Home » बिहार में सुस्त बैंकों पर सरकार सख्त, सुधार न होने पर सरकारी जमा पर लगेगी रोक
बिहार में बैंकिंग सेक्टर पर बड़ी गाज: सुधर जाओ… वरना 6 महीने में ज़ब्त होगा सरकारी पैसा, उप-मुख्यमंत्री का कड़ा अल्टीमेटम!
पटना: बिहार सरकार ने राज्य में बैंकों के ढीले रवैये और सुस्त कार्यप्रणाली पर अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है। माननीय उप मुख्यमंत्री-सह-वित्त मंत्री श्री बीजेन्द्र प्रसाद यादव ने एक उच्च स्तरीय समिति की उन 5 बड़ी सिफारिशों को मंजूरी दे दी है, जो बैंकों की मनमानी पर पूरी तरह लगाम लगाएंगी।
वित्त विभाग ने साफ कर दिया है कि स्टेट बैंक (SBI) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) समेत 15 बड़े बैंकों की अब चौबीसों घंटे निगरानी (Monitoring) होगी। अगर अगले 6 महीनों में इनके प्रदर्शन में सुधार नहीं दिखा, तो इन बैंकों में मौजूद ‘सरकारी डिपॉजिट’ (Government Deposit) पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी।
🚨 इन 15 बैंकों पर लटकी ‘रेड लाइन’ की तलवार
वित्त विभाग ने जिन 15 प्रमुख बैंकों को अल्टीमेटम जारी कर सुधरने का पत्र भेजने का निर्देश दिया है, उनकी सूची नीचे है:
बड़े सरकारी बैंक: SBI, PNB, UCO Bank, Union Bank, Central Bank, Bank of India, Indian Overseas Bank, Bank of Maharashtra.
प्राइवेट और स्मॉल फाइनेंस बैंक: IDBI, Bandhan Bank, IndusInd Bank, Karnataka Bank, Unity Small Fin. Bank, Utkarsh Small Fin. Bank, Karur Vysya Bank.
📌 एक्शन प्लान: क्या हैं वो 5 बड़े फैसले?
बिहार के विकास आयुक्त श्री मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली हाई-लेवल कमेटी ने ये 5 बड़े निर्देश जारी किए हैं:
1. टारगेट अब और बड़ा, नाबार्ड का नया प्लान
बिहार का साख जमा अनुपात (CD Ratio) बढ़ाने के लिए अब वित्तीय वर्ष के संभावित डिपॉजिट का न्यूनतम 80% लक्ष्य तय होगा। नाबार्ड (NABARD) ने इस साल के लिए 3,55,532 करोड़ रुपये का संभावित साख प्लान (PLP) तय किया है।
2. बड़े बैंकों (SBI और PNB) की सुस्ती आई सामने
समिति की समीक्षा में एक चौंकाने वाला सच सामने आया है। अगर सिर्फ SBI को हटा दें, तो राज्य का CD Ratio 68.16% हो जाता है और PNB को भी हटा दें तो यह 72.75% पहुंच जाता है। यानी छोटे बैंक अच्छा काम कर रहे हैं, जबकि ये बड़े बैंक पीछे हैं। अब इन बड़े बैंकों को लोन देने का बड़ा टारगेट (ACP) सौंपा जाएगा।
3. ‘जनसमर्थ पोर्टल’ से सीधे मिलेगा लोन
किसानों और आम जनता को लोन के लिए बैंकों के चक्कर नहीं काटने होंगे। केंद्र सरकार के जनसमर्थ पोर्टल (Jan Samarth Portal) को बिहार की सभी सरकारी योजनाओं और KCC (किसान क्रेडिट कार्ड) से जोड़ (Integrate) दिया जाएगा। इससे आवेदन सीधे बैंकों तक डिजिटल रूप से पहुंचेंगे।
4. 50 लाख किसान और जीविका दीदियां रडार पर
गाँवों में पंचायत स्तर पर विशेष ‘सहयोग शिविर’ लगाए जाएंगे। जिन 50 लाख किसानों की आई०डी० बन चुकी है, उनके साथ-साथ जीविका दीदियों और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को सीधे टारगेट कर जनसमर्थ पोर्टल के जरिए झटपट KCC लोन दिया जाएगा।
5. 100 अंकों की रैंकिंग और ‘6 महीने’ की मोहलत
बैंकों के परफॉर्मेंस को मापने के लिए 100 अंकों का एक इंडेक्स बनाया गया है। जिनका परफॉर्मेंस 50% या 60% से नीचे है, उन्हें ‘रेड ज़ोन’ में रखकर सुधरने के लिए केवल 6 महीने का वक्त मिला है।
जानिए कौन रख रहा है बैंकों की हर चाल पर नज़र?
यह पूरी कड़ाई इसी साल 22 जनवरी को हुई SLBC की बैठक के बाद बुनी गई रणनीति का हिस्सा है। इस हाई-लेवल कमेटी का ढांचा बेहद मजबूत है:
अध्यक्ष: विकास आयुक्त, बिहार।
सदस्य: अपर मुख्य सचिव (वित्त विभाग), निदेशक (RBI), मुख्य महाप्रबंधक (NABARD) और मुख्य महाप्रबंधक (SBI)।
संपादकीय टिप्पणी: बिहार सरकार का यह कदम राज्य के किसानों, छोटे व्यापारियों और युवाओं के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है, जिन्हें अक्सर बैंकों के चक्कर काटने के बाद भी लोन नहीं मिल पाता था। देखना यह है कि सरकारी पैसा छिन जाने के डर से ये 15 बैंक अपनी रफ्तार कितनी बढ़ाते हैं!