Home » Ranchi Jagannath Rath Yatra 2026: आज देव स्नान पूर्णिमा, 15 दिनों के लिए एकांतवास में जाएंगे महाप्रभु जगन्नाथ
रांची में आज देव स्नान यात्रा: 53 पवित्र घड़ों से महास्नान के बाद 15 दिनों के एकांतवास पर जाएंगे प्रभु जगन्नाथ
रांची: झारखंड की राजधानी रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में वार्षिक रथयात्रा महोत्सव की भव्य शुरुआत सोमवार (आज) को देव स्नान यात्रा के साथ होने जा रही है। मंदिर प्रबंधन की ओर से उत्सव को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सनातन और पुरी की धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस स्नान पूर्णिमा से ही रथयात्रा महोत्सव की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है।
⏱️ देव स्नान यात्रा का पूरा शेड्यूल (Time Table)
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में दोपहर से लेकर शाम तक विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे:
दोपहर 01:00 बजे: स्नान यात्रा पूजा का शुभारंभ।
दोपहर 01:45 बजे: मुख्य पूजा का समापन।
दोपहर 01:50 बजे: महाआरती का आयोजन।
दोपहर 02:00 से 03:30 बजे तक: आम श्रद्धालुओं द्वारा भगवान का जलाभिषेक।
विशेष पाठ: इस दौरान मंदिर में 108 मंगल आरती, जगन्नाथ अष्टकम और श्रीमद्भगवद्गीता का सस्वर पाठ किया जाएगा।
🍯 53 पवित्र घड़ों के विशेष जल से होगा महाअभिषेक
इस वर्ष देव स्नान यात्रा के लिए 53 पवित्र घड़ों की विशेष व्यवस्था की गई है। इस जल की पवित्रता और सुगंध बढ़ाने के लिए इसमें कई दिव्य सामग्रियां मिलाई गई हैं:
महाअभिषेक की सामग्रियां: गंगाजल, अश्वगंधा, मधु (शहद), हल्दी, दूध, घी और सुगंधित इत्र।
स्नान का क्रम: धार्मिक नियमों के तहत सबसे पहले अग्रज भगवान बलभद्र, फिर बहन माता सुभद्रा और अंत में महाप्रभु जगन्नाथ को स्नान कराया जाएगा।
🛑 15 दिनों का एकांतवास (अनवसर) और रथयात्रा की महत्वपूर्ण तिथियां
शाम 4 बजे स्नान यात्रा संपन्न होने के बाद एक बेहद खास और प्राचीन परंपरा शुरू होगी।
15 दिनों का अज्ञातवास: अत्यधिक स्नान करने के कारण भाई-बहन अस्वस्थ (बीमार) हो जाते हैं। इसलिए वे आज शाम से 15 दिनों के लिए गरुड़ मंदिर में एकांतवास (अनवसर) में चले जाएंगे।
भक्तों के लिए वैकल्पिक दर्शन: एकांतवास के दौरान प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी के दर्शन आम भक्तों के लिए बंद रहेंगे। इस अवधि में श्रद्धालु केवल राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं के दर्शन कर सकेंगे।
15 जुलाई (नेत्रोत्सव): भगवान एकांतवास से पूरी तरह स्वस्थ होकर बाहर आएंगे, जिसे ‘नेत्रोत्सव’ कहा जाता है।
16 जुलाई (भव्य रथयात्रा): महाप्रभु अपने भव्य रथ पर सवार होकर 9 दिनों के लिए मौसीबाड़ी प्रस्थान करेंगे।
25 जुलाई (घूरती रथयात्रा): भगवान वापस अपने मुख्य मंदिर लौटेंगे।
🛠️ अंतिम चरण में रथ निर्माण का कार्य
दूसरी तरफ, आगामी भव्य रथयात्रा को लेकर रथों के निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है और यह अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। प्रशासन और मंदिर समिति की ओर से सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।