Home » जमशेदपुर के ‘देवदूत’: छोटू स्नेक बॉय की टीम ने 35 सांपों को दिया नया जीवन, दलमा-तलसा जंगल में दी आजादी
जमशेदपुर: मानसून की दस्तक और भीषण गर्मी के बीच जमशेदपुर और इसके आस-पास के रिहायशी इलाकों में सांपों का निकलना काफी बढ़ गया है। ऐसे में लोगों को सुरक्षा देने और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए एक सराहनीय कदम उठाया गया है। शहर के विभिन्न इलाकों से रेस्क्यू किए गए करीब 35 सांपों को आज तलसा (दलमा) के घने जंगलों में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
🐍 इन प्रजातियों के सांपों को मिली आजादी
वन विभाग की देखरेख में छोड़े गए इन सांपों में कई बेहद जहरीली और दुर्लभ प्रजातियां शामिल थीं:
जहरीले सांप: कोबरा (नाग), रसेल वाइपर, और इंडियन कॉमन क्रेट (Krait)।
गैर-जहरीले/अन्य सांप: सैंड बोआ (Sand Boa), वुल्फ स्नेक (Wolf Snake), धामिन (Rat Snake) और वाटर स्नेक।
🛑 पर्यावरण के लिए क्यों जरूरी है यह कदम?
सर्प रक्षक टीम का कहना है कि सांपों को मारना किसी समस्या का हल नहीं है। वे हमारे इकोसिस्टम (पर्यावरण संतुलन) के लिए बेहद जरूरी हैं। तलसा और दलमा के जंगलों को इन सांपों के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है, क्योंकि यहाँ प्रचुर मात्रा में पानी और छिपने के लिए सुरक्षित प्राकृतिक जगहें उपलब्ध हैं।
🧑श्रम और सेवा: 15 सालों से ‘देवदूत’ बनी है छोटू स्नेक बॉय की टीम
जमशेदपुर में मिथिलेश श्रीवास्तव उर्फ ‘छोटू स्नेक बॉय’ और उनकी ‘सर्प रक्षक टीम’ पिछले 15 सालों से लगातार सक्रिय है।
24×7 रेस्क्यू: यह टीम घरों, रिहायशी कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थानों पर सांप निकलने की सूचना मिलते ही बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचती है।
जान जोखिम में डालकर सुरक्षा: मानसून और गर्मियों में जब सांपों और इंसानों का आमना-सामना होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है, तब यह टीम स्थानीय लोगों के लिए किसी देवदूत से कम साबित नहीं होती।
जागरूकता अभियान: टीम सिर्फ सांप पकड़ती ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक भी करती है कि ज्यादातर सांप इंसानों से दूर रहना पसंद करते हैं और केवल तभी हमला करते हैं जब उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस होता है।
🤝 प्रशासन और वन विभाग ने थपथपाई पीठ
छोटू स्नेक बॉय और उनकी टीम के इस निस्वार्थ और साहसिक कार्य की स्थानीय प्रशासन और वन विभाग ने भी जमकर सराहना की है। रेस्क्यू किए गए सभी सांपों को जंगल में छोड़ते वक्त वन विभाग के नियमों का पूरी तरह पालन किया गया, ताकि वन्यजीवों को कोई नुकसान न पहुंचे।