Home » रामगढ़ खदान हादसा: बाबूलाल मरांडी का आरोप— ‘यह मौत नहीं, सामूहिक हत्या है’
पीड़ित परिवारों से मिलकर बरसे बाबूलाल मरांडी, की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग
रामगढ़/रांची: रामगढ़ के अरगड्डा इलाके में बंद पड़ी कोयला खदान में गैस रिसाव और दम घुटने से चार गरीब मजदूरों की मौत का मामला अब बेहद गंभीर राजनीतिक मोड़ ले चुका है। झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी खुद ग्राउंड जीरो पर अरगड्डा पहुंचे। उन्होंने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और व्यवस्था पर तीखा हमला बोला।
बाबूलाल मरांडी ने इस पूरी घटना को प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीन व्यवस्था का नतीजा बताया है।
💰 “बोली लगाकर पोस्टिंग और हफ्ता वसूली का खेल” — मरांडी का आरोप
घटनास्थल का जायजा लेने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने प्रशासनिक व्यवस्था पर निशाना साधा:
प्राथमिकता बदली: उन्होंने आरोप लगाया कि रामगढ़ अब अवैध कोयला सिंडिकेट के मामले में धनबाद से भी आगे निकल चुका है। जब सत्ता के गलियारों में कथित तौर पर ‘बोली’ लगाकर अफसरों की पोस्टिंग तय होती है, तो उनकी प्राथमिकता जनता की सुरक्षा और नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि ‘हफ्ता वसूली’ बन जाती है।
सिंडिकेट का राज: पूरे राज्य में सरकार, प्रशासन और अवैध खनन माफियाओं का एक मजबूत सिंडिकेट काम कर रहा है, जिसके कारण आए दिन इस तरह की जनहानि हो रही है।
🚨 “यह हादसा नहीं, भ्रष्ट तंत्र द्वारा की गई सामूहिक हत्या है”
मरांडी ने जिला प्रशासन और सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) प्रबंधन को कटघरे में खड़ा करते हुए कई कड़े सवाल दागे:
प्रशासनिक फेलियर: जब बंद पड़ी खदानों की घेराबंदी करना, सुरक्षा सुनिश्चित करना और लोगों की आवाजाही रोकना प्रशासन व सीसीएल की जिम्मेदारी है, तो फिर रामगढ़ के डीसी, एसपी और सीसीएल के बड़े अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से कैसे बच सकते हैं?
हाईटेक कूप और सुरंगे: अरगड्डा इलाके में 100 से अधिक अवैध सुरंगनुमा कूप (कुएं) बनाकर कोयला निकाला जा रहा है। इन अवैध कूपों के अंदर बकायदा पंखे और रोशनी की हाईटेक व्यवस्था मौजूद है। क्या इतनी बड़ी व्यवस्था बिना स्थानीय मिलीभगत के एक दिन में खड़ी हो सकती है?
😰 “इंसानियत शर्मसार: रेस्क्यू के नाम पर वसूले 5-5 हजार रुपए”
मृतक देवा बेदिया, डबलू बेदिया, किशोर रवानी और आशीष घटवार के परिजनों से बात करने के बाद बाबूलाल मरांडी ने बेहद चौंकाने वाला और गंभीर खुलासा किया:
“हादसे के बाद मानवता को तार-तार कर देने वाला खेल खेला गया। ग्रामीणों का आरोप है कि फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू के नाम पर 5-5 हजार रुपये की अवैध वसूली की गई। गंभीर हालत में तड़प रहे लोगों को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल भेजने के बजाय, सीधे सदर अस्पताल ले जाकर पोस्टमार्टम की तैयारी शुरू कर दी गई ताकि मामले को रफा-दफा किया जा सके।”
💼 विस्थापन का दंश: जान जोखिम में डालने की मजबूरी, 10-10 लाख मुआवजे की मांग
मुलाकात के दौरान रोते हुए ग्रामीणों और पीड़ित परिवारों ने नेता प्रतिपक्ष को अपनी आपबीती सुनाई:
जमीन गई, नौकरी नहीं: ग्रामीणों ने कहा कि सीसीएल के कारण उनकी पुश्तैनी जमीनें विस्थापित हो गईं, लेकिन बदले में न तो नौकरी मिली और न ही रहने को पक्का मकान। पेट पालने के लिए मजबूरी में जान की बाजी लगाकर इस खतरनाक काम में उतरना पड़ता है।
बिखर गए परिवार: मृतकों में आशीष घटवार की पत्नी गर्भवती है, वहीं डबलू बेदिया की पत्नी और एक छोटी बच्ची है। देवा और डबलू आपस में चाचा-भतीजा थे।
मुआवजे की मांग: पीड़ित परिवारों ने सीसीएल प्रबंधन से तत्काल 10-10 लाख रुपये का मुआवजा और आश्रितों को नौकरी देने की गुहार लगाई है।
⚖️ मुख्यमंत्री के सामने रखीं 4 प्रमुख मांगें
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अगर सरकार में थोड़ी भी संवेदनशीलता बची है, तो केवल दिखावे के लिए अफसरों को सस्पेंड करने का नाटक बंद करे और तुरंत इन मांगों को पूरा करे:
पूरे अरगड्डा हादसे की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए।
जिम्मेदार अफसरों और सिंडिकेट माफियाओं पर हत्या (IPC 302) जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज हो।
पीड़ित परिवारों को तत्काल सम्मानजनक वित्तीय मुआवजा दिया जाए।
मृतकों के आश्रितों को सरकारी नौकरी और न्याय सुनिश्चित कराया जाए।