Home » भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर: शाहपुर पहुंचे प्रशांत किशोर, सीएम सम्राट चौधरी को घेरा
शाहपुर एनकाउंटर: भरत तिवारी के परिजनों से मिले प्रशांत किशोर; बोले- ‘थानेदार का निलंबन न्याय नहीं, पटना में बैठे आकाओं पर हो कार्रवाई’
“पुलिसिंग का मतलब गोली चलाना नहीं…” सीएम सम्राट चौधरी के बयान पर भड़के पीके, महापंचायत में न्याय के लिए आर-पार की लड़ाई का एलान।
शाहपुर (भोजपुर): भोजपुर जिले के शाहपुर में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए युवा भरत भूषण तिवारी के घर आज जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) पहुंचे। पीके ने पीड़ित परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और उसके बाद गांव में आयोजित ‘श्रद्धांजलि सह महापंचायत सभा’ में शामिल होकर नीतीश-सम्राट सरकार पर तीखा हमला बोला।
प्रशांत किशोर ने सीधे तौर पर राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
📌 ‘छोटे अधिकारियों की बलि चढ़ाकर बचना चाहती है सरकार’
मीडिया से बातचीत करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि सरकार ने इस पूरे संवेदनशील मामले को बेहद खराब तरीके से हैंडल किया है।
“अब जब चौतरफा समाज का दबाव बढ़ा है, तो सरकार छोटे पदाधिकारियों की बलि चढ़ाकर अपनी जान बचाना चाह रहे हैं। पीड़ित परिवार को पैसा और नौकरी नहीं, बल्कि इंसाफ चाहिए। न्याय का मतलब यह कतई नहीं है कि यहां के थानेदार को सस्पेंड कर दिया जाए और डीएसपी पर कोई हल्की कार्रवाई हो जाए।”
– प्रशांत किशोर, सूत्रधार (जन सुराज)
पीके ने मांग की कि जिन लोगों ने पटना में बैठकर उस बच्चे को मारने का आदेश दिया है, असली कार्रवाई उन पर होनी चाहिए। इस हत्या को अंजाम देने वालों के साथ-साथ उन सफेदपोशों की भी जांच हो, जिनके इशारे पर यह सब हुआ।

🔥 मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर पीके का सीधा प्रहार
प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के उस बयान को आड़े हाथों लिया जिसमें उन्होंने एनकाउंटर को लेकर पुलिसिया कार्रवाई का बचाव किया था। पीके ने इस बयान को पूरी तरह ‘असंवेदनशील’ करार दिया।
“रक्षक ही भक्षक बन जाए तो समाज को खड़ा होना होगा:” पीके ने कहा कि राज्य के मुखिया को यह जवाब देना होगा कि वे किस मानसिकता से ऐसा बयान दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा था कि ‘डीजीपी ने खबर दी कि एक लड़का बंदूक दिखा रहा है तो मैंने कहा कि हमारी पुलिस को कोई बंदूक कैसे दिखा सकता है।’
पुलिस का काम समाज की रक्षा करना: पीके ने कहा, “एक संवेदनशील राज्य के नेता के इस बयान का नतीजा है कि आज प्रशासन समझता है कि पुलिसिंग का मतलब सिर्फ गोली चलाना है। पुलिस का काम गोली चलाना नहीं, समाज की रक्षा करना है।”
❓ घोषित ‘न्यायिक जांच’ पर पीके ने उठाए 4 बड़े सवाल
सरकार द्वारा मामले की न्यायिक जांच की घोषणा पर तंज कसते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि सिर्फ घोषणा से काम नहीं चलेगा, सरकार को इन चार सवालों के जवाब देने होंगे:
इस न्यायिक जांच को कौन सा अधिकारी या जज करेगा?
इस जांच का दायरा (परिधि) क्या तय किया गया है?
क्या इस जांच की आंच में गृह मंत्री की भूमिका की भी जांच होगी?
क्या एसटीएफ के उस बड़े पदाधिकारी और मजिस्ट्रेट पर कार्रवाई होगी जिसने पटना से बैठकर गोली चलाने के आदेश पर साइन किया?
‘परिवार अकेला नहीं, पूरा समाज साथ खड़ा है’
प्रेस नोट के अंत में प्रशांत किशोर ने संकल्प दोहराते हुए कहा कि भरत भूषण तिवारी की मां और उनके परिजन इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं। जन सुराज और पूरा समाज पूरी ताकत के साथ उनके पीछे खड़ा है और जब तक असली दोषियों को सजा नहीं मिलती, यह आंदोलन थमेगा नहीं।