Home » रांची नगड़ी जमीन विवाद: रिम्स-2 के विरोध में आदिवासियों के साथ उतरी BJP, बाबूलाल मरांडी ने दी चेतावनी
रांची: राजधानी के नगड़ी इलाके में प्रस्तावित रिम्स-2 (RIMS-2) के निर्माण को लेकर सियासी और सामाजिक घमासान तेज हो गया है। अपनी आजीविका और अस्तित्व को बचाने के लिए ‘नगड़ी जमीन बचाओ संघर्ष समिति’ का अनिश्चितकालीन धरना बीते 21 जून से लगातार जारी है। इसी कड़ी में गुरुवार को समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी से मुलाकात कर अपनी समस्याओं से अवगत कराया और उनसे समर्थन मांगा।
🚫 “रिंग रोड के बाद अब बची-कुची जमीन भी छीन रही सरकार”
मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने भावुक होते हुए कहा कि जिस जमीन पर सरकार जबरन रिम्स-2 का निर्माण कराना चाहती है, वह आदिवासियों की उपजाऊ कृषि भूमि है। ग्रामीणों ने बताया:
इससे पहले भी वे विकास और रिंग रोड परियोजना के लिए अपनी जमीन दे चुके हैं।
अब उनके पास बेहद कम जमीन बची है, जो उनकी खेती और जीविका का एकमात्र आधार है।
प्रशासन द्वारा बिना किसी विधिवत प्रक्रिया और नियम के इस बची हुई जमीन को भी जबरन अधिग्रहित करने का प्रयास किया जा रहा है।
समिति ने नेता प्रतिपक्ष को एक ज्ञापन (Memorandum) भी सौंपा, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि नगड़ी में बिना किसी उचित कानूनी प्रक्रिया के रिम्स-2 का काम शुरू करना ‘भूमि अधिग्रहण में पारदर्शिता, प्रतिकर भुगतान, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन अधिनियम 2013’ का सीधा उल्लंघन है।
📢 “आदिवासियों को उजाड़ा तो सत्ता से बेदखल हो जाएगी सरकार” – बाबूलाल मरांडी
प्रतिनिधिमंडल की बातें सुनने के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:
“जिस तरह से सरकार आज गरीब आदिवासियों को उनकी ही जमीन से बेदखल करने का काम कर रही है, वह दिन दूर नहीं जब चुनाव में यही आदिवासी इस सरकार को सत्ता से बेदखल कर देंगे।”
मरांडी ने राज्य के सभी दलों से इस संवेदनशील मुद्दे पर एकजुट होने और आदिवासियों के हक-अधिकार की रक्षा करने की अपील की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस आंदोलन में आदिवासियों के साथ है और इस लड़ाई को सड़क से लेकर सदन (विधानसभा) तक लड़ा जाएगा।
📌 आंदोलन को मिला कई सामाजिक संगठनों का साथ
नगड़ी में चल रहा यह धरना अब एक बड़े आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। 21 जून से शुरू हुए इस अनिश्चितकालीन धरने को क्षेत्र के विभिन्न सामाजिक और आदिवासी संगठनों का पुरजोर समर्थन मिल रहा है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक सरकार रिम्स-2 के इस फैसले को वापस नहीं लेती या जमीन का न्यायसंगत समाधान नहीं निकालती, तब तक उनका आंदोलन खत्म नहीं होगा।