Home » पाकुड़ में DMFT फंड से बनी सड़क में धांधली: बाबूलाल मरांडी ने सीएम को लिखा पत्र, 95 लाख की योजना में फर्जीवाड़े का आरोप
95 लाख की सड़क कुछ ही महीनों में गड्ढे में तब्दील: बाबूलाल मरांडी ने खोला मोर्चा, CM को पत्र लिख जांच की मांग !
रांची/पाकुड़: पाकुड़ जिला अंतर्गत पाकुड़ अंचल की इलामी पंचायत में DMFT कोष (जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट) से निर्मित सड़कों और गार्डवाल के निर्माण में भारी भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। झारखंड विधानसभा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने इस संदर्भ में माननीय मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
क्षेत्र भ्रमण के दौरान इलामी पंचायत के दर्जनों ग्रामीणों ने संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त आवेदन सौंपकर निर्माण कार्य की घटिया गुणवत्ता की शिकायत की थी, जिसे बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को प्रेषित कर दिया है।
📌 मुख्य आरोप: 95 लाख की योजना में क्या है गड़बड़ी?
ग्रामीणों के आवेदन के अनुसार, वर्ष 2025 में तत्कालीन उपायुक्त द्वारा DMFT कोष से स्वीकृत इस योजना को संवेदक हबीबुर रहमान द्वारा इसी वर्ष पूरा किया गया था। निर्माण के कुछ ही महीनों के भीतर यह सड़क और गार्डवाल पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं।
पुरानी सड़क पर ही ढलाई: पूर्व से निर्मित PCC पथ के ऊपरी सतह पर मात्र 4 इंच की अतिरिक्त ढलाई कर खानापूर्ति की गई।
कमजोर नींव: सुरक्षा हेतु बनाए गए गार्डवाल के फाउंडेशन की ढलाई नियमानुसार न करके मात्र 5 इंच की गई है।
घटिया सामग्री का प्रयोग: गार्डवाल निर्माण में घटिया बोल्डर और मानक से काफी कम मात्रा में सीमेंट व घटिया बालू का इस्तेमाल हुआ।
सड़क में गहरी दरारें: गुणवत्ता से खिलवाड़ के कारण कुछ ही समय में सड़क कई स्थानों पर धंस गई है और उसमें गहरी दरारें आ चुकी हैं।
🚨 बिना काम पूरा किए 95 लाख की पूरी राशि की निकासी!
पत्र में इलामी पंचायत के ही एक अन्य गंभीर मामले का उल्लेख किया गया है। वर्ष 2025 में सतार मौलवी के घर के पास 95 लाख रुपये की लागत से 150 फीट गार्डवाल का निर्माण होना था। आरोप है कि संवेदक और अभियंताओं की मिलीभगत से मात्र 50 फीट कार्य करके ही पूरी राशि की निकासी कर ली गई।
बाबूलाल मरांडी ने उठाई जांच और कार्रवाई की मांग
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि:
विशेष जांच टीम का गठन: DMFT कोष से निर्मित सभी PCC सड़कों और गार्डवाल के निर्माण की गुणवत्ता, DPR (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) के अनुपालन और प्रयुक्त सामग्री की निष्पक्ष जांच के लिए एक टीम बनाई जाए।
कड़ी कार्रवाई: कार्यपालक एजेंसी की अनदेखी और संवेदक-इंजीनियरों की मिलीभगत की जांच कर दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
कार्रवाई की रिपोर्ट: जांच के उपरांत की गई कार्रवाई से अधोहस्ताक्षरी (बाबूलाल मरांडी) को भी अवगत कराया जाए।