बदलते बिहार की हुंकार: 20 साल में 13 गुना बढ़ी प्रति व्यक्ति आय; गरीबी मिटाने में बिहार देश में नंबर-1, नीति आयोग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा!
पटना: बिहार सरकार के योजना एवं विकास विभाग ने राज्य की आर्थिक और सामाजिक प्रगति से जुड़े पिछले दो दशकों के ऐतिहासिक आंकड़े जारी किए हैं। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, बिहार ने मानव विकास, गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचागत विकास के लगभग सभी मानकों पर देश के सामने एक बेहतरीन ‘इन्क्लूसिव ग्रोथ मॉडल’ (समावेशी विकास) पेश किया है।
नीति आयोग के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि बहुआयामी गरीबी (Multi-dimensional Poverty) को कम करने के मामले में बिहार पूरे देश में सबसे तेज रफ्तार से आगे बढ़ने वाला राज्य बन गया है।
💰 आर्थिक तरक्की: प्रति व्यक्ति आय में 1,223% का बंपर उछाल
विज्ञप्ति के अनुसार, राज्य के नागरिकों की आर्थिक स्थिति में अभूतपूर्व बदलाव आया है:
आय में वृद्धि: वर्ष 2004 में बिहार की प्रति व्यक्ति आय मात्र ₹5,780 थी, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 में बढ़कर ₹76,490 हो गई है। यह लगभग 13 गुना (1,223 प्रतिशत) की ऐतिहासिक वृद्धि है।
विकास पर खर्च: सरकार ने जनता पर होने वाले प्रति व्यक्ति विकास व्यय (Development Expenditure) को भी ₹1,463 (वर्ष 2005-06) से बढ़ाकर ₹13,279 (वर्ष 2024-25) कर दिया है। इसमें स्वास्थ्य बजट में 14.8 गुना और शिक्षा बजट में 13.2 गुना की बढ़ोत्तरी शामिल है।
📉 गरीबी उन्मूलन में बिहार ने रचा इतिहास (देश में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन)
नीति आयोग के बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के अनुसार, बिहार में गरीबी की दर में देश में सबसे तेज गिरावट आई है:
रिकॉर्ड गिरावट: वर्ष 2015-16 में बिहार की 51.89% आबादी बहुआयामी गरीबी के दायरे में थी, जो 2019-21 तक घटकर 33.76% रह गई।
राष्ट्रीय औसत से दोगुना सुधार: इस दौरान बिहार में गरीबी में 18.13% अंकों की कमी आई, जो देश के सभी राज्यों में सबसे ज्यादा है। राष्ट्रीय स्तर पर यह सुधार केवल 9.89% था, यानी बिहार ने देश के मुकाबले दोगुनी रफ्तार से गरीबी को खत्म किया है।
📊 एक नज़र में देखिए बिहार के ‘सफलता के आंकड़े’
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विकास के प्रमुख मानक |
पहले (2004 से 2006 के बीच) |
अब (2023 से 2025 के बीच) |
प्रगति की स्थिति |
|---|---|---|---|
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प्रति व्यक्ति आय |
₹5,780 |
₹76,490 |
13 गुना बढ़ोतरी |
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मानव विकास सूचकांक (HDI) |
0.485 |
0.614 |
27% का सुधार (राष्ट्रीय औसत से अधिक) |
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संस्थागत प्रसव (अस्पतालों में डिलीवरी) |
19.9% |
81.1% |
4 गुना से अधिक का सुधार |
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औसत जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) |
64.2 वर्ष |
69.5 वर्ष |
उम्र में 5.3 साल का इजाफा |
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बेरोजगारी दर (PLFS 2024) |
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👶 स्वास्थ्य और पोषण: बच्चों के स्वास्थ्य में बड़ा सुधार
स्वास्थ्य के क्षेत्र में लक्षित निवेश की बदौलत बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य में क्रांतिकारी सुधार हुआ है:
बच्चों में ठिगनापन (Stunting) में 20 प्रतिशत अंक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
कम वजन (Underweight) के बच्चों की संख्या में 20.2 प्रतिशत अंक और क्षीणता (Wasting) में 8.1 प्रतिशत अंक की कमी आई है, जो राष्ट्रीय औसत के सुधारों से बहुत आगे है।
🏆 सतत विकास लक्ष्यों (SDG) में ‘Aspirant’ से ‘Front Runner’ बना बिहार
संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की रैंकिंग में बिहार का प्रदर्शन शानदार रहा है:
स्वच्छ जल और स्वच्छता (SDG-6): बिहार 98 अंकों के साथ पूरे देश में तीसरे स्थान पर काबिज हो गया है।
अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण (SDG-3): बिहार का स्कोर 44 से बढ़कर 67 हो गया है, जिससे राज्य अब पिछड़े (Aspirant) राज्यों की श्रेणी से निकलकर ‘फ्रंट रनर’ (Front Runner) राज्यों की लीग में शामिल हो गया है।
समग्र SDG स्कोर: बिहार का कुल स्कोर 48 से बढ़कर 57 हो गया है, जिससे राज्य ‘परफॉर्मर’ श्रेणी में आ गया है।
निष्कर्ष: योजना एवं विकास विभाग की यह रिपोर्ट साफ करती है कि बिहार अब केवल एक कृषि प्रधान या पिछड़ा राज्य नहीं रहा, बल्कि पिछले 20 वर्षों की सामाजिक-आर्थिक नीतियों के दम पर विकसित बिहार के संकल्प को मजबूती से धरातल पर उतार रहा है।














