Home » MMDR बिल 2026: झारखंड के ₹16 हजार करोड़ के राजस्व पर प्रहार, मंत्री दीपिका पांडे का बड़ा बयान
MMDR संशोधन विधेयक 2026: झारखंड के संघीय अधिकारों और ₹16 हजार करोड़ के राजस्व पर केंद्र का सीधा प्रहार – दीपिका पांडे सिंह !
रामगढ़ / रांची: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रामगढ़ में ध्वजारोहण के बाद झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने केंद्र सरकार के ‘खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026’ (MMDR Amendment Bill 2026) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस विधेयक को देश के संघीय ढांचे (Federal Structure) पर केंद्र सरकार का सीधा आर्थिक प्रहार करार दिया।
झारखंड को हर साल ₹14,000 से ₹16,000 करोड़ का नुकसान
मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने आंकड़े रखते हुए चेतावनी दी कि इस संशोधन कानून से झारखंड को हर साल खनिज वहन भूमि उपकर (Cess) के रूप में मिलने वाले करीब ₹14,000 करोड़ से ₹16,000 करोड़ के राजस्व की भारी चपत लगेगी।
“यह सिर्फ राजस्व या बजट का सवाल नहीं है, बल्कि झारखंड की जल-जंगल-जमीन के हक और राज्य के करोड़ों गरीबों, महिलाओं व वृद्धों के अधिकार का सवाल है।”
— दीपिका पांडे सिंह, ग्रामीण विकास मंत्री (झारखंड)
जनहित की प्रमुख योजनाओं पर मंडराया संकट
राज्य सरकार इस सेस से मिलने वाली राशि का उपयोग जमीनी स्तर पर गरीब और वंचित वर्ग के उत्थान के लिए कर रही है। राजस्व रुकने से झारखंड की कई महत्वाकांक्षी योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं:
अबुआ आवास योजना: बेघरों को पक्का मकान देने का लक्ष्य।
मइयां सम्मान योजना: महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सीधी वित्तीय सहायता।
सर्वजन पेंशन योजना: बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों की सामाजिक सुरक्षा।
“सड़क से सदन तक लड़ी जाएगी हक की लड़ाई”
मंत्री ने स्पष्ट किया कि झारखंड अपनी खनिज संपदा का दोहन सहता है, विस्थापन और प्रदूषण की मार झेलता है, लेकिन जब राज्य के अधिकारों और राजस्व का समय आता है तो केंद्र सरकार उस पर तानाशाही फैसले थोपती है।
उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि “झारखंड की महागठबंधन सरकार राज्य के हितों की बलि नहीं चढ़ने देगी। इस काले कानून के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक मजबूती से लड़ाई लड़ी जाएगी और झारखंड का वाजिब हक लेकर रहेंगे।”