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रांची में दो दिवसीय राज्यस्तरीय VBD उन्मुखीकरण आयोजित: झारखंड में वेक्टर जनित रोगों के नियंत्रण की तैयारी तेज
रांची। झारखंड में मलेरिया, डेंगू, कालाजार और फाइलेरिया जैसे वेक्टर जनित रोगों (VBD) की रोकथाम एवं प्रभावी नियंत्रण के लिए दो दिवसीय राज्यस्तरीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। 8 और 9 सितंबर 2026 को रांची स्थित होटल रेनड्यू में आयोजित इस कार्यक्रम का संयोजन वेक्टर जनित रोग विभाग, झारखंड और कैवल्या एजुकेशन फाउंडेशन (KEF — पिरामल फाउंडेशन की एक पहल) के संयुक्त सहयोग से किया गया।
इस उन्मुखीकरण कार्यशाला में राज्य के सभी 24 जिलों के वेक्टर जनित रोग पदाधिकारियों (DVBD Officers) और जिला VBD सलाहकारों ने हिस्सा लिया।
अभियान निदेशक ने अंतर-विभागीय समन्वय और समीक्षा पर दिया जोर
कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), झारखंड के अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा के नेतृत्व में हुआ। उद्घाटन सत्र के दौरान राज्य में मलेरिया, कालाजार, लिम्फेटिक फाइलेरियासिस, डेंगू और चिकनगुनिया की वर्तमान स्थिति, क्षेत्रीय चुनौतियों और आगामी प्राथमिकताओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा:
“वेक्टर जनित रोगों पर नियंत्रण केवल स्वास्थ्य विभाग के अकेले प्रयास से संभव नहीं है। इसके लिए स्थानीय निकायों, अन्य सरकारी विभागों और समुदाय का एक साथ मिलकर काम करना आवश्यक है। सभी जिला अधिकारी आंकड़ों की नियमित समीक्षा करें और समयबद्ध कार्रवाई, जन-जागरूकता तथा हर मरीज तक त्वरित इलाज की पहुंच सुनिश्चित करें।”
मरीजों को दवा के साथ मच्छरदानी देने का सुझाव
सत्र के दौरान राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. रंजीत प्रसाद ने कहा कि संचरण (Transmission) को रोकने के लिए संक्रमित व्यक्ति को मच्छरों के काटने से बचाना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने अभियान निदेशक के समक्ष सुझाव रखा कि हर चिह्नित रोगी को इलाज और दवा के साथ-साथ मच्छरदानी भी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
उन्मुखीकरण के प्रमुख बिंदु और कार्ययोजना
क्षमता निर्माण एवं डेटा विश्लेषण: जिला और प्रखंड स्तर पर आंकड़ों (Data) की नियमित समीक्षा कर रोग के पैटर्न और रुझानों की पहचान करना।
अंतर-विभागीय सहयोग: नगर निकाय, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, शिक्षा विभाग, पंचायती राज और ग्रामीण विकास विभाग के साथ मिलकर कार्य करना।
सामुदायिक भागीदारी: मुखिया, ग्राम प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूह (SHG), विद्यालय, शिक्षक और स्थानीय युवाओं को जागरूकता अभियानों से जोड़ना।
विशेष कालाजार उन्मूलन रणनीति: संदिग्ध मरीजों की सक्रिय खोज (Active Case Finding), त्वरित जांच, पूर्ण उपचार और नियमित फॉलो-अप पर विशेष फोकस।
सामूहिक प्रयास से सुदृढ़ होगी स्वास्थ्य व्यवस्था
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने अपने-अपने जिलों के क्षेत्रीय अनुभव, चुनौतियों और उपलब्धियों को साझा किया। समूह चर्चाओं के माध्यम से जिला-विशिष्ट समस्याओं के समाधान और बेहतर कार्ययोजना तैयार करने पर मंथन हुआ।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), झारखंड और कैवल्या एजुकेशन फाउंडेशन ने उम्मीद जताई है कि इस उन्मुखीकरण से राज्य के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।