Home » ओमान में फंसी सिमडेगा की बेटी प्रीति कुजूर की सुरक्षित वापसी, CM हेमंत सोरेन के कड़े रुख के बाद मिली सफलता
रांची :विदेश में बेहतर भविष्य का सपना लेकर गई झारखंड की एक और बेटी फर्जी एजेंटों के जाल से आजाद होकर अपने वतन लौट रही है। ओमान (मस्कट) में प्रताड़ना का सामना कर रही सिमडेगा की प्रवासी श्रमिक सुश्री प्रीति कुजूर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सीधे हस्तक्षेप के बाद सुरक्षित बचा लिया गया है। प्रीति 1 अगस्त को मस्कट से भारत के लिए रवाना हो चुकी हैं और 2 अगस्त को अपने गृह जिले झारखंड पहुंचेंगी।
🚨 50 हजार की नौकरी का झांसा देकर ओमान में बनाया बंधक
सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड स्थित मरारोमा गंझूटोली की रहने वाली प्रीति कुजूर मार्च 2026 में फर्जी एजेंट के धोखे का शिकार हुई थीं। एजेंट ने उन्हें दुबई में ₹45,000 से ₹50,000 प्रति माह वेतन का लालच दिया था, लेकिन छल-कपट से उन्हें ओमान भेज दिया गया।
कम वेतन और शोषण: ओमान में उनसे महज ₹23,000 से ₹25,000 में काम कराया जाने लगा।
लाखों की उगाही: जब प्रीति ने भारत लौटने की इच्छा जताई, तो कंपनी मालिक ने भारी रकम की मांग की। परिजनों द्वारा ₹1.92 लाख चुकाने के बाद भी उन्हें रिहा नहीं किया गया।
पासपोर्ट जब्त: मालिक 2 साल का ठेका पूरा करने से पहले वापसी के लिए 950 ओमानी रियाल की अड़ियल मांग पर अड़ा रहा।
⚡ CM हेमंत सोरेन की कड़ी हिदायत पर एक्शन में आया प्रशासन
19 जून 2026 को प्रीति के भाई रंतु कुजूर ने राज्य सरकार से मदद की गुहार लगाई। सोशल मीडिया के जरिए मामला सामने आते ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे बेहद गंभीरता से लिया।
CM के सख्त निर्देश मिलते ही श्रम एवं कौशल विकास विभाग के तहत संचालित राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष तुरंत एक्शन मोड में आ गया:
23 जून 2026: त्वरित आधिकारिक कार्रवाई
प्रोटेक्टर ऑफ एमिग्रेंट्स (POE) को मामला भेजा गया
नियंत्रण कक्ष ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे प्रोटेक्टर ऑफ एमिग्रेंट्स (POE), रांची और भारतीय दूतावास (मस्कट) को तत्काल प्रेषित किया।
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24 जून 2026: दूतावास का संपर्क
पीड़ित युवती से सीधी बातचीत
भारतीय दूतावास (मस्कट) ने पीड़ित प्रीति कुजूर से संपर्क स्थापित कर उनकी स्थिति की जानकारी ली।
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कूटनीतिक बातचीत व राहत
पेनल्टी में छूट एवं कागजात की बरामदगी
दूतावास और नियंत्रण कक्ष के कड़े रुख के बाद कंपनी मालिक अनुचित मांग घटाकर 600 ओमानी रियाल करने पर सहमत हुआ। राशि का भुगतान कराकर पासपोर्ट और सभी मूल दस्तावेज वापस जब्त कराए गए।
झारखंड सरकार देश ही नहीं, बल्कि विदेश में भी काम कर रहे अपने श्रमिकों के अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसी भी परेशानी के समय हमारे श्रमिक भाइयों-बहनों को तुरंत मदद पहुंचाना हमारी पहली प्राथमिकता है।”