Home » राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन: झारखंड की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने दिल्ली में उठाई मनरेगा बकाया और न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की मांग
दिल्ली में राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में शामिल हुईं मंत्री दीपिका पांडेय सिंह; झारखंड के मुद्दों को मजबूती से उठाया
नई दिल्ली/रांची: झारखंड की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन के दूसरे दिन झारखंड राज्य का पक्ष मजबूती से रखा। सम्मेलन में उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर नई जनहित की योजना शुरू करने, मनरेगा बकाया राशि का भुगतान करने और मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी दर बढ़ाकर ₹433 करने जैसी कई महत्वपूर्ण मांगें केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष रखीं। केंद्रीय मंत्री ने इन सुझावों पर सकारात्मक पहल करने का भरोसा दिया है।
📌 मुख्य बिंदु जो सम्मेलन में छाए रहे:
महात्मा गांधी के नाम पर हो नई योजना: मंत्री ने ‘वी बी ग्राम जी योजना’ से राष्ट्रपिता का नाम हटाए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए केंद्र से गांधी जी के नाम पर नई जनहित योजना शुरू करने की मांग की।
₹433 न्यूनतम मजदूरी की मांग: बढ़ती महंगाई को देखते हुए झारखंड में मनरेगा मजदूरी को वर्तमान के ₹282 से बढ़ाकर ₹433 करने की वकालत की।
₹900 करोड़ का मनरेगा बकाया: केंद्र के पास लंबित झारखंड के मटीरियल मद की राशि को तुरंत जारी करने का अनुरोध किया।
फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर आवास: प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि बढ़ाकर ₹2 लाख करने और समय पर निर्माण के लिए नया मॉडल अपनाने का सुझाव।
क्या 125 दिन के काम के लिए वर्तमान मनरेगा बजट पर्याप्त है?
सम्मेलन में “विकसित ग्रामीण भारत” (वी बी ग्राम जी) योजना पर चर्चा के दौरान दीपिका पांडेय सिंह ने केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 की हिस्सेदारी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से झारखंड जैसे पिछड़े राज्यों पर अत्यधिक आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
“एक तरफ केंद्र सरकार साल-दर-साल मनरेगा के बजट में कटौती कर रही है, तो दूसरी तरफ मजदूरों को 100 दिन के बजाय 125 दिन का रोजगार देने का दावा कैसे किया जा सकता है? क्या इसके लिए विभाग के पास पर्याप्त बजट उपलब्ध है?”
– दीपिका पांडेय सिंह, ग्रामीण विकास मंत्री, झारखंड
घर बनाने में नहीं होगी देरी, मंत्री ने दिया ‘फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर’ का सुझाव
आवास योजनाओं में होने वाली देरी और अड़चनों को दूर करने के लिए मंत्री ने स्ट्रॉन्ग फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर (Prefabricated Structure) वाले आवास निर्माण का अभिनव सुझाव दिया। इसके तहत लाभुकों को एकमुश्त राशि भुगतान करने की बात कही गई है ताकि काम तेजी से पूरा हो सके। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी इस तकनीक से सहमत दिखे। इसके साथ ही, राज्य की अबुआ आवास योजना के तहत मनरेगा से 90 दिनों की मजदूरी भुगतान की भी मांग की गई।
मनरेगा मद में ₹900 करोड़ का बकाया भुगतान तुरंत हो
झारखंड के ग्रामीण इलाकों में मनरेगा रोजगार का सबसे बड़ा साधन है। कोरोना काल में भी इसी योजना ने मजदूरों को सहारा दिया था। मंत्री ने जोर देकर कहा कि झारखंड का केंद्र सरकार के पास मटेरियल मद में करीब ₹900 करोड़ का बकाया है। इस राशि के लंबित होने से ग्रामीण विकास की योजनाओं पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने नई ‘वी बी ग्राम जी योजना’ शुरू होने से पहले इस बकाए को क्लियर करने का अनुरोध किया।
₹282 से बढ़ाकर ₹433 की जाए न्यूनतम मजदूरी दर
बढ़ती महंगाई और ग्रामीण क्षेत्रों में कम होते रोजगार का हवाला देते हुए झारखंड ने न्यूनतम मजदूरी दर ₹433 तय करने की मांग की है। वर्तमान में झारखंड के मनरेगा मजदूरों को केवल ₹282 मिलते हैं, जिसमें केंद्र का हिस्सा ₹255 और राज्य सरकार का योगदान ₹27 शामिल है।
रूरल इंडस्ट्री की स्थापना से इतिहास रचेंगी SHG की 32 लाख महिलाएं
झारखंड में स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी करीब 32 लाख दीदियां उद्यमिता के क्षेत्र में कमाल कर रही हैं। मंत्री ने कहा कि यदि केंद्र सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में रूरल इंडस्ट्री (Rural Industry) को बढ़ावा दे, तो राज्य की आधी आबादी इतिहास रच सकती है।
झारखंड के ग्रामीण उत्पादों की धमक:
बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत उत्पादित आम आज दुबई, लंदन और इटली तक एक्सपोर्ट हो रहे हैं।
दीदियों द्वारा तैयार पलाश (Palash) और अदिवा (Adiva) ब्रांड की देश भर में चर्चा है।
SHG दीदियों द्वारा तैयार 15 लाख नोटबुक जल्द ही स्कूली छात्रों तक पहुंचने वाले हैं।
राज्य की मंइयां सम्मान योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।