Home » रिम्स पार्ट-2 केवल छलावा, पहले पार्ट-1 सुधारें: राफिया नाज़
रिम्स पार्ट-2 से पहले रिम्स पार्ट-1 को सुधारें स्वास्थ्य मंत्री’: भाजपा प्रवक्ता राफिया नाज़ का इरफ़ान अंसारी पर तीखा पलटवार
जब अस्पतालों में लोग इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हों, तब रिम्स पार्ट-2 की घोषणा जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
रांची: भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज़ ने स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी के ‘रिम्स पार्ट-2’ संबंधी बयान पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि झारखंड की जनता को नए और खोखले सपने नहीं, बल्कि अस्पतालों में जीवन बचाने वाली बुनियादी सुविधाएं चाहिए।
राफिया नाज़ ने कहा कि जब राज्य का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल रिम्स (RIMS) आज भी डॉक्टरों, नर्सों, दवाइयों, बेड और आवश्यक उपकरणों की कमी से जूझ रहा है, तब रिम्स पार्ट-2 की घोषणा करना जनता के साथ एक छलावा है।
📊 कैग (CAG) रिपोर्ट का हवाला: स्वास्थ्य विभाग की खुली पोल
भाजपा प्रवक्ता ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण हज़ारों पद खाली पड़े हैं:
पद का नामकुल स्वीकृत पदरिक्त पड़े पद
चिकित्सा पदाधिकारी (Doctors) 3,6342,210
स्टाफ नर्स (Staff Nurses) 5,8723,033
पैरामेडिकल स्टाफ 1,080864
वर्षों बीत जाने के बावजूद इन रिक्तियों को नहीं भर पाना यह साफ बताता है कि झारखंड सरकार की प्राथमिकताओं में राज्य का गरीब मरीज कभी शामिल ही नहीं रहा।” — राफिया नाज़
आलीशान भवन नहीं, समुचित इलाज ज़रूरी
राफिया नाज़ ने स्पष्ट किया कि भाजपा को राज्य सरकार की रिम्स-2 की योजना से कोई आपत्ति नहीं है। आपत्ति इस बात से है कि सरकार गलत स्थल चयन कर रही है और पुराने संस्थानों को दुरुस्त किए बिना नया सपना दिखा रही है।
क्या सिर्फ आलीशान भवन बना देने से समुचित इलाज की गारंटी मिल जाती है?
इसके विपरीत, भाजपा सरकार ने राज्य में एम्स (AIIMS) और कई मेडिकल कॉलेज बनाए, साथ ही आयुष्मान योजना दी जो आज गरीबों के लिए वरदान साबित हो रही है।
निजी अस्पतालों की मनमानी और एम्बुलेंस की कमी पर घेरा
हाल ही में रांची के एक निजी अस्पताल द्वारा एक मरीज को 22 लाख रुपये का भारी-भरकम बिल थमाए जाने के मामले पर भी उन्होंने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि यह उस व्यवस्था की विफलता है जिसने निजी अस्पतालों की मनमानी पर अंकुश लगाना छोड़ दिया है। अगर सरकारी अस्पताल मजबूत होते, तो मध्यमवर्गीय परिवारों को ऐसी आर्थिक तबाही का सामना नहीं करना पड़ता।
इसके अलावा, राज्य के कई जिलों में ब्लड बैंक की भारी कमी है, कहीं गलत खून चढ़ने से जान जा रही है, तो कहीं समय पर एम्बुलेंस न मिलने के कारण मरीज रास्ते में ही दम तोड़ रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री से सीधे सवाल
राफिया नाज़ ने स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी से सीधे सवाल पूछते हुए कहा कि वे जनता को बताएं:
स्वास्थ्य विभाग में खाली पड़े हज़ारों रिक्त पद कब भरे जाएंगे?
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवाइयां और डॉक्टर कब उपलब्ध होंगे?
रिम्स पार्ट-1 को विश्वस्तरीय बनाने के लिए अब तक सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए हैं ?
निष्कर्ष: भाजपा प्रवक्ता ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब तक मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत नहीं किया जाता, तब तक रिम्स पार्ट-2 की बातें केवल एक छलावा और जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ हैं। झारखंड की जनता को घोषणाओं से नहीं, बल्कि ज़मीन पर बेहतर इलाज मिलने से भरोसा आएगा।