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JPSC विवाद: ‘भाजपा को हेमंत सरकार पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं’ – JMM महासचिव विनोद कुमार पांडेय !
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े घटनाक्रम और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा पलटवार किया है। JMM के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य के युवाओं के भविष्य की सुरक्षा और निष्पक्षता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
“माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन किसी भी वर्ग के साथ अन्याय नहीं होने देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली ‘बड़ी मछलियों’ के चेहरे बहुत जल्द बेनकाब होंगे।”
— विनोद कुमार पांडेय, केंद्रीय महासचिव व प्रवक्ता, JMM
🚨 गड़बड़ी पर तत्काल एक्शन, कई गिरफ्तारियां
विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि जैसे ही परीक्षा में अनियमितता की शिकायत मिली, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए। सरकार केवल विभागीय जांच तक सीमित नहीं रही, बल्कि:
📝 प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई।
🕵️♂️ जांच एजेंसियों को तत्काल JPSC कार्यालय भेजा गया।
👮♂️ पूर्व चेयरमैन व संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों से सघन पूछताछ की गई।
🔒 मामले में शामिल कई दोषियों की गिरफ्तारी भी की जा चुकी है।
JMM नेता के अनुसार, यह त्वरित कार्रवाई इस बात का ठोस प्रमाण है कि हेमंत सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की नीति पर काम कर रही है।
🏛️ भाजपा के शासनकाल की याद दिलाकर साधा निशाना
JMM महासचिव ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकारों के दौरान JPSC की स्थिति का ब्योरा देते हुए कहा कि भाजपा को इस मुद्दे पर बोलने का कोई नैतिक हक नहीं है।
कार्यकाल / मुख्यमंत्रीJPSC से जुड़े विवाद एवं आरोप
बाबूलाल मरांडी कार्यकालपहली संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में मूल्यांकन प्रक्रिया, उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर और चयन पर गंभीर सवाल उठे। मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों तक पहुंची।
अर्जुन मुंडा कार्यकालउत्तर पुस्तिकाओं में कथित हेरफेर, अंक बढ़ाए जाने, भाई-भतीजावाद और पारदर्शिता की कमी के आरोप लगे। अभ्यर्थियों को वर्षों संघर्ष करना पड़ा।
रघुवर दास कार्यकालपरीक्षाओं का नियमित कैलेंडर लागू नहीं हो सका। भर्तियों में विलंब, कट-ऑफ व नियमों पर विवाद के कारण युवा सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए।
⚖️ “पारदर्शिता और मेरिट आधारित भर्ती ही हेमंत सरकार का संकल्प”
विनोद पांडेय ने जोर देकर कहा कि हेमंत सरकार युवा, किसान, मजदूर, महिला, दलित, आदिवासी, मूलवासी और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षक है।
पारदर्शी व्यवस्था: भर्तियों की विश्वसनीयता से कोई समझौता नहीं होगा।
गरीबों को अवसर: पारदर्शी चयन प्रक्रिया के कारण ही पिछली नियुक्तियों में काफी संख्या में जरूरतमंद और गरीब परिवारों के बच्चों को सरकारी सेवा में आने का मौका मिला है।
कानून के तहत कार्रवाई: पूर्ववर्ती सरकारों की तरह मामलों पर पर्दा डालने के बजाय हेमंत सरकार कानून के मुताबिक सख्त कदम उठा रही है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा का मानना है कि राज्य के युवाओं का अटूट विश्वास ही राज्य की सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे बनाए रखने के लिए सरकार हर आवश्यक कदम उठाएगी।