Home » आंकड़ों से प्रभाव तक: भारत में स्वास्थ्य अनुसंधान को नया आकार दे रहा ICMR
आंकड़ों से आपूर्ति तक: आईसीएमआर बेहतर भविष्य के लिए भारत के स्वास्थ्य अनुसंधान को नए सिरे से आकार दे रहा है
लेखक: डॉ. राजीव बहल
(सचिव, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और महानिदेशक, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद – ICMR)
“प्रभाव अकेले किसी व्यक्ति से नहीं – बल्कि प्रणालियों के तालमेल से संभव होता है। साथ मिलकर, हम आंकड़ों से निर्णय और फिर निर्णय से प्रभाव छोड़ने तक की यात्रा पूरी करेंगे।”
अब जबकि देश ‘विकसित भारत 2047’ के सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, हमारे सामने सवाल सिर्फ बीमारियों का इलाज करने के तरीकों का नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरतों का अनुमान लगा लेने वाली एक ऐसी स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण का भी है जो सबके लिए न्यायसंगत और नई सोच पर आधारित हो।
कोविड-19 महामारी के कठोर अनुभवों से सीख लेते हुए, जैव-चिकित्सा अनुसंधान (बायोमेडिकल रिसर्च) की देश की शीर्ष संस्था, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने कई ऐतिहासिक सुधार किए हैं। जो प्रणाली कभी बिखरी हुई थी, वह अब तकनीक द्वारा संचालित और लक्ष्यों पर केन्द्रित एक मजबूत इकोसिस्टम में बदल चुकी है।
🏛️ संस्थागत पुनर्गठन: ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ रिसर्च’ का नया नेटवर्क
आईसीएमआर के ढांचागत बदलाव अब राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप रणनीतिक रूप ले चुके हैं:
अंतर-विषयक केन्द्रों का उदय: संस्थानों को सीमित दायरे से निकालकर डिजिटल हेल्थ, डेटा साइंस, बाल स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य और इम्यूनोलॉजी (प्रतिरक्षा प्रणाली) जैसे आधुनिक क्षेत्रों की ओर मोड़ा गया है।
क्षेत्रीय नेटवर्क का विस्तार: पूर्वोत्तर के डिब्रूगढ़ से लेकर पश्चिम के जोधपुर तक क्षेत्रीय ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ रिसर्च’ के नेटवर्क का निर्माण किया गया है। ये संस्थान सीधे राज्य और जिला स्तर की स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ मिलकर काम करेंगे।
फ्यूचर-रेडी साइंस: इस नए ढांचे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जीनोमिक्स और रियल-टाइम डेटा सिस्टम को सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े निर्णयों का मुख्य आधार बनाया गया है।
💰 अनुसंधान फंडिंग: 4 चरणों वाला नया ‘नवाचार चक्र’
फंडिंग इकोसिस्टम को पूरी तरह पारदर्शी और परिणाम-उन्मुख (Result-Oriented) बनाया गया है:
आंतरिक अनुसंधान (Intramural): यह अब पूरी तरह संस्थान की पहल पर, स्पष्ट लक्ष्यों और तय समय-सीमा के भीतर व्यवस्थित होता है ताकि नतीजों को तुरंत जमीन पर उतारा जा सके।
बाह्य अनुसंधान (Extramural): इसे एक विशेष चार चरणों वाले नवाचार चक्र — विवरण (Description), खोज (Discovery), विकास (Development) और आपूर्ति (Delivery) में व्यवस्थित किया गया है।
नेशनल हेल्थ रिसर्च प्रोग्राम (NHRP): इसके तहत रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR), टीबी, मानसिक स्वास्थ्य, पोषण और इमरजेंसी केयर जैसे 13 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों (Mission-Mode Programs) की पहचान की गई है।
🤖 तकनीक और मेडटेक (MedTech) का नया शंखनाद
शहरी और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के बीच की खाई को पाटने के लिए आधुनिक तकनीक और स्थानीय रचनात्मकता का उपयोग किया जा रहा है:
एआई-आधारित टूल्स: क्षय रोग (टीबी) और डायबिटिक रेटिनोपैथी की त्वरित जांच में एआई फ्रंटलाइन वर्कर्स की मदद कर रहा है। पोषण संबंधी निगरानी भी अब एआई-संचालित हो चुकी है।
‘आई-ड्रोन’ (i-Drone) पहल: टीकों (वैक्सीन) की डिलीवरी से शुरू हुई इस योजना का विस्तार अब कॉर्निया जैसी जरूरी और संवेदनशील चिकित्सीय आपूर्ति को भौगोलिक बाधाओं को पार कर दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।
नवाचार को बढ़ावा देने वाले प्लेटफॉर्म: स्थानीय स्तर पर मेडिकल डिवाइस और पेटेंट को गति देने के लिए ‘मेडटेक-मित्र’ और ‘मेडिकल इनोवेशन-पेटेंट मित्र’ जैसे प्लेटफॉर्म शुरू किए गए हैं, जो ‘फर्स्ट इन द वर्ल्ड चैलेंज’ जैसी योजनाओं को व्यावसायीकरण (Commercialization) तक ले जा रहे हैं।
🏥 जमीनी स्तर पर जन-स्वास्थ्य पर प्रभाव (Impact Analysis)
आईसीएमआर के इन वैज्ञानिक सुधारों का सीधा लाभ आम नागरिकों को मिल रहा है:
पहल/कार्यक्रम
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मुख्य प्रभाव और कार्यप्रणाली
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इंडिया हाइपरटेंशन कंट्रोल इनिशिएटिव
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साक्ष्यों (Evidence) पर आधारित रणनीतियों के जरिए बड़े पैमाने पर पुरानी और गंभीर बीमारियों का सफल प्रबंधन।
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इमरजेंसी केयर मिशन
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मोबाइल स्ट्रोक यूनिट और त्वरित कार्डियक रिस्पॉन्स सिस्टम के जरिए जानलेवा स्थितियों में ऑन-स्पॉट इलाज।
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डायग्नोस्टिक नेटवर्क का विस्तार
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कैंसर से लेकर घातक संक्रामक बीमारियों का शुरुआती चरणों में ही स्वदेशी तकनीकों से पता लगाना।
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🎯 विकसित भारत 2047 का विज़न और रोडमैप
यह रणनीतिक बदलाव ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017’ के बिल्कुल अनुरूप है, जो बीमारी से बचाव, समानता और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर देती है।
वर्ष 2047 का रोडमैप डिजिटल हेल्थ, बायो-मैन्यूफैक्चरिंग और सतत विकास (Sustainable Development) के क्षेत्र में होने वाली प्रगति से तय होगा, जिसमें क्षमता विकास और वैश्विक सहयोग को प्राथमिकता दी जाएगी। स्वास्थ्य अनुसंधान कोई अलग-थलग काम नहीं, बल्कि एक सामूहिक राष्ट्रीय प्रयास है, जो एक स्वस्थ, अधिक न्यायसंगत और अधिक सुदृढ़ भारत की मजबूत नींव रख रहा है।