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BIT Mesra के कुशाग्र सहाय को LinkedIn से मिला ₹1.4 करोड़ का पैकेज, सफलता का सीक्रेट सुन रह जाएंगे हैरान !
रांची: कहते हैं न, “मेहनत तब तक करो, जब तक सफलता आपके कदम न चूम ले।” इस कहावत को सच कर दिखाया है रांची के बीआईटी मेसरा (BIT Mesra) के ग्रेजुएट कुशाग्र सहाय ने। दिग्गज टेक कंपनी लिंक्डइन (LinkedIn) से 1.4 करोड़ रुपये का भारी-भरकम ऑफर मिलने के बाद कुशाग्र इस समय देश भर में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
रांची की गलियों से शुरू हुआ कुशाग्र का यह सफर अब दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों के कॉरपोरेट ऑफिस तक पहुंच गया है। लेकिन कुशाग्र का मानना है कि यह कामयाबी रातों-रात या सिर्फ एक बड़े नंबर (पैकेज) की वजह से नहीं मिली है।
💡 “सफलता केवल पैकेज नहीं, सालों की तपस्या है”
अपनी इस ऐतिहासिक सफलता पर बात करते हुए कुशाग्र ने कहा कि लोग सिर्फ पैकेज देखते हैं, लेकिन इसके पीछे सालों की कड़ी मेहनत, इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स और कंप्यूटर साइंस की मजबूत समझ का सबसे बड़ा हाथ है।
🎓 सीनियर्स की वो 4 सलाह, जिसने बदल दी किस्मत
जब कुशाग्र ने बीआईटी मेसरा में कदम रखा था, तो उन्होंने अपनी मंजिल को पाने के लिए पहले दिन से ही तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने कॉलेज के उन सीनियर्स से संपर्क किया जो पहले से ही बड़ी टेक कंपनियों में काम कर रहे थे। सीनियर्स ने उन्हें 4 गोल्डन रूल्स बताए थे, जिन्हें कुशाग्र ने अपना गुरुमंत्र बना लिया:
शानदार CGPA: कॉलेज की पढ़ाई में हमेशा टॉप पर रहें और अच्छा एकेडमिक रिकॉर्ड बनाए रखें।
DSA पर मजबूत पकड़: डेटा स्ट्रक्चर और एल्गोरिदम (Data Structures and Algorithms) की गहरी समझ विकसित करें।
कंप्यूटर साइंस के बेसिक्स: थ्योरी और कोर कॉन्सेप्ट्स को रटने के बजाय उन्हें अच्छे से समझें।
रियल-वर्ल्ड प्रोजेक्ट्स: सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि कुछ ऐसा बनाएं जो असल जिंदगी में काम आए।
👨💻 असाइनमेंट से हटकर कुछ अलग करने की चाह
”क्लास के असाइनमेंट तो सब पूरे करते हैं, लेकिन असली इंजीनियर वो है जो लोगों की समस्याओं को हल करने के लिए सॉफ्टवेयर बनाए।”
कुशाग्र ने सिर्फ कॉलेज के क्लास असाइनमेंट तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने लगातार कोडिंग प्रतियोगिताओं (Coding Competitions) में हिस्सा लिया, जिससे उनका लॉजिकल माइंडसेट मजबूत हुआ। इसके साथ ही उन्होंने ऐसे सॉफ्टवेयर और एप्लीकेशंस डेवलप किए, जिनका इस्तेमाल असली यूजर्स (Real Users) कर सकें।
एक बेहतरीन लीडर की तरह, उन्होंने न सिर्फ खुद को ग्रूम किया, बल्कि अपने जूनियर छात्रों की भी कोडिंग और प्रोजेक्ट्स में बढ़-चढ़कर मदद की। आज उनकी यही दूरदर्शिता और मेहनत उन्हें ₹1.4 करोड़ के मुकाम तक ले आई है, जो देश भर के लाखों इंजीनियरिंग छात्रों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।