Home » राम मंदिर ट्रस्ट में CEO की नियुक्ति पर कांग्रेस का हमला: कहा- चंदे की पाई-पाई का हिसाब सार्वजनिक करे ट्रस्ट
राम मंदिर के नए CEO की नियुक्ति स्वागत योग्य, लेकिन चंदे की पाई-पाई का हिसाब भी सार्वजनिक हो: कांग्रेस !
चंदा चोरी के आरोपों पर पर्दा डालने के बजाय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करे ट्रस्ट: राकेश सिन्हा !
रांची। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट द्वारा सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को मंदिर ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किए जाने पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाया गया यह कदम तभी सार्थक सिद्ध होगा, जब मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपये के चंदे और चढ़ावे की पूरी व्यवस्था पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।
आस्था का सम्मान, लेकिन हिसाब-किताब पर सवाल
प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि कांग्रेस राम मंदिर और भगवान श्रीराम के प्रति करोड़ों लोगों की आस्था का पूर्ण सम्मान करती है। मंदिर प्रबंधन को पेशेवर और सुचारू बनाने के उद्देश्य से यदि CEO की नियुक्ति की गई है, तो यह कदम स्वागत योग्य है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि श्रद्धालुओं द्वारा पूरी आस्था के साथ दिए गए चंदे और चढ़ावे का लेखा-जोखा जनता के सामने कब सार्वजनिक किया जाएगा?
उन्होंने कहा कि भगवान राम के नाम पर प्राप्त एक-एक रुपये का हिसाब देश की जनता के समक्ष होना चाहिए। हाल के दिनों में चढ़ावे और मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय कार्यप्रणाली को लेकर जो सवाल और आरोप सामने आए हैं, उनका समाधान एक पारदर्शी जांच और सार्वजनिक ऑडिट के माध्यम से ही संभव है।
केवल नियुक्ति काफी नहीं, मिले पूर्ण अधिकार और नियमित ऑडिट
राकेश सिन्हा ने स्पष्ट किया कि केवल एक नया CEO नियुक्त कर देने से वित्तीय जवाबदेही तय नहीं हो जाती। नए CEO को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम करने का पूर्ण अधिकार मिलना चाहिए। इसके साथ ही, वित्तीय पारदर्शिता की एक मजबूत व्यवस्था और ट्रस्ट के सभी कामकाज का नियमित ऑडिट सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
श्रद्धालुओं की अमानत है राम मंदिर का धन
प्रदेश कांग्रेस मीडिया प्रभारी ने बल देते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के नाम पर एकत्र हुआ धन किसी व्यक्ति, संस्था या राजनीतिक दल की निजी संपत्ति नहीं है। यह देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की गाढ़ी कमाई और उनकी अमानत है। इसलिए इसके उपयोग और रखरखाव में शत-प्रतिशत पारदर्शिता होनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि यदि ट्रस्ट वास्तव में सुशासन और पारदर्शिता के प्रति गंभीर है, तो उसे मंदिर के कुल चंदे, चढ़ावे, दैनिक खर्चों और संपत्तियों का विस्तृत ऑडिट सार्वजनिक करना चाहिए। इसके अलावा, जिन मामलों को लेकर हाल के दिनों में सवाल उठे हैं, उनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
कांग्रेस का मानना है कि यह मांग किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि रामभक्तों की आस्था की पवित्रता और उनके द्वारा दिए गए दान की सुरक्षा के लिए है। राम मंदिर प्रबंधन में व्यवस्था का बदलना अच्छा है, लेकिन सबसे पहले उस व्यवस्था में पारदर्शिता का आना ही करोड़ों रामभक्तों के प्रति सच्ची जवाबदेही होगी।