राज्यसभा में हार के बाद महागठबंधन में ‘महा-महाभारत’: बीजेपी ने कांग्रेस को घेरा— “जीत मिले तो साथी अच्छे, राजनीतिक झटका लगते ही सहयोगियों पर उछालने लगे कीचड़”
भाजपा मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव का बड़ा सवाल— “अगर राजद और माले इतने ही धोखेबाज थे, तो बरसों से उनके साथ सत्ता का सुख क्यों भोग रही थी कांग्रेस?”
रांची:झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के चुनाव नतीजों ने सूबे की सियासत में एक बड़ा भूचाल ला दिया है। संख्या बल होने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की हार और एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी की जीत के बाद सत्ताधारी खेमे की अंदरूनी कलह अब सड़कों पर आ गई है। कांग्रेस नेतृत्व द्वारा अपने ही सहयोगी दलों पर ‘गद्दारी’ और ‘भ्रष्टाचार’ का आरोप लगाए जाने के बाद विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
झारखंड बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता श्री प्रतुल शाहदेव ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर कांग्रेस की दोहरी राजनीति पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस की बौखलाहट और हताशा अब सार्वजनिक कलह के रूप में जनता के सामने आ चुकी है।
📊 राज्यसभा चुनाव परिणाम के बाद बढ़ी सियासी तल्खी: मुख्य बिंदु
कांग्रेस के आरोपों और उस पर भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव द्वारा किए गए नीतिगत पलटवार का पूरा ब्योरा नीचे तालिका में दिया गया है:
किसने क्या कहा? |
कांग्रेस नेताओं का आरोप (Gathbandhan Dispute) |
भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव का तीखा पलटवार |
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के. राजू (कांग्रेस प्रभारी) |
राजद (RJD) और माले (CPI-ML) जैसे सहयोगी दल भ्रष्टाचारी और धोखेबाज हैं। |
“क्या प्रभारी जी के पास संजय जैसी दिव्य दृष्टि है?” जो उन्हें गुप्त मतदान में भी दूसरों के वोट दिखने लगे? |
सुरेश बैठा (कांग्रेस विधायक) |
गठबंधन के ही सहयोगी दलों ने पीठ में छुरा घोंपा है, वे गद्दार हैं। |
अपनी विफलता और संगठनात्मक कमजोरी का ठीकरा दूसरों के सिर फोड़ना कांग्रेस की पुरानी संस्कृति है। |
प्रतुल शाहदेव (भाजपा प्रवक्ता) |
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यह वही कांग्रेस है जिसने सत्ता के लिए रातों-रात अपने विश्वस्त सहयोगी डीएमके (DMK) का हाथ छोड़कर टीवीके (TVK) का दामन थाम लिया था। |
⚡ “सत्ता सुख के समय सब पवित्र, हारते ही गद्दार कैसे हो गए?”
कांग्रेस के आंतरिक विरोधाभास पर सवाल खड़े करते हुए भाजपा मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा:
“कांग्रेस को देश और झारखंड की जनता को साफ-साफ बताना चाहिए कि जिस राजद और माले जैसे दलों के साथ वह वर्षों तक मलाई काटती रही, जिनके साथ मिलकर सरकारें चलाईं, चुनाव लड़े और हर तरह का राजनीतिक लाभ उठाया, आज अचानक वही दल कांग्रेस की नजर में भ्रष्टाचारी, धोखेबाज और गद्दार कैसे हो गए? अगर वे इतने ही अविश्वसनीय और अपवित्र थे तो कांग्रेस उनके साथ सत्ता की मलाई क्यों चाट रही थी? हार के बाद ऐसे घिनौने आरोप लगाना कांग्रेस के राजनीतिक दिवालियापन और अहंकार को दर्शाता है।”
🚫 “अपनी हार की जिम्मेदारी कभी स्वीकार नहीं करती कांग्रेस”
प्रतुल शाहदेव ने कांग्रेस के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि अपनी हार का ठीकरा दूसरों पर फोड़ना और सहयोगियों का अपमान करना इस पार्टी के डीएनए में है। उन्होंने कहा कि जो पार्टी अपने राजनीतिक सहयोगियों का सम्मान नहीं कर सकती, वह झारखंड की सवा तीन करोड़ जनता के विश्वास का क्या सम्मान करेगी। राज्यसभा चुनाव ने विपक्षी गठबंधन के ‘अहंकार’ और ‘खोखलेपन’ को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।
🔮 गठबंधन सरकार के भविष्य पर मंडराए संकट के बादल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा प्रवक्ता के इस हमले ने जलती आग में घी का काम किया है। कांग्रेस प्रभारी के. राजू द्वारा सहयोगियों को कटघरे में खड़ा करने और अब भाजपा द्वारा उस पर तीखे हमले करने से जेएमएम, कांग्रेस और राजद के बीच का अविश्वास और गहरा गया है। चुनाव परिणामों के बाद शुरू हुआ यह ‘बयानवीर युद्ध’ आने वाले दिनों में झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार के स्थायित्व और आगामी चुनावी तालमेल पर बेहद गंभीर असर डाल सकता है।




















