Home » संथाल परगना में जनसांख्यिकीय बदलाव और अवैध घुसपैठ पर बाबूलाल मरांडी ने अमित शाह को पत्र लिख उठाई डिटेंशन सेंटर की मांग
संथाल परगना में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ पर बाबूलाल मरांडी का बड़ा बयान: अमित शाह को पत्र लिख डिटेंशन सेंटर और जांच की मांग !
रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह को एक विस्तृत पत्र लिखकर संथाल परगना क्षेत्र में हो रहे कथित जनसांख्यिकीय बदलाव और अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ को लेकर गंभीर चिंता जताई है। मरांडी ने पत्र के माध्यम से केंद्र सरकार से अविलंब कड़े कदम उठाने, डिटेंशन सेंटर की स्थापना करने और घुसपैठियों के निर्वासन की मांग की है।
मतदाता आंकड़ों का दिया हवाला
बाबूलाल मरांडी ने पत्र में संथाल परगना के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों (जैसे पाकुड़, राजमहल, लिट्टीपाड़ा, महेशपुर, बरहेट, दुमका आदि) में वर्ष 2019 से 2024 के बीच के मतदाता आंकड़ों का उल्लेख किया है। उन्होंने दावा किया कि इन क्षेत्रों में एक विशेष वर्ग के मतदाताओं की वृद्धि दर अन्य वर्गों की तुलना में असामान्य रूप से अधिक दर्ज की गई है।
पाकुड़ विधानसभा: कुल मतदाताओं में 24% की वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें विशेष वर्ग के मतदाताओं की वृद्धि दर 40.9% रही।
लिट्टीपाड़ा एवं महेशपुर: लिट्टीपाड़ा में विशेष वर्ग की वृद्धि 35.5% और महेशपुर में 24.7% दर्ज की गई।
बरहेट एवं नाला: इन विधानसभा क्षेत्रों में विशेष वर्ग के मतदाताओं की वृद्धि दर 40.3% तक पहुंचने का दावा किया गया है।
एसटी कानून के उल्लंघन और जमीन कब्जे का आरोप
पत्र में आरोप लगाया गया है कि संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT Act) के नियमों का उल्लंघन करके सरकारी, गोचर और स्थानीय आदिवासियों की पैतृक जमीनों पर कब्जे किए जा रहे हैं। मरांडी ने कहा कि जाली आधार कार्ड, फर्जी वंशावली और अवैध जन्म प्रमाण पत्र बनाकर बाहरी तत्वों को क्षेत्र में बसाया जा रहा है, जिससे स्थानीय जनजातीय समुदाय के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री से की गईं मुख्य मांगें
बाबूलाल मरांडी ने राज्य में आंतरिक सुरक्षा और जनजातीय अस्मिता की रक्षा के लिए निम्नलिखित बिंदु सामने रखे हैं:
विशेष जांच एवं वंशावली सत्यापन: केंद्र सरकार के प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण में सीमावर्ती जिलों में अभियान चलाकर वर्ष 2003-2004 के खतियान और भू-अभिलेखों के आधार पर तकनीकी सत्यापन कराया जाए।
डिटेंशन सेंटर की स्थापना: संथाल परगना प्रमंडल में तत्काल एक डिटेंशन सेंटर बनाया जाए, ताकि चिन्हित अवैध नागरिकों को कानूनी प्रक्रिया के तहत निर्वासित किया जा सके।
मतदाता सूची की स्क्रूटनी: भारत निर्वाचन आयोग के माध्यम से मतदाता सूचियों की विशेष जांच कराई जाए और फर्जी दस्तावेजों से जुड़े नामों को हटाया जाए।
प्रशासनिक मिलीभगत की जांच: फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले रैकेट और उन्हें संरक्षण देने वाले तंत्र पर केंद्रीय एजेंसियों द्वारा निष्पक्ष जांच की जाए।