फेक न्यूज़ और भ्रामक जानकारियों पर लगेगी लगाम; चुनाव आयोग के सम्मेलन में झारखंड सहित देशभर के 350+ मीडिया अफसरों को मिली ‘स्पेशल ट्रेनिंग’
नई दिल्ली: देश में निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावी चुनावी प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) एक्शन मोड में है। शुक्रवार, 12 जून 2026 को देश की राजधानी नई दिल्ली में मीडिया और संचार अधिकारियों के लिए एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया।
इस सम्मेलन में देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मीडिया व सोशल मीडिया नोडल अधिकारियों ने हिस्सा लिया। विशेष रूप से उन राज्यों के जिला जनसंपर्क अधिकारी (DPRO) इसमें शामिल हुए, जहां मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) का तीसरा चरण चल रहा है या जहां आगामी विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।
🇮🇳 झारखंड के 16 वरिष्ठ अधिकारी सम्मेलन में हुए शामिल
झारखंड में आगामी चुनावी तैयारियों और मतदाता सूची पुनरीक्षण को देखते हुए राज्य की भागीदारी इस सम्मेलन में बेहद महत्वपूर्ण रही:
- झारखंड का नेतृत्व: मीडिया नोडल–सह–अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, झारखंड, श्री सुबोध कुमार ने इस राष्ट्रीय सम्मेलन में राज्य का प्रतिनिधित्व किया।
- 15 जिलों के अफसर मौजूद: उनके साथ झारखंड के 15 जिलों के जिला जनसंपर्क अधिकारी (DPRO) और राज्य स्तर के अधिकारियों सहित कुल 16 पदाधिकारियों की टीम इस ट्रेनिंग प्रोग्राम का हिस्सा बनी। पूरे देश से इस कार्यक्रम में 350 से अधिक संचार विशेषज्ञों ने भाग लिया।
📢 “तथ्यों और कानून पर आधारित हो सरकारी संचार” — मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने हाल ही में पांच राज्यों में संपन्न हुए चुनावों की सफलता का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन चुनावों में आजादी के बाद से अब तक की सबसे अभूतपूर्व जनभागीदारी देखी गई है। उन्होंने अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि सरकारी संचार (Communication) हमेशा समय पर होना चाहिए, भाषा सरल और समझने में आसान हो, तथा पूरी जानकारी पूरी तरह से तथ्यों व कानून पर आधारित होनी चाहिए।
🎯 सिर्फ जानकारी देना काफी नहीं, उसके ‘असर’ पर हो ध्यान: चुनाव आयुक्त
- चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू ने अधिकारियों को गुरुमंत्र देते हुए कहा कि संचार का ध्यान केवल ‘इनपुट’ (यानी जानकारी शेयर करने) पर ही सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका जनता पर क्या प्रभाव (Impact) पड़ रहा है, यह देखना सबसे ज्यादा जरूरी है।
- चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने कहा कि चुनाव आयोग के जटिल नियमों, कानूनों और निर्देशों को आम जनता तक बेहद सरल और आसानी से समझ में आने वाले फॉर्मेट में पहुंचाने में इन मीडिया अधिकारियों की भूमिका रीढ़ की हड्डी की तरह है।
🛠️ दिनभर चले सत्रों में इन 4 मुख्य विषयों पर हुआ मंथन
सम्मेलन की शुरुआत नामांकन से लेकर मतदान तक की संचार रणनीतियों, संवैधानिक प्रावधानों और ECINET पोर्टल के तकनीकी उपयोग के ओवरव्यू के साथ हुई। इसके बाद दिनभर चले व्यावहारिक सत्रों में मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों पर ट्रेनिंग दी गई:
- रणनीतिक प्रसार: प्रेस नोट की सटीक योजना बनाना और मीडिया एवं सोशल मीडिया के माध्यम से उनका तेज प्रसार करना।
- फेक न्यूज़ पर प्रहार: इंटरनेट पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं (Misinformation) और झूठे नैरेटिव/अफवाहों से तुरंत और कानूनी तरीके से निपटना।
- युवा वोटर्स पर फोकस: चुनावी साक्षरता क्लबों (ELCs) के माध्यम से नए और युवा मतदाताओं को जागरूक कर बूथ तक लाना।
- अनुभवों का साझाकरण: हाल ही में जिन राज्यों में चुनाव संपन्न हुए हैं, वहां के अधिकारियों द्वारा जमीनी अनुभवों और ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ को देश के सामने रखना।
सवालों के जवाब: कार्यक्रम के आखिरी पड़ाव में मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में एक विशेष प्रश्नोत्तर (Q&A) सत्र का आयोजन किया गया, जहां देशभर से आए अधिकारियों की तकनीकी और व्यावहारिक शंकाओं का मौके पर ही समाधान किया गया।














