Home » झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा एक्शन: “15 दिन में सुधारें अस्पतालों की व्यवस्था, नहीं तो नपेंगे अफसर”; हर सदर अस्पताल को मिलेंगी 4 एंबुलेंस
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी का कड़ा रुख: “जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वाले अफसर होंगे सस्पेंड, मुख्यालय छोड़ा तो खैर नहीं”
हेमंत सोरेन सरकार का बड़ा ऐलान— ‘108’ के अलावा हर सदर अस्पताल को मिलेंगी 4-4 एंबुलेंस; सिविल सर्जनों को मिले व्यापक प्रशासनिक अधिकार
रांची: झारखंड की स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह जवाबदेह, पारदर्शी और आम जनता के अनुकूल बनाने के लिए सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को राजधानी रांची में माननीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) श्री अजय कुमार सिंह ने राज्य के सभी जिलों के सिविल सर्जनों (CS), डिजिटल सर्जनों (DS) और शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ लगभग तीन घंटे तक एक मैराथन समीक्षा बैठक की।
इस हाई-प्रोफाइल बैठक में कड़ा रुख अपनाते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने सभी अधिकारियों को 15 दिनों की अंतिम मोहलत (अल्टीमेटम) दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि तय समय सीमा के भीतर अगर सरकारी अस्पतालों की जमीनी स्थिति में ठोस बदलाव नहीं दिखा, तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ सीधे निलंबन (Suspension) और सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
📊 झारखंड स्वास्थ्य विभाग महाबैठक 2026: मुख्य फैसले और रोडमैप
राज्य की गरीब जनता तक गुणवत्तापूर्ण इलाज पहुंचाने और डॉक्टरों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए बैठक में लिए गए बड़े फैसलों की सूची नीचे तालिका में दी गई है:
सरकारी निर्देश / घोषणा
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स्वास्थ्य विभाग का नया एक्शन प्लान (Action Plan)
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15 दिनों का अल्टीमेटम
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सभी जिलों के सदर और अनुमंडलीय अस्पतालों की व्यवस्था में 15 दिनों के भीतर दृश्यमान सुधार लाना अनिवार्य।
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अतिरिक्त एंबुलेंस सेवा
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राज्य के सभी सदर और रेफरल अस्पतालों को 4-4 अतिरिक्त एंबुलेंस मिलेंगी। यह ‘108’ सेवा से अलग होंगी।
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डिजिटल मॉनिटरिंग
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एंबुलेंस के त्वरित संचालन के लिए अस्पतालों को टैबलेट (Tablets) और आधुनिक तकनीकी टूल्स दिए जाएंगे।
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सख्त निवास नियम
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सभी सिविल सर्जनों को अनिवार्य रूप से सदर अस्पताल परिसर में ही निवास करना होगा; मुख्यालय छोड़ने पर पाबंदी।
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प्रशासनिक शक्तियां
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NHM प्रबंध निदेशक को निर्देश— त्वरित निर्णयों के लिए सिविल सर्जनों को अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकार सौंपे जाएं।
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⚡ “अधिकारियों की लापरवाही से धूमिल होती है सरकार की छवि”
बैठक के दौरान सिविल सर्जनों को कड़ी फटकार लगाते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा:
“मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में हमारी सरकार राज्य के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक मुफ्त और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए दिन-रात काम कर रही है। लेकिन कुछ अधिकारियों की घोर लापरवाही और उदासीनता के कारण जनता परेशान होती है और सरकार की छवि पर आंच आती है। अब यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारी भयमुक्त होकर जनता के हित में संवेदनशीलता के साथ काम करें और स्थानीय विधायकों व जनप्रतिनिधियों के साथ तालमेल बिठाकर समस्याओं को ऑन-स्पॉट सुलझाएं।”
🦟 मानसून से पहले डेंगू-मलेरिया पर अलर्ट; बेड और दवाएं रखने के निर्देश
आगामी मानसून के मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने विभाग को विशेष रूप से अलर्ट मोड पर रहने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि बारिश के मौसम में बढ़ने वाले डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और वायरल फीवर के मामलों से निपटने के लिए सभी अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाओं, बेड, चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की 100% उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित की जाए। दवाओं की कमी की शिकायत मिलने पर सीधे सिविल सर्जन जिम्मेदार होंगे।
💼 एसीएस अजय कुमार सिंह की फटकार— “दफ्तरों से निकलकर फील्ड में जाएं अधिकारी”
समीक्षा बैठक के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री अजय कुमार सिंह का भी सख्त लहजा देखने को मिला। उन्होंने ढुलमुल रवैया अपनाने वाले अधिकारियों को डांट लगाते हुए कहा कि उनका दायित्व केवल एयर-कंडीशन दफ्तरों में बैठकर फाइलें खंगालना नहीं है। अधिकारी सीधे फील्ड में जाएं, ग्रामीण अस्पतालों का औचक निरीक्षण करें और ऑन-ग्राउंड समस्याओं का समाधान करें।
🤝 कर्मचारियों की हड़ताल और वेतन भुगतान पर बड़ा आश्वासन
स्वास्थ्य कर्मियों और डॉक्टरों की संभावित हड़ताल या कार्य बहिष्कार की परिस्थितियों पर बोलते हुए मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार सबसे पहले ‘संवाद और समाधान’ का रास्ता अपनाएगी। कर्मचारियों के लंबित पड़े वेतनों को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रेजरी संबंधी कुछ तकनीकी गड़बड़ियों के कारण भुगतान में देरी हुई है, जिसे अगले कुछ दिनों में पूरी तरह ठीक कर सभी बकाए का भुगतान कर दिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि कोई स्वास्थ्य कर्मी जनहित के खिलाफ जाकर काम रोको आंदोलन करेगा, तो सरकार उसके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगी।