Home » मधुबनी कस्टोडियल डेथ: प्रशांत किशोर ने पीड़ित परिवार से की मुलाकात, पुलिस को दिया 10 दिन का अल्टीमेटम
मधुबनी कस्टोडियल डेथ: 19 वर्षीय रोशन यादव की मौत पर गरमाई राजनीति, प्रशांत किशोर ने SSP से मुलाकात कर दिया 10 दिन का अल्टीमेटम !
मधुबनी (बिहार):बिहार के मधुबनी जिले में 19 वर्षीय जेल बंदी रोशन कुमार यादव की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) के बाद मामला गरमा गया है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उनका दर्द साझा किया और स्थानीय पुलिस-प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
“19 साल के रोशन यादव की कस्टोडियल डेथ हुई है। परिवार का आरोप है कि उसे गलत तरीके से उठाया गया और प्रताड़ित किया गया। हमने एसएसपी से मुलाकात कर 10 दिनों के भीतर कार्रवाई की मांग की है।” — प्रशांत किशोर
क्या है पूरा मामला? (परिवार के गंभीर आरोप)
प्रशांत किशोर के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम के दो मुख्य पहलू हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता:
अवैध गिरफ्तारी और सूचना का अभाव: परिवार का आरोप है कि रोशन को 27 मई को दोपहर 3:00 बजे अरेर थाना क्षेत्र के बजाय रहिका थाने की पुलिस ने उठाया था। गिरफ्तारी के संबंध में न तो कोई लिखित कागज दिया गया और न ही मौखिक जानकारी दी गई। 3 दिनों तक भटकने के बाद परिवार को पता चला कि रोशन रहिका थाने में बंद है।
हिरासत में प्रताड़ना: लगभग ढाई महीने बाद रोशन की इलाज के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिवार का साफ आरोप है कि पुलिस की बर्बर पिटाई और प्रताड़ना के कारण रोशन की मौत (हत्या) हुई है।
प्रशासन और पुलिस का पक्ष
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने जन सुराज प्रतिनिधिमंडल और परिवार को जांच का आश्वासन दिया है:
NHRC गाइडलाइंस के तहत जांच: एसएसपी के अनुसार, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) के दिशा-निर्देशों के तहत जिलाधिकारी (District Magistrate) के नेतृत्व में मामले की न्यायिक जांच कराई जाएगी।
आयोग को भेजी जाएगी रिपोर्ट: घटना से जुड़ी पूरी रिपोर्ट NHRC को भी सौंपी जाएगी।
दावों में विरोधाभास: जहां जेल प्रशासन और पुलिस का दावा है कि रोशन ने सुसाइड (आत्महत्या) किया है, वहीं परिवार इसे सीधे तौर पर ‘कस्टोडियल मर्डर’ बता रहा है।
प्रशांत किशोर का 10 दिनों का अल्टीमेटम
प्रशांत किशोर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि एसएसपी ने सभी पहलुओं पर निष्पक्ष जांच और न्याय का भरोसा दिया है।
“हम प्रशासन को 10 दिनों का समय दे रहे हैं। अगर तय सीमा के भीतर सभी स्तरों पर निष्पक्ष जांच कर पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिला, तो जन सुराज इस मुद्दे को लेकर आगे की रणनीति तय करेगा।”
अब देखना यह होगा कि NHRC और मजिस्ट्रेट जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या रोशन के परिवार को तय समय सीमा के भीतर न्याय मिल पाता है या नहीं।