Home » झारखंड कैबिनेट में घमासान: सुदिव्य सोनू, इरफान अंसारी और दीपिका पांडे ने खोला मोर्चा, वित्त विभाग पर गंभीर आरोप
झारखंड कैबिनेट में बड़ा घमासान ! सुदिव्य सोनू, इरफान अंसारी और दीपिका पांडे ने अपनी ही सरकार के इस विभाग पर उठाए सवाल
रांची: झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारे से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में सरकार के अंदरूनी मतभेद और मंत्रियों की गहरी नाराजगी खुलकर सामने आ गई है। कैबिनेट के तीन कद्दावर मंत्रियों—सुदिव्य कुमार सोनू (नगर विकास मंत्री), डॉ. इरफान अंसारी (स्वास्थ्य मंत्री) और दीपिका पांडे सिंह (ग्रामीण विकास मंत्री) ने वित्त विभाग (Finance Department) के अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया है।
मंत्रियों का साफ आरोप है कि वित्त विभाग में जनहित और विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाओं की फाइलों को बेवजह दबाकर और लटकाकर रखा जा रहा है।
क्यों भड़के तीन मंत्री? जानिए अंदर की कहानी
कैबिनेट बैठक में मौजूद सूत्रों के अनुसार, तीनों मंत्रियों ने एक सुर में कहा कि उनके विभागों की फाइलें महीनों से वित्त विभाग में धूल फांक रही हैं। अधिकारियों की इस लेती-देती और सुस्त रफ्तार के कारण धरातल पर काम पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।
मंत्रियों का बड़ा बयान: “वित्तीय अनुशासन का पालन करना सही है, लेकिन इसके नाम पर जानबूझकर फाइलों को रोकना और अनावश्यक आपत्तियां (Queries) दर्ज करना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समय पर फंड रिलीज न होने से जनता के काम रुक रहे हैं।”
इन बड़े प्रोजेक्ट्स की फाइलें अटकीं:
स्वास्थ्य विभाग (रिम्स-2): रिम्स-2 (RIMS 2) के निर्माण के लिए कैबिनेट से 4100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंजूर हो चुकी है, लेकिन वित्त विभाग ने मानव संसाधन (डॉक्टरों और स्टाफ की कमी) की कार्ययोजना को लेकर फाइल को अटका रखा है।
नगर विकास विभाग: आदित्यपुर, मानगो, जमशेदपुर, जुगसलाई, कपाली और चास में करोड़ों रुपये के सीवरेज और वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट्स की फाइलें वित्त विभाग के चक्कर काट रही हैं।
ग्रामीण विकास विभाग: ग्रामीण सड़कों और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई अहम योजनाएं भी मंजूरी के इंतजार में ठप पड़ी हैं।
अधिकारियों के खिलाफ खोला मोर्चा
इस बैठक में सिर्फ फाइलें लटकने का ही मुद्दा नहीं गरमाया, बल्कि वित्त विभाग के संयुक्त सचिव की कार्यशैली पर भी मंत्रियों ने तीखे सवाल खड़े किए। मंत्रियों का कहना है कि ब्यूरोक्रेसी (अफसरशाही) हावी होने के कारण विकास की गति धीमी हो रही है, जिससे आगामी दिनों में सरकार की छवि को नुकसान पहुंच सकता है।
अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने इन तीन प्रमुख मंत्रियों की नाराजगी के बाद वित्त विभाग और आला अधिकारियों को क्या दिशा-निर्देश जारी करते हैं।