Home » झारखंड BJP का कांग्रेस-JMM पर हमला: प्रतुल शाहदेव बोले – ईसाई रैली में बेनकाब हुआ गठबंधन
ईसाई रैली में बेनकाब हुआ कांग्रेस-JMM का गठबंधन, मुख्यमंत्री का दावा भी निकला खोखला: प्रतुल शाहदेव
रांची: झारखंड भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने रांची में आयोजित ईसाई महाजुटान को लेकर कांग्रेस और सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के राजनीतिक गठबंधन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन ने दोनों दलों के रिश्ते की असलियत को जनता के सामने बेनकाब कर दिया है।
CM हेमंत सोरेन का नहीं पहुंचना चर्चा का विषय
प्रतुल शाहदेव ने बताया कि जिस कार्यक्रम को आदिवासी समाज की एकता का महाजुटान बताकर प्रचारित किया जा रहा था, उसमें JMM का कोई भी बड़ा नेता मंच पर नजर नहीं आया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था, लेकिन इसके बावजूद वे स्वयं कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए और महज पार्टी के एक विधायक को भेजकर औपचारिकता पूरी कर ली।
बीजेपी प्रवक्ता ने तंज कसते हुए सवाल उठाया कि कहीं मुख्यमंत्री जी इस बात से नाराज तो नहीं थे कि राज्य में धर्मांतरित आदिवासियों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों को मानने वाले मूल आदिवासियों के अधिकारों पर कब्जा कर लिया है?
‘जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ नारे पर घेरा
आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रतुल शाहदेव ने कहा:
जनसंख्या का गणित: पिछली जनगणना के अनुसार झारखंड में आदिवासियों की कुल आबादी 26% थी, जिसमें धर्मांतरित आदिवासियों की संख्या 4% थी (यानी कुल आदिवासी आबादी का लगभग 15%)।
आरक्षण पर कब्जा: इसके बावजूद राज्य में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित 28 विधानसभा सीटों में से 11 सीटों पर ईसाई आदिवासी विधायक हैं।
40% सीटों पर प्रतिनिधित्व: महज 15% आबादी वाले धर्मांतरित आदिवासियों का आरक्षित सीटों के 40% हिस्से पर कब्जा है।
उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए पूछा कि अब कांग्रेस नेता का ‘जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ का नारा कहां चला गया?
“कांग्रेस की ईसाई रैली, आदिवासी महारैली नहीं”
बीजेपी प्रवक्ता ने साफ तौर पर कहा कि यह आयोजन कोई ‘आदिवासी महारैली’ नहीं बल्कि कांग्रेस की प्रायोजित ‘ईसाई रैली’ थी। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी आदिवासी समाज को महज एक वोट बैंक नहीं मानती, बल्कि उन्हें झारखंड की अस्मिता और विकास का मुख्य आधार मानती है। राज्य का आदिवासी समाज अब खोखले नारों के बहकावे में नहीं आएगा और काम के आधार पर अपना फैसला करेगा।
आर्च बिशप के आदेश पर कांग्रेस की चुप्पी संदेहास्पद
प्रतुल शाहदेव ने आर्च बिशप द्वारा जारी पत्र का मुद्दा उठाते हुए कहा कि धर्मगुरुओं का राजनीतिक इस्तेमाल करना कांग्रेस का पुराना इतिहास रहा है।
“आर्च बिशप ने बाकायदा एक आदेश जारी कर सभी ईसाइयों, फादर, ब्रदर और सिस्टर्स को रैली में शामिल होने का निर्देश दिया और इसे अनुरोध नहीं बल्कि अनिवार्य आदेश बताया। पहले कांग्रेस चुनावों में वोट हासिल करने के लिए जामा मस्जिद के शाही इमाम से फतवे जारी करवाती थी, और अब इस कड़ी में ईसाई धर्मगुरुओं को भी शामिल कर लिया गया है। इस पूरे मामले पर कांग्रेस की चुप्पी बेहद संदेहास्पद है।”