Home » फसल से आगे: मोदी सरकार में भारतीय कृषि और किसान की नई आर्थिक आज़ादी
फसल से आगे, समृद्धि की ओर: मोदी सरकार के 12 वर्षों में कैसे बदली भारतीय कृषि की तकदीर; केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का विशेष लेख
नई दिल्ली: “बीते 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय कृषि केवल ‘अनाज उत्पादन’ के दायरे से बाहर निकलकर किसान की समृद्धि, जोखिम-सुरक्षा, हरित तकनीक और ग्रामीण विकास का सबसे मजबूत आधार बन चुकी है। पहले हमारी चिंता सिर्फ भूख से बचाव और खाद्यान्न की कमी को दूर करना था, लेकिन आज नीतियों का पूरा फोकस ‘किसान की वास्तविक आय कितनी बढ़ी’ और ‘खेती कितनी टिकाऊ बनी’ पर आ चुका है।” यह बातें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने विशेष लेख में साझा की हैं।
केंद्रीय मंत्री ने देश की नई कृषि यात्रा का पूरा रोडमैप और सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के आंकड़े देश के सामने रखे हैं।
📊 रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन और ₹4.27 लाख करोड़ का सीधा आय-समर्थन
देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए उत्पादन और सुरक्षा दोनों मोर्चों पर ऐतिहासिक काम हुआ है:
ऐतिहासिक उत्पादन: भारत आज 3765.63 लाख टन के रिकॉर्ड खाद्यान्न स्तर पर पहुंच चुका है। धान, गेहूं, मक्का, दालें और तिलहन के उत्पादन में देश के इतिहास की सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज हुई है।
PM-KISAN से सीधी मदद: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत अब तक 22 किस्तों के माध्यम से 9 करोड़ से ज्यादा किसान परिवारों के बैंक खातों में 4.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे (DBT) ट्रांसफर की जा चुकी है।
सुरक्षा कवच: पीएम फसल बीमा योजना (PMFBY) ने करोड़ों किसानों को बेमौसम बारिश, सूखा और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के नुकसान के खिलाफ एक अभेद्य सुरक्षा कवच दिया है।
🛢️ दलहन, तिलहन और कॉटन मिशन: विदेशी निर्भरता खत्म करने का संकल्प
खाद्य तेलों और दालों के आयात पर देश के करोड़ों रुपये खर्च होते थे, जिसे रोकने के लिए सरकार तीन रणनीतिक मिशनों पर काम कर रही है:
राष्ट्रीय दलहन मिशन: तुअर, उड़द, मसूर और चना जैसी फसलों की उच्च-उपज किस्मों, क्लस्टर खेती और MSP के सुदृढ़ ढांचे के जरिए भारत को दालों में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी है।
तिलहन मिशन: सरसों, सोयाबीन, सूरजमुखी और पाम ऑयल पर विशेष फोकस कर देश की खाद्य तेल सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है ताकि किसानों को ऊंची कीमत मिल सके।
कॉटन मिशन: कपास के किसानों को वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए कीट-रोधी किस्मों और टेक्सटाइल वैल्यू-चेन से सीधा जुड़ाव सुनिश्चित किया जा रहा है।
🌿 प्राकृतिक खेती मिशन: 1 करोड़ किसान और 75 लाख हेक्टेयर का महा-लक्ष्य
मिट्टी की थकावट और रासायनिक खादों पर बढ़ती निर्भरता को कम करने के लिए सरकार प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन बना रही है:
बड़ा लक्ष्य: देश के 1 करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए जागरूक (Sensitize) किया जा रहा है, जिनमें से 18 लाख किसानों को सक्रिय रूप से तैयार कर चरणबद्ध तरीके से 75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाया जाएगा।
फायदा: इससे छोटे किसानों की इनपुट लागत (लागत खर्च) घटेगी, मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और देश के नागरिकों को पोषण युक्त व स्वास्थ्यप्रद भोजन मिलेगा।
📍 प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना: देश के 100 पिछड़े जिलों का कायाकल्प
देश में कृषि विकास की असमानता को दूर करने के लिए ‘प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना’ की संकल्पना की गई है:
लक्षित निवेश: देश के ऐसे 100 कम उत्पादन वाले जिलों की पहचान की गई है, जहां प्रति हेक्टेयर पैदावार राष्ट्रीय औसत से काफी कम है।
36 योजनाओं का कन्वर्जेन्स: इन जिलों में अलग-अलग विभागों की 11 विभागों की 36 योजनाओं को एक साथ मिलाकर (Convergence) समग्र पैकेज दिया जा रहा है, जिसमें सिंचाई, मृदा स्वास्थ्य, पशुपालन और बाजार जुड़ाव को एक बिंदु पर लाया गया है।
🚜 ‘खेत बचाओ अभियान’: मिट्टी और पानी का संतुलन सुधारने के 5 मंत्र
असंतुलित उर्वरक उपयोग और भूजल के अत्यधिक दोहन को रोकने के लिए शुरू किए गए इस अभियान के पांच मुख्य संदेश हैं:
मिट्टी परीक्षण (Soil Testing) के आधार पर ही उर्वरकों का सटीक उपयोग करें।
डीएपी (DAP) और यूरिया पर अत्यधिक निर्भरता कम कर संतुलित NPK, नैनो और जैव उर्वरकों को अपनाएं।
हरी खाद, जैविक खाद और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा दें।
नकली बीज, नकली खाद और कीटनाशकों के खिलाफ सतर्क रहें और प्रशासन को तुरंत सूचित करें।
प्राकृतिक खेती और जलवायु-अनुकूल (Climate-Resilient) पद्धतियों की ओर संगठित रूप से कदम बढ़ाएं।
🔬 डिजिटल कृषि मिशन और ICAR की ‘साइंस-बैकड’ क्रांति
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और नई तकनीकों ने ‘लैब से लैंड’ की दूरी को मिटा दिया है:
3000 जलवायु-सहनशील किस्में: 2014 से 2025 के बीच ICAR ने लगभग 3,000 ऐसी फसल किस्में विकसित की हैं जो सूखा, बाढ़, लू और लवणीयता को आसानी से झेल सकती हैं। इसके अतिरिक्त 200 से अधिक बायोफोर्टिफाइड किस्में जारी की गई हैं।
एग्रीस्टैक (AgriStack): डिजिटल कृषि मिशन के तहत किसानों की डिजिटल आईडी (Farmer IDs), प्लॉटों का डिजिटलीकरण और ड्रोन तकनीक से कीट-रोगों की निगरानी की जा रही है। ई-नाम (e-NAM) और केवीके (KVK) नेटवर्क से वैज्ञानिक और किसान सीधे आपस में जुड़े हैं।
💬 “खेत बचेगा तो किसान बचेगा, किसान बचेगा तो भारत समृद्ध होगा”
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लेख के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न को स्पष्ट करते हुए लिखा—
“जब विज्ञान, अनुसंधान और डिजिटल तकनीक से खेती कुशल और टिकाऊ बनेगी, तभी क्षेत्रीय असमानता घटेगी। हमारा सार स्पष्ट है— जब खेत बचेगा, तब किसान बचेगा। जब किसान बचेगा, तब कृषि बचेगी और जब कृषि बचेगी, तभी भारत का भविष्य सुरक्षित, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनेगा।”