Home » जमशेदपुर हत्याकांड: बाबूलाल मरांडी का हेमंत सोरेन पर बड़ा हमला, कार्रवाई को बताया खानापूर्ति
जमशेदपुर / रांची:झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जमशेदपुर हत्याकांड को लेकर राज्य सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा एसपी/एसएसपी को सस्पेंड किए जाने की कार्रवाई को महज एक ‘खानापूर्ति’ करार दिया है। मरांडी ने साफ कहा कि सिर्फ ट्रांसफर या सस्पेंशन कोई सजा नहीं है, असली कार्रवाई तब होगी जब दोषी पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज होगा।
“अगर पुलिस के सामने किसी की सरेआम हत्या होती है, तो इसके लिए पूरी तरह पुलिस जिम्मेवार है। मुख्यमंत्री अगर वास्तव में गंभीर हैं, तो उन पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराएं जिनकी मौजूदगी में यह वारदात हुई।”
— बाबूलाल मरांडी, नेता प्रतिपक्ष
✍️ पुलिस की कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल
श्री मरांडी ने पुलिसिया जांच के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि असली दोषियों को बचाने और ध्यान भटकाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा:
होटल मालिक पर FIR क्यों? पुलिस ने उल्टा उन लोगों पर एफआईआर दर्ज कर दी है, जिनके होटल से मृतक खाना खाकर निकले थे।
अजीब तर्क: अगर कोई किसी के घर या होटल से खाना खाकर निकलता है और सड़क पर पुलिस के सामने उसकी हत्या हो जाती है, तो इसमें होटल मालिक का क्या दोष है?
⚠️ “ASI अजय सिंह के सामने DGP भी नतमस्तक” — मरांडी का बड़ा आरोप
बाबूलाल मरांडी ने झारखंड की चरमराती कानून व्यवस्था के लिए सीधे तौर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जिम्मेदार ठहराया। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस महकमे के भीतर चल रहे एक कथित पावर सेंटर को लेकर बड़ा दावा किया:
समानांतर व्यवस्था: सीएम की सुरक्षा में तैनात एक ASI (असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर) अजय सिंह के सामने राज्य के डीजीपी (DGP) तक नतमस्तक हैं।
तबादले और वसूली का खेल: पुलिस अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग से लेकर अवैध वसूली तक के सारे काम कथित तौर पर इसी एएसआई के इशारे पर हो रहे हैं।
🛑 निष्कर्ष: कैसे सुधरेगी कानून व्यवस्था?
नेता प्रतिपक्ष ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब तक शासन-प्रशासन में ऐसी ‘परंपरा’ चलती रहेगी और ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल होते रहेंगे, तब तक झारखंड की जनता सुरक्षित नहीं रह सकती और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करना नामुमकिन है।