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MMDR Bill: “खनिज हमारा, तो फैसला दिल्ली क्यों करे ?” – केंद्र के खिलाफ आर-पार के मूड में CM हेमंत सोरेन !
रांची: खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) यानी MMDR कानून में केंद्र सरकार द्वारा किए गए नए संशोधनों को लेकर झारखंड की राजनीति में भूचाल आ गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस संशोधन विधेयक को राज्य के वित्तीय व संवैधानिक अधिकारों पर बड़ा कुठाराघात करार देते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार मोर्चा खोल दिया है।
सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा बयान:
“अचानक बिना किसी सलाह के विगत मानसून सत्र में केंद्र सरकार ने MMDR कानून में ऐसा बदलाव किया है जिसे हम बहुत दुर्भाग्यपूर्ण कह सकते हैं… इसका बहुत बुरा प्रभाव प्रदेश के कई आदिवासी, दलित, पिछड़ा और गरीब पर पड़ेगा। पूर्व के नुकसान की भी भरपाई अब केंद्र सरकार नहीं करेगी, ऐसा इस कानून से प्रतीत होता है। राज्य सरकार ने पहले ही खनन क्षेत्र में लगभग 1 लाख 36 हजार करोड़ का बकाया प्रस्तुत किया है… आने वाले समय में ये कमजोर राज्य अपने पैरों पर खड़ा न हो पाए, इस कानून के माध्यम से कुठाराघात किया गया है। हम इसका विरोध करते हैं और इसके लिए लड़ाई लड़ेंगे।”
क्या हैं इस विवाद के प्रमुख कारण?
राजस्व और अधिकारों में कटौती: राज्य सरकार का आरोप है कि नए प्रावधानों (जैसे धारा 9D) के जरिए राज्यों के स्वतंत्र रूप से सेस या टैक्स लगाने के अधिकारों को सीमित किया जा रहा है।
गरीब व आदिवासी कल्याण पर असर: मुख्यमंत्री का कहना है कि खनन राजस्व प्रभावित होने से राज्य में चलाए जा रहे सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य व जनकल्याणकारी योजनाओं पर संकट खड़ा हो सकता है।
1.36 लाख करोड़ रुपये का बकाया: झारखंड सरकार का केंद्र पर खनन क्षेत्र का लगभग ₹1.36 लाख करोड़ बकाया है, और इस नए कानून के बाद उस भरपाई की उम्मीदें भी धूमिल होती दिख रही हैं।
राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी
मुख्यमंत्री सोरेन ने स्पष्ट कर दिया है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और राज्य सरकार इस सौतेले व्यवहार को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। हर जिले, प्रखंड और पंचायत स्तर पर इस कानून का जोरदार विरोध किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर राज्य हित में ऐतिहासिक व निर्णायक कदम उठाए जाएंगे।