Home » रांची: नकली नोट मामले में ऐतिहासिक फैसला, राजेश भुइयां को 7 साल की कैद और जुर्माना
रांची एटीएस कोर्ट का बड़ा फैसला: नकली नोट मामले में राजेश भुइयां को 7 साल की कड़ी कैद, लगा जुर्माना
रांची: झारखंड की राजधानी रांची से जाली नोटों (Fake Currency) के कारोबारियों के खिलाफ एक बड़ी खबर सामने आ रही है। रांची में एटीएस (ATS) के विशेष न्यायाधीश कुलदीप की अदालत ने नकली नोट से जुड़े एक बहुचर्चित और पुराने मामले में अपना फैसला सुना दिया है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य अभियुक्त राजेश भुइयां को 7 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
इसके साथ ही, दोषी पर ₹10,500 का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में अभियुक्त को अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
🚨 इन धाराओं के तहत दोषी करार
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और सबूतों को देखने के बाद अभियुक्त राजेश भुइयां को भारतीय दंड संहिता (IPC) की दो गंभीर धाराओं के तहत दोषी पाया:
धारा 489B: जाली नोटों को असली के रूप में इस्तेमाल करना या बाजार में चलाना।
धारा 489C: जाली नोटों को जानते-बूझते हुए अपने पास रखना।
📅 क्या है पूरा मामला? (Flashback)
यह पूरा मामला साल 2018 का है, जिसने रांची में हड़कंप मचा दिया था। एटीएस थाना में इसे कांड संख्या 01/2019 के रूप में दर्ज किया गया था।
घटनाक्रम: 30 नवंबर 2018 को एटीएस को मिली गुप्त सूचना के आधार पर रांची रेलवे स्टेशन के पास छापेमारी की गई थी। इस दौरान आरोपी के पास से ₹2,000 के कुल 204 संदिग्ध नोट बरामद किए गए थे।
🔍 RBI की जांच में खुली पोल
बरामद किए गए इन संदिग्ध नोटों की प्रामाणिकता जांचने के लिए इन्हें ‘भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड’ भेजा गया था। जांच रिपोर्ट आने पर चौंकाने वाला खुलासा हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, बरामद 204 नोटों में से 104 नोट पूरी तरह से नकली (Fake) पाए गए थे।
इस पुख्ता सबूत और एटीएस की दमदार पैरवी के आधार पर अदालत ने आज यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जो जाली नोटों का रैकेट चलाने वालों के लिए एक कड़ा संदेश है।