Home » होमगार्ड जवानों के साथ अन्याय बंद करे सरकार, मानदेय न मिलने से जवान रोने और आत्महत्या को मजबूर: राफिया नाज़
होमगार्ड जवानों के साथ अन्याय बंद करे हेमंत सरकार, झूठे वादों की खुल रही पोल: राफिया नाज़
जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में महिला होमगार्ड जवान के फूट-फूटकर रोने और मानदेय न मिलने की घटना पर भड़कीं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता।
रांची / जमशेदपुर:भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज़ ने झारखंड की सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि होमगार्ड जवानों के आँसू हेमंत सरकार के झूठे वादों और संवेदनहीन शासन की पोल खोल रहे हैं। वर्दी पहनकर राज्य की सुरक्षा करने वाला जवान आज अपने ही बच्चों का पेट भरने और इलाज कराने के लिए रोने को मजबूर है।
”मानदेय नहीं मिला तो मर जाएंगे” – झकझोर देने वाली घटना
राफिया नाज़ ने जमशेदपुर के एमजीएम (MGM) अस्पताल की एक हालिया घटना का ज़िक्र करते हुए कहा:
”ड्यूटी के दौरान पाँच महीने से मानदेय (Salary) नहीं मिलने के कारण एक महिला होमगार्ड जवान का फूट-फूटकर रो पड़ना पूरे झारखंड को झकझोर देने वाली घटना है। अस्पताल परिसर में उस बेबस महिला होमगार्ड ने रोते हुए कहा कि ‘मानदेय नहीं मिला तो मर जाएंगे’। गंभीर बीमारी के बावजूद वह अपना इलाज तक कराने में असमर्थ है। यह केवल एक महिला का दर्द नहीं, बल्कि झारखंड के हजारों होमगार्ड जवानों की पीड़ा है।”
उन्होंने याद दिलाया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इसी महीने जमशेदपुर के इसी अस्पताल में आर्थिक तंगी से परेशान एक अन्य महिला होमगार्ड द्वारा आत्महत्या का प्रयास भी किया गया था। इसके बावजूद सरकार ने कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकाला। इससे स्पष्ट है कि हेमंत सरकार के लिए होमगार्ड जवानों का सम्मान और उनका जीवन दोनों ही प्राथमिकता में नहीं हैं।
हाईकोर्ट के निर्देशों का मखौल और जिला-वार ब्यौरे पर सवाल
भाजपा प्रवक्ता ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2024 में झारखंड उच्च न्यायालय (Jharkhand High Court) के निर्देश के बाद सरकार ने होमगार्ड जवानों का दैनिक मानदेय बढ़ाने की घोषणा तो की, लेकिन धरातल पर आज भी कई जवानों का मानदेय महीनों तक लंबित रहता है।
राफिया नाज़ की सरकार से सीधी मांग:
यदि सरकार न्यायालय के निर्देशों के पालन का दावा करती है, तो वह यह स्पष्ट करे कि कितने होमगार्ड जवानों का भुगतान अभी भी लंबित है?
सरकार इसका जिला-वार ब्यौरा सार्वजनिक क्यों नहीं कर रही है?
चुनावी वादों के साथ सीधा विश्वासघात
राफिया नाज़ ने कहा कि चुनाव के दौरान झामुमो (JMM) ने होमगार्ड जवानों को सेवा सुरक्षा, सम्मान और स्थायी रोजगार की दिशा में ठोस पहल का भरोसा दिया था। लेकिन आज वही जवान अपने हक के मेहनताने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। न सेवा सुरक्षा मिली, न समय पर भुगतान और न ही भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट नीति। यह चुनावी वादों के साथ सीधा विश्वासघात है। जब जवानों ने अपने अधिकारों की मांग की, तो सरकार ने उनके आंदोलनों पर लाठियाँ बरसाईं।
प्रशासनिक विफलता: हर वर्ग परेशान
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि होमगार्ड जवानों की यह स्थिति सरकार की व्यापक प्रशासनिक विफलता का सिर्फ एक उदाहरण है। इसके अलावा:
मंईयां सम्मान योजना: लिस्टिंग और डीलिस्टिंग की शिकायतों से हजारों महिलाएँ परेशान हैं।
पेंशन योजनाएं: विधवा और दिव्यांग पेंशन के लाभार्थी समय पर पेंशन के लिए भटक रहे हैं।
वृद्धा पेंशन: बुजुर्गों का वृद्धा पेंशन तक बंद है और सरकार सिर्फ अपने प्रचार में व्यस्त है।
”जिस सरकार में रक्षक ही दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो जाए, उस सरकार के संवेदनशील होने के सभी दावे स्वतः समाप्त हो जाते हैं। झारखंड की जनता अब खोखली घोषणाएँ नहीं, बल्कि जवाब और न्याय चाहती है।” – राफिया नाज़, प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा
भाजपा की प्रमुख मांगें:
सभी होमगार्ड जवानों का लंबित मानदेय तत्काल जारी किया जाए।
न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप संशोधित मानदेय का नियमित (महीनेवार) भुगतान सुनिश्चित हो।
होमगार्ड जवानों की सेवा सुरक्षा पर एक स्पष्ट और स्थायी नीति लाई जाए।
सरकार अपने चुनावी वादों को बिना किसी देरी के अविलंब पूरा करे।