Home » रांची RSS दफ्तर पर पेट्रोल बम हमला, NIA ने दर्ज की FIR; अंतरराष्ट्रीय आतंकी कनेक्शन की जांच शुरू
रांची RSS कार्यालय पर पेट्रोल बम हमला: NIA ने संभाली कमान, यूएपीए के तहत मामला दर्ज
रांची: झारखंड की राजधानी रांची के निवारणपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रांतीय कार्यालय पर हुए पेट्रोल बम हमले के मामले ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने इस पूरे मामले की कमान अपने हाथों में ले ली है। एनआईए ने इस कांड को लेकर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) और विस्फोटक अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है।
झारखंड एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) ने अपनी शुरुआती तफ्तीश के बाद तैयार की गई केस डायरी केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी है। खुफिया इनपुट्स के आधार पर इस हमले के पीछे अंतरराष्ट्रीय आतंकी कनेक्शन और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है।
🚨 घटनाक्रम और बड़ी बातें
देर रात की साजिश: यह घटना पिछले दिनों देर रात करीब 12:36 बजे हुई, जब बाइक सवारों की मौजूदगी में एक कार से आए दो नकाबपोश बदमाशों ने मिर्च सॉस (Chilli Sauce) की खाली बोतलों में पेट्रोल भरकर दफ्तर परिसर की ओर फेंका।
बाल-बाल बचा बड़ा हादसा: पहली बोतल का फ्यूज हवा में ही बुझ गया, जबकि दूसरी बोतल परिसर की बाउंड्री वॉल के ठीक पहले गिरी। इसके चलते कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इसे किसी बड़ी आतंकी घटना की ‘टेस्टिंग’ माना जा रहा है।
सीसीटीवी फुटेज और गिरफ्तारियां: रांची पुलिस की एसआईटी और एटीएस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए लोहरदगा के तीन मुख्य आरोपियों (अमन अंसारी, सायम सुजान और सैफ अंसारी) को धर दबोचा। पूछताछ के दौरान एक आरोपी ने पुलिस की गिरफ्त से भागने की कोशिश की, जिसे पुलिस मुठभेड़ के बाद पैर में गोली लगने पर दोबारा गिरफ्तार किया गया।
🌐 एटीएस की केस डायरी में क्या है?
“शुरुआती जांच और पकड़े गए आरोपियों के डिजिटल फुटप्रिंट्स से संकेत मिले हैं कि वे सीधे तौर पर सीमा पार के कुछ संदिग्ध हैंडल्स के संपर्क में थे। स्थानीय स्तर पर माहौल बिगाड़ने और बड़ी आगजनी की साजिश के तहत इस दफ्तर को निशाना बनाया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए ही जांच एनआईए को ट्रांसफर की गई है।”
— सुरक्षा एजेंसी सूत्र
⚠️ क्यों महत्वपूर्ण है एनआईए की यह एंट्री?
यह मामला सिर्फ एक लोकल लॉ-एंड-ऑर्डर की घटना नहीं रह गया है। एनआईए मुख्य रूप से इस बात की कड़ाई से पड़ताल कर रही है कि लोकल लड़कों को स्लीपर सेल या ‘लोन वोल्फ’ (Lone Wolf Attackers) की तरह इस्तेमाल करने के लिए विदेशों से किस तरह की फंडिंग या ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन की मदद मिली थी। सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र में चौकसी बढ़ा दी है और पकड़े गए आरोपियों से लगातार कड़ाई से पूछताछ जारी है।