Home » खान एवं खनिज संशोधन विधेयक 2026: JMM का केंद्र के खिलाफ निर्णायक जंग का ऐलान, पूरे देश में बड़े आंदोलन की चेतावनी
खान एवं खनिज संशोधन विधेयक 2026 पर संग्राम: JMM का केंद्र के खिलाफ उलगुलान, पूरे देश में ऐतिहासिक आंदोलन का ऐलान !
रांची: संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में जल्दबाजी में पारित किए गए खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर झारखंड की राजनीति में प्रचंड उबाल आ गया है। सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने इस विधेयक को “काला कानून” करार देते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े और निर्णायक आंदोलन का शंखनाद कर दिया है।
JMM ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार ने इस जनविरोधी बिल को तुरंत वापस नहीं लिया, तो झारखंड की धरती से ऐसा ऐतिहासिक आंदोलन शुरू होगा, जिसे पूरा देश देखेगा।
“खनिज हमारा, जमीन हमारी—तो फैसला दिल्ली क्यों करेगी?”
JMM ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों पर पहला हक यहाँ के आदिवासियों, मूलवासियों और झारखंडियों का है। केंद्र सरकार संसद के जरिए झारखंड के अधिकारों को छीनने और राज्य के हाथ-पैर काटने की साजिश रच रही है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मईयां सम्मान और अबुआ आवास जैसी योजनाएं बंद होने के कगार पर!
राज्य सरकार का तर्क है कि इस संशोधन विधेयक से झारखंड के राजस्व (Revenue) पर सीधा और प्रतिकूल असर पड़ेगा। इसके कारण राज्य में चल रही करोड़ों गरीबों की कल्याणकारी योजनाएं ठप हो सकती हैं:
मईयां सम्मान योजना: लाखों महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की योजना पर खतरा।
अबुआ आवास योजना: बेघर और जरूरतमंदों के अपने पक्के मकान का सपना टूटने की आशंका।
सामाजिक सुरक्षा: वृद्धावस्था, विधवा पेंशन, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े बजट में भारी कटौती की नौबत।
पंचायत से लेकर शहर तक उग्र विरोध की तैयारी
JMM के शीर्ष नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि यह लड़ाई केवल बयानों तक सीमित नहीं रहेगी। आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली गई है:
त्रिस्तरीय विरोध: राज्य के प्रत्येक जिला, प्रखंड (Block), पंचायत और शहर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
सड़क से संसद तक उलगुलान: कार्यकर्ताओं और जनता को एकजुट कर आर्थिक नाकेबंदी और व्यापक जन-आंदोलन का रुख अपनाया जाएगा।
ऐतिहासिक निर्णय: अगर केंद्र सरकार ने अपनी हठधर्मिता नहीं छोड़ी और झारखंडियों के हक-अधिकार वापस नहीं दिए, तो राज्य सरकार व JMM ऐसे कड़े और ऐतिहासिक निर्णय लेने से भी पीछे नहीं हटेगी, जिसकी जिम्मेदारी केंद्र की होगी।
“यह बिल झारखंड के विकास और भविष्य पर बहुत बड़ा कुठाराघात है। झारखंड अब सौतेला व्यवहार नहीं सहेगा!”