Home » डॉ. भारती कश्यप IMA की राष्ट्रीय कार्यकारिणी (2026–2028) में मानद संयुक्त सचिव निर्विरोध निर्वाचित !
रांची / नई दिल्ली: विश्व के सबसे बड़े चिकित्सकीय संगठन ‘इंडियन मेडिकल एसोसिएशन’ (IMA) के राष्ट्रीय नेतृत्व में झारखंड को बड़ी पहचान मिली है। IMA National HQs (नई दिल्ली) के सत्र 2026–2028 के राष्ट्रीय चुनावों में राज्य की प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ और नारी शक्ति पुरस्कार विजेता डॉ. भारती कश्यप को मानद संयुक्त सचिव (Honorary Joint Secretary, IMA Dr. AKN Sinha Institute) के पद पर निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा जारी नतीजों के अनुसार, 55 सदस्यीय केंद्रीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी में उनका चयन राज्य के चिकित्सा जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस चुनाव में देशभर से चुनी गईं चार प्रमुख महिला चिकित्सकों में डॉ. भारती कश्यप (झारखंड) के अलावा डॉ. मोना देसाई (गुजरात), डॉ. नीलम लेखी (दिल्ली) और डॉ. सुनीला सोनी (हरियाणा) शामिल हैं।
अपने निर्वाचन पर आभार व्यक्त करते हुए डॉ. कश्यप ने कहा कि यह पद चिकित्सा समुदाय की आवाज बुलंद करने और स्वास्थ्य के क्षेत्र में जमीनी सुधार लाने का अवसर है।
सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन: ‘झारखंड मॉडल’ की सफलता
डॉ. भारती कश्यप पूर्व में IMA विमेंस डॉक्टर्स विंग की राष्ट्रीय सह-अध्यक्ष रह चुकी हैं और वर्तमान में IMA झारखंड विमेंस डॉक्टर्स विंग की अध्यक्षा हैं। ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए किए गए उनके मुख्य कार्य:
‘स्क्रीन-एंड-ट्रीट’ मॉडल: WHO की रणनीति के तहत देश के शीर्ष ओंको-गाइनेकोलॉजिस्ट्स के सहयोग से सर्वाइकल कैंसर की जांच और तत्काल उपचार के लिए कम लागत वाला मॉडल विकसित किया। इसके तहत हाई-रिस्क महिलाओं की ऑन-साइट VIA जांच और क्रायोथेरेपी से इलाज किया जाता है।
6 लाख महिलाओं की जांच: राज्य सरकार के 2.7 लाख के लक्ष्य को पार करते हुए मई 2026 तक लगभग 6 लाख महिलाओं की सफल स्क्रीनिंग पूरी की गई।
अस्पतालों का सुदृढ़ीकरण: राज्य के 14 सरकारी अस्पतालों को डिजिटल वीडियो कॉल्पोस्कोप और क्रायोथेरेपी यूनिट्स उपलब्ध कराईं और महिला डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण दिया।
NHM-IMA की पहली गैर-वित्तीय भागीदारी (2025): उनके प्रयासों से IMA झारखंड विमेंस डॉक्टर्स विंग को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) का पहला नॉन-फाइनेंशियल पार्टनर बनाया गया।
दृष्टि सुरक्षा और नेत्रदान में योगदान
नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ. कश्यप ने 25 लाख से अधिक सरकारी स्कूली बच्चों की दृष्टि जांच कराई है। वर्ष 1996 में अविभाजित बिहार-झारखंड में पहला मरणोपरांत नेत्रदान व कॉर्निया प्रत्यारोपण कराने का श्रेय भी उन्हें जाता है। कश्यप मेमोरियल आई बैंक के माध्यम से अब तक लगभग 1,100 सफल कॉर्निया ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं।