Home » हेमंत सरकार के दौरान 4 मंत्रियों का निधन: शिक्षा विभाग से जुड़े 3 नेताओं का असमय जाना बना बड़ा राजनीतिक विषय
हेमंत सोरेन सरकार के दौरान 4 मंत्रियों का निधन: शिक्षा विभाग से जुड़े रहे 3 प्रमुख चेहरे
रांची: झारखंड की राजनीति में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल के दौरान एक दुखद और अजीबोगरीब घटनाक्रम चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सरकार के कार्यकाल में अब तक मंत्रिमंडल के 4 वरिष्ठ मंत्रियों का असमय निधन हो चुका है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस बात को लेकर गहरा शोक तो है ही, साथ ही इस बात की भी व्यापक चर्चा हो रही है कि दिवंगत हुए चार में से तीन मंत्री सीधे तौर पर राज्य के शिक्षा महकमे से जुड़े हुए थे।
दिवंगत मंत्रियों और उनके विभागों का ब्योरा
हाजी हुसैन अंसारी: हेमंत सरकार के शुरुआती कार्यकाल में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री रहे हाजी हुसैन अंसारी का निधन हुआ था। वह जेएमएम के वरिष्ठ नेताओं में से एक थे।
जगरनाथ महतो: राज्य के पूर्व स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग मंत्री। ‘टाइगर’ के नाम से मशहूर जगरनाथ महतो का बीमारी के इलाज के दौरान निधन हो गया था।
रामदास सोरेन: जगरनाथ महतो के बाद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का दायित्व संभालने वाले वरिष्ठ नेता रामदास सोरेन का भी आकस्मिक निधन हो गया।
सुदिव्य कुमार सोनू: गिरिडीह से विधायक और हेमंत सरकार में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग (साथ ही नगर विकास व पर्यटन) का कार्यभार संभाल रहे सुदिव्य कुमार सोनू का हाल ही में निधन हो गया है।
शिक्षा महकमे से जुड़ा अनोखा और दुखद संयोग
राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान इस बात पर विशेष रूप से गया है कि जिन चार मंत्रियों ने जान गंवाई है, उनमें से तीन नेता शिक्षा क्षेत्र के विभागों से जुड़े रहे।
जगरनाथ महतो और रामदास सोरेन ने जहां प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा (स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग) की कमान संभाली थी, वहीं सुदिव्य कुमार सोनू के पास राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी थी।
शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग के तीन प्रमुख मंत्रियों का एक ही शासनकाल के भीतर असमय चले जाना राज्य प्रशासनिक व्यवस्था और सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) दोनों के लिए एक बड़ी अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
पार्टी और सरकार में शोक की लहर
इन वरिष्ठ नेताओं के निधन से न केवल मंत्रिमंडल का स्वरूप बदला है, बल्कि जेएमएम ने अपने कई अनुभवी और जनाधार वाले चेहरे खो दिए हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं ने इन क्षतियों पर गहरा शोक व्यक्त किया है। राज्य सरकार के लिए इन विभागों के प्रशासनिक संचालन के साथ-साथ खाली पड़े पदों और राजनीतिक शून्य को भरना एक बड़ी चुनौती बन गया है।