Home » झारखण्ड में 23 साल बाद ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’: मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने दुमका में दिए कड़े निर्देश
झारखण्ड में 23 साल बाद मतदाता सूची का ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’, CEO के. रवि कुमार बोले– “कोई भी पात्र नागरिक न छूटे”
दुमका / रांची: झारखण्ड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) श्री के. रवि कुमार ने साफ तौर पर कहा है कि मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) में किसी भी प्रकार की खानापूर्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से छूटना नहीं चाहिए, इसे ही अपना एकमात्र लक्ष्य बनाकर कार्य करें।

के. रवि कुमार मंगलवार को संथाल परगना प्रमंडल के दुमका, देवघर और जामतारा जिले के निर्वाचन पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे।
📌 समाचार के मुख्य बिंदु (Quick Highlights)
ऐतिहासिक कदम: झारखण्ड में पूरे 23 वर्षों के बाद ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (Special Intensive Revision) आयोजित किया जा रहा है। यह देश का 10वां विशेष गहन पुनरीक्षण है।
दो-चरणों की प्रक्रिया: सामान्यतः हर साल होने वाले ‘विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण’ (SSR) से अलग, यह दो-चरण वाली प्रक्रिया है।
महत्वपूर्ण दस्तावेज: इस बार डाक्यूमेंट में मूल रूप से डेट ऑफ बर्थ (DoB) एवं प्लेस ऑफ बर्थ (PoB) की गहन चेकिंग की जा रही है।
पुरानी सूची को मान्यता: विगत विशेष गहन पुनरीक्षण के मतदाता सूची के दस्तावेज को मतदाताओं के ‘प्लेस ऑफ बर्थ’ के लिए वैलिड डॉक्यूमेंट माना गया है।
📑 मतदान का अधिकार संवैधानिक और वैधानिक: समझें दो चरणों का खेल
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बैठक में मौजूद अधिकारियों को संविधान के अनुच्छेद 326 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 को पूरी तरह से आत्मसात करने का निर्देश दिया। उन्होंने याद दिलाया कि मतदान का अधिकार एक संवैधानिक और वैधानिक अधिकार है, जिसके कारण किसी भी पात्र नागरिक का नाम सूची से हटाया नहीं जा सकता।
इस बार की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी:
पहला चरण: इस चरण में बिना किसी दस्तावेज़ के, सिर्फ इन्यूमरेशन फॉर्म पर हस्ताक्षर के आधार पर मौजूदा मतदाताओं को प्रारूप (Draft) सूची में शामिल किया जाएगा।
दूसरा चरण: इस चरण में, भारत के नागरिकों से मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए दावे और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। यदि कोई मतदाता अपात्र है, तो उसका नाम हटाने के लिए प्रपत्र-7 (Form-7) में आपत्ति दर्ज कराई जा सकेगी।
🔍 डिक्लेरेशन फॉर्म और दस्तावेजों के नियम बदले
श्री के. रवि कुमार ने बताया कि नियमों में इस बार बड़ा बदलाव हुआ है:
सत्यापन अनिवार्य: पहले डिक्लेरेशन फॉर्म में केवल ‘सेल्फ डिक्लेरेशन’ होता था कि “मैं भारत का नागरिक हूँ और अमुक स्थान पर रहता हूँ”, लेकिन अब इसे सत्यापित करने के लिए वैलिड डॉक्यूमेंट लिए जाने अनिवार्य हैं।
इन मतदाताओं को राहत: वैसे मतदाता जिनकी मैपिंग विगत (पुरानी) मतदाता सूची से हो गई है, उन्हें सामान्यतः इस प्रक्रिया (SIR) में अन्य किसी प्रकार के नए दस्तावेज देने की आवश्यकता नहीं होगी।
🛠️ BLO की शंकाओं का तुरंत करें समाधान
सीईओ ने कड़े शब्दों में कहा कि पदाधिकारी ट्रेनिंग मैटेरियल के प्रत्येक बिंदु का खुद गहन अध्ययन करें। जब वे बीएलओ (BLO) और बीएलओ सुपरवाईजर को ट्रेनिंग दें, तो उनके मन में उठने वाली हर शंका का समाधान भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप करें ताकि फील्ड वर्क में कोई गड़बड़ी न हो।
बैठक में ये रहे उपस्थित:
इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में संथाल परगना के आयुक्त संजय कुमार, जिला निर्वाचन पदाधिकारी (डीईओ) देवघर सौरभ कुमार भुवानिया, डीईओ दुमका अविजित सिन्हा, डीईओ जामतारा आलोक कुमार, अपर जिला निर्वाचन पदाधिकारी देवघर सुलोचना मीणा सहित तीनों जिलों के सभी विधानसभा क्षेत्रों के ईआरओ (ERO), एईआरओ (AERO) और उप निर्वाचन पदाधिकारी उपस्थित थे।