Home » झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026: कांग्रेस का भाजपा पर बड़ा हमला— ‘अपने ही विधायकों के टूटने के डर से बीजेपी ने किया नजरबंद’
“दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी अपने ही विधायकों से क्यों डरी?” — कांग्रेस प्रवक्ता सोनाल शांति का भाजपा पर तीखा तंज; लगाया ‘नजरबंदी’ का आरोप
राज्यसभा चुनाव 2026 से पहले झारखंड में बढ़ी सियासी तपिश; कांग्रेस का दावा— महागठबंधन के पास 56 से अधिक विधायकों का समर्थन, मिटेगा खरीद-फरोख्त का कलंक
रांची, 16 जून 2026:
झारखंड में आगामी राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव से ठीक पहले सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। सत्ताधारी महागठबंधन और मुख्य विपक्षी दल भाजपा के बीच शह और मात का खेल शुरू हो चुका है। इसी कड़ी में आज झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता श्री सोनाल शांति ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश नेतृत्व पर बेहद गंभीर और तीखे आरोप लगाए हैं।
सोनाल शांति ने भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए सवाल किया कि आखिर खुद को ‘विश्व की सबसे बड़ी पार्टी’ कहने वाली भाजपा को झारखंड में किसका डर सता रहा है, जो उसने अपने ही विधायकों को राजधानी रांची में ‘नजरबंद’ (कारावास की तरह) करके रख दिया है?
📊 राज्यसभा चुनाव 2026: सत्ता पक्ष बनाम विपक्ष का सियासी समीकरण (कांग्रेस के दावे के अनुसार)
कांग्रेस प्रवक्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और गठबंधन की मजबूती के दावों का पूरा ब्योरा नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट किया गया है:
सियासी पहलू (Political Aspect)
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कांग्रेस प्रवक्ता सोनाल शांति के मुख्य दावे व आरोप
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विपक्षी दल (BJP) की स्थिति
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विधायकों में बिखराव का डर; उम्मीदवार के नाम पर कई विधायक अलग मत पाले हुए हैं।
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महागठबंधन (JMM+INC) की ताकत
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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मजबूत नेतृत्व में पूरी तरह एकजुट और अडिग।
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दावाकृत समर्थन (Expected Votes)
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वर्तमान राजनीतिक हालातों के अनुसार 56 से अधिक विधायकों का समर्थन हासिल है।
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चुनाव का मुख्य उद्देश्य
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सिर्फ दो सीटें जीतना नहीं, बल्कि झारखंडी अस्मिता को बचाना और पुराना कलंक मिटाना है।
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⚡ “दूसरों के विधायक खरीदने वाली भाजपा के खुद छूट रहे पसीने”
कांग्रेस प्रवक्ता ने भाजपा की आंतरिक रणनीति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो पार्टी डर, भय, लालच और खरीद-फरोख्त के दम पर विभिन्न राज्यों में विपक्ष की सत्ता और सांसदों-विधायकों को खरीदती रही है, वह आज झारखंड में इतनी सहमी हुई क्यों है?
उन्होंने आगे कहा:
“भाजपा के शीर्ष राज्य नेतृत्व को अपने सभी विधायकों को एक जगह जमा रखने में पसीने छूट रहे हैं। भाजपा बाहर से यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि उसके विधायक ‘एकजुट’ हैं, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। राज्यसभा उम्मीदवार को समर्थन देने के नाम पर भाजपा के अधिकांश विधायक अपना-अपना एक अलग गुट और मत बनाकर बैठे हुए हैं। यही कारण है कि उन्हें अविश्वास के साए में कैद रखा गया है।”
🚫 “पूंजीपतियों के सहारे झारखंड को बदनाम करने की चाल विफल”
सोनाल शांति ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड की मजबूत गठबंधन सरकार में सेंध लगाने के लिए हमेशा की तरह पूंजीपतियों का सहारा लिया था। उनका उद्देश्य खरीद-फरोख्त के जरिए झारखंड को पूरे देश में बदनाम करना था, लेकिन उनकी यह कुत्सित चाल और प्रयोग पूरी तरह विफल साबित हुआ है।
🗳️ अस्मिता और कलंक मिटाने की लड़ाई है यह चुनाव
कांग्रेस ने साफ किया कि महागठबंधन के दोनों राज्यसभा उम्मीदवारों की जीत पूरी तरह सुनिश्चित है। यह चुनाव केवल संख्या बल का नहीं, बल्कि झारखंड पर लगे खरीद-फरोख्त के पुराने कलंक को हमेशा के लिए धो डालने और झारखंडी अस्मिता को सुरक्षित रखने की लड़ाई है। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों का इशारा साफ है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कुशल रणनीतिक नेतृत्व में महागठबंधन इस चुनाव में भारी मतों से फतह हासिल करने जा रहा है।