Home » बिहार के 629 स्कूलों में खुलेंगी मिनी सॉयल टेस्टिंग लैब, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने दी मंजूरी
बिहार में खेती और पढ़ाई का नया संगम: 629 स्कूलों में स्थापित होंगी मिनी ‘सॉयल टेस्टिंग लैब’; छात्र करेंगे मिट्टी की जांच, किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने दी बड़ी स्वीकृति; ₹1 लाख की लागत से हर स्कूल में बनेगी लैब, ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए भी जारी हुआ बजट
पटना, 15 जून 2026:
बिहार के कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने और आने वाली पीढ़ी को आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए नीतीश-सम्राट सरकार ने एक बेहद अनोखी पहल को हरी झंडी दे दी है। मीठापुर स्थित कृषि भवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान माननीय कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने ‘मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना’ के तहत राज्य के 629 पीएम श्री एवं राजकीय उच्च विद्यालयों में मिनी सॉयल टेस्टिंग (मिट्टी जांच) प्रयोगशालाएं स्थापित करने की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है।
इस दूरदर्शी योजना के तहत अब स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र खुद वैज्ञानिक तरीके से किसानों के खेतों की मिट्टी की जांच करना सीखेंगे, जिससे विद्यार्थियों में अनुसंधान (Research) की प्रवृत्ति बढ़ेगी और किसानों को उनके गांव में ही मिट्टी की सेहत की जानकारी मिल जाएगी।
📊 स्कूल सॉयल हेल्थ प्रोग्राम और वित्तीय ढांचा: एक नजर में
समीक्षा बैठक के बाद इस महत्वाकांक्षी योजना के बजट, लक्ष्यों और क्रियान्वयन के ब्लूप्रिंट को नीचे तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:
योजना का मुख्य बिंदु
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स्वीकृत गाइडलाइन और आंकड़े
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नए चिन्हित विद्यालयों की संख्या
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629 पीएम श्री एवं राजकीय विद्यालय (वित्तीय वर्ष 2026-27)
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पूर्व में स्थापित लैब (2025-26)
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160 सरकारी स्कूलों में सफलतापूर्वक संचालन जारी
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प्रति विद्यालय निर्धारित बजट
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₹1,00,000 (एक लाख रुपये)
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फंडिंग का अनुपात (केंद्र : राज्य)
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60% केंद्र सरकार (₹60,000) और 40% राज्य सरकार (₹40,000)
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प्रति स्कूल जांच का वार्षिक लक्ष्य
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कम से कम 50 मिट्टी के नमूनों (Samples) का संग्रहण और परीक्षण
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शामिल होने वाले छात्र-छात्राएं
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कक्षा 7वीं, 8वीं, 9वीं और 11वीं के विद्यार्थी
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🔬 कैसे काम करेगी स्कूलों की ‘सॉयल हेल्थ लैब’?
कृषि मंत्री ने योजना के संचालन की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि इन अत्याधुनिक मिनी प्रयोगशालाओं के माध्यम से चिन्हित कक्षाओं के छात्र व्यावहारिक (Practical) रूप से मिट्टी के नमूने इकट्ठा करना और उसकी रासायनिक जांच करना सीखेंगे।
मुफ्त सॉयल हेल्थ कार्ड: जांच के बाद भारत सरकार के मानकों के अनुसार स्कूल के बच्चे किसानों के बीच ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड’ (Soil Health Card) का वितरण करेंगे।
संतुलित खेती को बढ़ावा: इस कार्ड के जरिए किसानों को पता चल सकेगा कि उनके खेत में किस खाद (नाइट्रोजन, फास्फोरस या पोटाश) की कमी है, जिससे वे बिना वजह महंगे उर्वरक डालने से बचेंगे।
🍓 ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए जारी हुए 60 लाख रुपये
पारंपरिक खेती से हटकर किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए चतुर्थ कृषि रोड मैप के तहत ड्रैगन फ्रूट विकास योजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री बागवानी मिशन के अंतर्गत तीन करोड़ रुपये की इस कुल योजना में से, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्वीकृत 60 लाख रुपये के कोटे से 13.62 लाख रुपये की तात्कालिक निकासी एवं व्यय के स्वीकृत्यादेश को कृषि मंत्री ने मंजूरी दे दी है।
💬 “नवाचार और फसल विविधीकरण से समृद्ध होंगे किसान” — विजय कुमार सिन्हा
बैठक के समापन पर कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा:
“हमारी सरकार बिहार में कृषि के आधुनिकीकरण, फसल विविधीकरण (Crop Diversification) और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। स्कूलों में सॉयल टेस्टिंग लैब की शुरुआत और ड्रैगन फ्रूट जैसी नकदी व उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देना ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गेम-चेंजर साबित होगा। सभी अधिकारी इन योजनाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ समय सीमा के भीतर धरातल पर उतारें ताकि इसका शत-प्रतिशत लाभ विद्यार्थियों और अन्नदाताओं को मिल सके।”