Home » बिहार और झारखंड के बीच ऐतिहासिक सोन नदी जल बंटवारा समझौता: अमित शाह की उपस्थिति में 25 साल पुराना विवाद हल
सोन नदी जल बंटवारा: बिहार और झारखंड के बीच 25 साल पुराना अंतर्राज्यीय जल विवाद सुलझा, अमित शाह की उपस्थिति में ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर !
नई दिल्ली: पूर्वी भारत में अंतर्राज्यीय जल प्रबंधन और विकास की दिशा में एक ऐतिहासक मोड़ आते हुए, नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की गरिमामयी उपस्थिति में बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे से संबंधित एक बहुप्रतीक्षित समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन, बिहार के मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल, बिहार के उपमुख्यमंत्री, केंद्रीय गृह सचिव तथा केंद्र व दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
25 साल पुराने विवाद का हुआ स्थायी समाधान
नवंबर 2000 में बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य के गठन के बाद से ही सोन नदी के जल बंटवारे का मुद्दा अधर में अटका हुआ था। 1973 के बाणसागर समझौते के तहत अविभाजित बिहार को आवंटित 7.75 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी का बंटवारा दोनों राज्यों के बीच तय नहीं हो पाया था।
इस नए ऐतिहासिक समझौते के तहत:
बिहार का हिस्सा: 5.75 MAF पानी
झारखंड का हिस्सा: 2.0 MAF पानी
यह समझौता न केवल दशकों पुराने तकनीकी अवरोधों को समाप्त करता है, बल्कि महत्वाकांक्षी इंद्रपुरी जलाशय परियोजना जैसी सिंचाई योजनाओं के निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त करता है।
लाखों किसानों और ग्रामीणों को मिलेगा सीधा फायदा
केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि इस समझौते से दोनों राज्यों के एक बड़े भौगोलिक क्षेत्र में पेयजल संकट दूर होगा और कृषि उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।
लाभांवित क्षेत्र और जिले:
बिहार: भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना जिलों की एक बड़ी आबादी को पीने का पानी और सिंचाई के लिए पर्याप्त जल मिलेगा।
झारखंड: पलामू, गढ़वा और आसपास के सूखे तथा कम बारिश वाले क्षेत्रों में किसानों को सिंचाई सुविधा और पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
‘टीम भारत’ और सहकारी संघवाद की मिसाल
श्री अमित शाह ने इस समझौते को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘Team Bharat’ के दृष्टिकोण और सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा:
“देश के सभी राज्यों का अपना अलग अस्तित्व है, लेकिन जब बात राष्ट्रीय हित की हो और सभी राज्य ‘टीम इंडिया’ बनकर आगे बढ़ते हैं, तो कोई भी ऐसी समस्या नहीं है जिसका संवाद के जरिए निराकरण न किया जा सके।”
झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन और बिहार के मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने दशकों पुराने इस विवाद को सौहार्दपूर्ण माहौल में हल कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया।
अंतर्राज्यीय परिषद के माध्यम से जल विवादों का त्वरित समाधान
गृह मंत्री अमित शाह की पहल पर अंतर्राज्यीय परिषद के माध्यम से देश भर में दशकों से लंबित जल विवादों का समाधान तेजी से निकाला जा रहा है। इस वर्ष (2026) में अब तक चार ऐतिहासिक अंतर्राज्यीय जल समझौते संपन्न हो चुके हैं:
तिथि संबंधित राज्यपरियोजना / विषयमुख्य बिंदु
31 अगस्त 2026बिहार और झारखंडसोन नदी जल बंटवारा25 साल पुराने विवाद का अंत; बिहार को 5.75 MAF और झारखंड को 2.0 MAF पानी का आवंटन।
07 जुलाई 2026गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थाननर्मदा अवार्ड (सरदार सरोवर परियोजना)लंबित देयों का वन-टाइम सेटलमेंट (One-Time Settlement) करके लागत साझाकरण विवाद समाप्त।
29 जून 2026हरियाणा और राजस्थानयमुना जल परियोजना580 MCM पानी 3 भूमिगत पाइपलाइनों से राजस्थान के शुष्क इलाकों तक पहुंचेगा।
16 जून 2026हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, यूपी, हरियाणा, राजस्थानकिशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना
इन समझौतों के सफल क्रियान्वयन से देश में कृषि, ग्रामीण विकास और जल सुरक्षा को एक नई दिशा मिल रही है।