Home » साहिबगंज हॉस्टल कांड: BJP प्रवक्ता राफिया नाज का हेमंत सरकार पर हमला, कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
साहिबगंज हॉस्टल कांड पर भड़कीं BJP प्रवक्ता राफिया नाज, पूछा- ‘महिला सुरक्षा की जवाबदेही किसकी, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दें जवाब’
रांची / साहिबगंज: झारखंड के साहिबगंज जिले में स्थित एक निजी आवासीय विद्यालय के हॉस्टल में मासूम छात्रा के साथ हुई शर्मनाक घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस दुखद और जघन्य मामले पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार और कानून-व्यवस्था पर तीखा हमला बोला है।
राफिया नाज ने कड़े शब्दों में कहा कि स्कूल और मंदिर जैसे पवित्र स्थानों पर अगर मासूम बच्चियों के साथ ऐसी ओछी व घिनौनी हरकतें होती हैं, तो यह केवल एक अपराध नहीं बल्कि पूरे समाज की आत्मा को झकझोर देने वाली घटना है।
“रक्षक ही बना भक्षक, अपराधियों को मिले कठोरतम सजा”
मामले पर गहरा आक्रोश जताते हुए बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि इस वारदात में सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि जिस व्यक्ति को मासूम बच्चियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वही भक्षक बन गया। ऐसे अपराधियों के खिलाफ कानून के सबसे सख्त प्रावधान लागू होने चाहिए। उन्होंने मांग की कि आरोपी को ऐसी नजीर बनाने वाली सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई भी हैवान मासूम बच्चियों की तरफ गलत नजर से देखने की हिम्मत न कर सके।
गृह मंत्रालय संभाल रहे CM सोरेन से सीधे सवाल
प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ रहे अपराधों को लेकर राफिया नाज ने सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा:
“मेरा सीधा सवाल झारखंड के माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी से है—जब गृह मंत्रालय भी आपके ही पास है, तो राज्य में बच्चियों और महिलाओं के खिलाफ लगातार हो रहे अपराधों की जवाबदेही कौन तय करेगा?”
उन्होंने आगे कहा कि यदि अपराधियों के दिल में कानून का खौफ नहीं होगा और कानून-व्यवस्था इसी तरह लाचार बनी रहेगी, तो ऐसे दरिंदे मासूमों की जिंदगियां तबाह करते रहेंगे। सरकार को पीड़िता को न्याय दिलाने को पहली प्राथमिकता बनाना होगा, न कि अपराधियों के प्रति ढिलाई बरतना।
“झारखंड की बेटियां अब और अन्याय नहीं सहेंगी”
राफिया नाज ने स्पष्ट किया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की विफलता की राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी वर्तमान सरकार को लेनी होगी। उन्होंने कहा कि झारखंड की बेटियां अब अन्याय और अत्याचार बर्दाश्त नहीं करेंगी।
उन्होंने मांग की कि सरकार को त्वरित और कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी ताकि आम जनता और अभिभावकों में अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर विश्वास बहाल हो सके। बेटियों की सुरक्षा किसी एक राजनीतिक दल का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है; और यदि सरकार इस दायित्व को निभाने में विफल रहती है, तो उसे जनता के सामने जवाब देना ही होगा।