Home » जमशेदपुर गोलीबारी: कांग्रेस का बाबूलाल मरांडी पर पलटवार, पूछा- ‘आरोप लगाने से पहले अपने शासनकाल का दें हिसाब’
जमशेदपुर गोलीबारी: कांग्रेस का बाबूलाल मरांडी पर बड़ा पलटवार, कहा– ‘राजनीति करने से पहले अपने शासनकाल का दें हिसाब’
रांची : जमशेदपुर में हुई हालिया गोलीबारी की घटना पर झारखंड की राजनीति गर्मा गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी द्वारा राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए जाने के बाद अब प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने उन पर तीखा पलटवार किया है। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष को हर आपराधिक घटना को राजनीतिक हथियार बनाना बंद करना चाहिए।
“गंभीर है घटना, लेकिन डराने की राजनीति स्वीकार नहीं”
कांग्रेस मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि जमशेदपुर में हुई गोलीबारी की घटना निस्संदेह गंभीर है और सरकार को अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि आपराधिक घटनाओं की आड़ में जनता को डराने और भ्रमित करने की राजनीति को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता।
राकेश सिन्हा ने नेता प्रतिपक्ष पर सीधा सवाल साधते हुए कहा, “बाबूलाल मरांडी जी आज पुलिस व्यवस्था पर बड़े-बड़े सवाल उठा रहे हैं, लेकिन उन्हें यह भी बताना चाहिए कि जब वे मुख्यमंत्री थे तब झारखंड में कानून-व्यवस्था कितनी आदर्श थी? क्या उनके शासनकाल में अपराध पूरी तरह समाप्त हो गया था?” उन्होंने मांग की कि बाबूलाल मरांडी को अपने कार्यकाल का भी पूरा रिपोर्ट कार्ड सार्वजनिक करना चाहिए।
“सोशल मीडिया पर आरोप लगाने के बजाय दें प्रमाण”
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर लग रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना है, लेकिन आरोप हवा में नहीं होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि बाबूलाल मरांडी जिन अधिकारियों पर तस्करी, अवैध कमाई, और राजनीतिक वफादारी जैसे गंभीर आरोप लगा रहे हैं, उनके समर्थन में उन्हें सबूत पेश करने चाहिए। यदि उनके पास कोई दस्तावेज हैं, तो उन्हें जांच एजेंसियों को सौंपना चाहिए। सिर्फ सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से कानून की जांच आगे नहीं बढ़ती।
भाजपा की राजनीति पर तंज: “भाजपा का पुराना तरीका है—पहले आरोप लगाओ, फिर माहौल बनाओ और प्रमाण मांगे जाने पर चुप हो जाओ। लेकिन झारखंड की जनता अब इस राजनीति को अच्छी तरह समझ चुकी है।” — राकेश सिन्हा, मीडिया प्रभारी, प्रदेश कांग्रेस
अधिकारियों के पदस्थापन और जांच का दायरा
राकेश सिन्हा ने कहा कि पुलिस अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग और प्रभार पर सवाल उठाने से पहले बाबूलाल मरांडी को संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए। उन्होंने कहा, “नाम लेकर आरोप लगाना आसान है, लेकिन उन्हें साबित करना कठिन। कांग्रेस उनसे ठोस प्रमाण की मांग करती है।”
जमशेदपुर घटना पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इसमें शामिल सभी अपराधियों की पहचान कर उनकी जल्द गिरफ्तारी होनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर अपराधियों को संरक्षण मिला है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच हो, लेकिन जांच का फैसला राजनीतिक बयानबाज़ी से नहीं बल्कि सबूतों के आधार पर होगा।
हेमंत सोरेन सरकार से कांग्रेस की अपेक्षा
कांग्रेस मीडिया प्रभारी ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार से उनकी पार्टी की साफ अपेक्षा है:
सख्त कार्रवाई: अपराधी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
पारदर्शिता: पुलिस प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और पेशेवर कार्यप्रणाली सुनिश्चित की जाए।
संरक्षण का अंत: किसी भी निर्दोष को राजनीतिक दबाव में परेशान न किया जाए।
“जनता को भाषण नहीं, न्याय चाहिए”
अपने बयान के अंत में राकेश सिन्हा ने कहा कि झारखंड की जनता को डर की राजनीति नहीं, तथ्य चाहिए; सोशल मीडिया के आरोप नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष को सलाह दी कि वे पहले अपने लगाए गए आरोपों के प्रमाण पेश करें और यह बताएं कि व्यवस्थागत खामियों को दूर करने के लिए उनके पास क्या ठोस समाधान हैं, उसके बाद ही सरकार से जवाब मांगें।