
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दुमका चादर बदोनी पुतुल (कठपुतली)
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पारंपरिक हस्तशिल्प / खिलौना
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6
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झारखंड डोकरा क्राफ्ट (धातु शिल्प)
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मेटल हस्तशिल्प
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7
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झारखंड के आदिवासी आभूषण (Tribal Jewellery)
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पारंपरिक आभूषण
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8
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झारखंड के बांस शिल्प (Bamboo Crafts)
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हस्तशिल्प
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9
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केसरिया कलाकंद
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प्रसिद्ध स्थानीय मिष्ठान
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10
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झारखंड जादुपटुआ पेंटिंग
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पारंपरिक लोक कला
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11
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झारखंड बेनाम
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पारंपरिक उत्पाद
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(नोट: इन सभी नए जीआई टैगों का आधिकारिक प्रकाशन आगामी कुछ दिनों में कर दिया जाएगा। इनके अलावा साल 2019 से ‘सोहराई और खोवर पेंटिंग’ के पास पहले से जीआई टैग मौजूद है।)
🏆 झारक्राफ्ट की बड़ी उपलब्धि: एक साथ 3 उत्पादों का कराया रजिस्ट्रेशन
झारखंड सरकार के उद्योग विभाग के अंतर्गत कार्यरत झारक्राफ्ट (Jharcraft) और मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड वर्ष 2019 से ही राज्य के उत्पादों को जीआई ढांचा दिलाने के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रहे थे।
इस बार झारक्राफ्ट ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए तीन सबसे महत्वपूर्ण उत्पादों— झारखंड की टसर सिल्क साड़ियाँ और कपड़े, झारखंड के आदिवासी आभूषण और झारखंड के बांस शिल्प के लिए जीआई पंजीकरण सुरक्षित कराया है। यह ऐतिहासिक कदम राज्य के ग्रामीण कारीगरों और पारंपरिक बुनकर समुदायों की दृश्यता, प्रामाणिकता और अंतरराष्ट्रीय बाजार क्षमता को पंख लगाएगा।
🛍️ कतार में हैं धुस्का, देवघर पेड़ा और लाह की चूड़ियाँ; और बढ़ेगी ताकत
सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय (PRD) के अनुसार, झारखंड की यह जीआई यात्रा यहीं रुकने वाली नहीं है। राज्य के कई अन्य बेहद लोकप्रिय और स्वदेशी उत्पादों के आवेदन भी जीआई रजिस्ट्री में पहले से जमा किए जा चुके हैं, जो जल्द ही प्रमाणित होने वाले हैं।
कतार में शामिल उत्पाद: झारखंड का पारंपरिक वाद्य यंत्र मांदर, प्यतकर पेंटिंग, निमुचा/करनी शॉल, लाह की चूड़ियाँ (Lac Bangles), प्रसिद्ध देवघर का पेड़ा, रागी, रुगड़ा, झारखंड का सिग्नेचर फूड धुस्का, कुसुमी लाहा, साल के बीज, महुआ का फूल और करंज के बीज शामिल हैं।
📈 स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा जबरदस्त बूस्ट
इस जीआई टैग के मिल जाने से अब कोई भी बाहरी कंपनी या राज्य, झारखंड की इन कलाकृतियों या उत्पादों के नाम पर नकली सामान वैश्विक बाजार में ब्रांड बनाकर नहीं बेच पाएगा। इससे न केवल ‘मेक इन झारखंड’ को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सीधे तौर पर राज्य के लाखों आदिवासियों, शिल्पकारों, बुनकरों और ग्रामीण उद्यमियों के बैंक खातों तक सीधा मुनाफा पहुंचेगा।