Home » झामुमो विनोद पांडे, शेल पार्टियां बीजेपी, RUPP मनी लॉन्ड्रिंग, राजनीतिक चंदा घोटाला, चुनाव आयोग, जेएमएम
शटर-बंद शेल पार्टियों के जरिए लोकतंत्र के ‘चीरहरण’ की साजिश: JMM महासचिव विनोद पांडे ने BJP, केंद्र और EC को घेरा !
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे ने एक प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP), केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाए हैं। विनोद पांडे का कहना है कि देश में गुजरात सरकार, केंद्र और चुनाव आयोग की नाक के नीचे “शटर-बंद” गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) के जरिए सैकड़ों करोड़ रुपये के हवाला और फंड ट्रांसफर का फलता-फूलता नेटवर्क चलाया जा रहा है।
झामुमो नेता ने आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि शेल राजनीतिक दलों का इस्तेमाल करके देश में लोकतंत्र का चीरहरण करने की गहरी साजिश रची जा रही है।
चुनावी चंदे का चौंकाने वाला गणित: ₹1,700 करोड़ से अधिक की फंडिंग
विनोद पांडे ने बताया कि देश में दर्ज कुल 2,800 राजनीतिक दलों में से 6 राष्ट्रीय दल, 27 क्षेत्रीय दल और 2,727 गैर-मान्यता प्राप्त दल (RUPP) हैं। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इन अज्ञात और शटर-बंद पार्टियों के खातों में 1,700 करोड़ 78 लाख रुपये से अधिक का भारी-भरकम चंदा आया।
वर्ष 2023-24 में गैर-मान्यता प्राप्त दलों को मिला मुख्य चंदा:
आम जनमत पार्टी: ₹620 करोड़ 24 लाख
सत्यवादी रक्षक पार्टी: ₹330 करोड़ 55 लाख
स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी: ₹219 करोड़ 69 लाख
न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी: ₹200 करोड़ 69 लाख
भारतीय नेशनल जनता दल: ₹191 करोड़ 61 लाख
गरीब कल्याण पार्टी: ₹138 करोड़
”न दफ्तर, न कार्यकर्ता — सिर्फ 15 उम्मीदवार उतारकर कमाए ₹1700 करोड़”
झामुमो महासचिव ने कहा कि जिन ठिकानों पर इन दलों का रजिस्ट्रेशन है, वहां सामान्य राजनीतिक गतिविधियों के बजाय ताले लटके मिलते हैं। ₹1,700 करोड़ से अधिक का चंदा बटोरने वाली इन फर्जी पार्टियों ने पूरे चुनाव में मात्र 15 उम्मीदवार मैदान में उतारे।
विनोद पांडे ने सवाल उठाया कि जब इन दलों को राजनीति ही नहीं करनी थी और कोई जन-संबंधित कार्य नहीं करना था, तो यह अकूत संपत्ति और फंडिंग आखिर किस मकसद से जुटाई गई?
गुजरात कनेक्शन और बीजेपी से साठगांठ का आरोप
जेएमएम नेता ने आरोप लगाया कि बंगाल में NCPI के साथ मिलीभगत कर TMC के 20 सांसदों के साथ इसे एनडीए (NDA) का बड़ा सहयोगी दिखाने का खेल रचा गया। इसके अलावा, ₹620 करोड़ से ज्यादा फंड पाने वाली आम जनमत पार्टी की संस्थापक अनामिका पासवान आज बिहार बीजेपी की प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। चंदा मिलने के बाद इस पार्टी का पंजीकृत ठिकाना बिहार से सीधे गुजरात स्थानांतरित कर दिया गया, जो सीधे तौर पर राजनीतिक मिलीभगत को दर्शाता है।
CBDT की रिपोर्ट के बावजूद ED-CBI खामोश क्यों?
केंद्रीय जांच एजेंसियों के रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए विनोद पांडे ने कहा कि खुद आयकर विभाग (CBDT) ने अपनी आधिकारिक प्रेस रिलीज में स्वीकार किया है कि गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों का उपयोग फंड ट्रांसफर और मनी लॉन्ड्रिंग/हवाला लेन-देन के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने पूछा कि जब सरकारी एजेंसियां खुद इसे वित्तीय गड़बड़ी मान रही हैं, तो ईडी (ED), सीबीआई (CBI) और आयकर विभाग गुजरात और इन शेल पार्टियों के ठिकानों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं? विपक्ष पर तुरंत एक्शन लेने वाली एजेंसियां इस मामले पर मौन क्यों हैं?
JMM के 4 सीधे सवाल:
₹1,700 करोड़ की कथित मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कब शुरू होगी?
इन शटर-बंद शेल पार्टियों को इतनी बड़ी रकम दान करने वाले असली चेहरे कौन हैं?
क्या इस काले धन का इस्तेमाल चुनी हुई राज्य सरकारों को गिराने और जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) के लिए किया गया?
चुनाव आयोग मूकदर्शक क्यों बना हुआ है? क्या केवल रजिस्ट्रेशन देकर फर्जी दलों को मनी लॉन्ड्रिंग की खुली छूट दी जाएगी?
झामुमो ने स्पष्ट किया कि देश की जनता को इस बड़े राजनीतिक व वित्तीय खेल का सच जानने का पूरा अधिकार है और आयोग को इस पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।