Home » झारखंड में लाल आतंक पर बड़ा प्रहार: 60 लाख के 16 इनामी नक्सली करेंगे सरेंडर, रीजनल कमांडर भी शामिल !
📰 लाल आतंक की टूटी कमर: झारखंड में 60 लाख रुपये के 16 इनामी नक्सली करेंगे सरेंडर !
रांची : (विशेष संवाददाता ): झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे ताबड़तोड़ अभियानों और राज्य सरकार की आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति का असर अब धरातल पर साफ दिखने लगा है। लाल आतंक का गढ़ कहे जाने वाले झारखंड में नक्सली संगठन अब पूरी तरह बिखराव के कगार पर पहुंच चुका है।
इसी कड़ी में एक साथ 16 इनामी माओवादी सुरक्षा बलों के सामने अपने आधुनिक हथियारों के साथ आत्मसमर्पण करेंगे। आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों पर कुल 60 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
🚨 मुख्य आकर्षण (Key Highlights)
60 लाख का कुल इनाम: आत्मसमर्पण करने वाले दस्ते पर कुल 60 लाख रुपये का सरकारी इनाम था।
15 लाख का इनामी कमांडर: 15 लाख रुपये का इनामी रीजनल कमांडर संतोष उर्फ बासुदेव दा उर्फ गांधी मुख्य रूप से शामिल है।
आधुनिक हथियारों की बरामदगी: नक्सलियों के पास से AK-47, इंसास (INSAS), HK-33, US कार्बाइन और M-16 जैसी राइफलों समेत 1,500 से अधिक कारतूस जमा कराए गए हैं।
सारंडा में सिमटा दायरा: अब नक्सली प्रभाव केवल पश्चिम सिंहभूम के सारंडा और कोल्हान के जंगलों में सिमट कर रह गया है।
📊 आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों का वर्गीकरण
सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और नेटवर्क ध्वस्त होने के कारण निचले स्तर से लेकर शीर्ष स्तर के कमांडरों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है:
पद / कैडरसंख्याघोषित इनाममुख्य नाम / विवरण
रीजनल कमांडर1₹15 लाखसंतोष उर्फ गांधी
जोना कमांडर3₹10-10 लाख (प्रत्येक)चंदन लोहरा व अन्य
सब-जोनल कमांडर3₹5-5 लाख (प्रत्येक)अनिल तुरी, सुखलाल बिरजिया व अन्य
एरिया कमांडर6विभिन्न श्रेणीसंगठन के सक्रिय क्षेत्रीय कमांडर
दस्ता कैडर / सदस्य3विभिन्न श्रेणीनिचले
🌲 सारंडा जंगल में घिरे 1-1 करोड़ के दो बड़े माओवादी
पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों (CRPF & Jharkhand Jaguar) की चौतरफा घेराबंदी के कारण नक्सलियों का दायरा सिमट चुका है।
मिसिर बेसरा और असीम मंडल की घेराबंदी: सेंट्रल कमेटी के दो खूंखार सदस्य—1 करोड़ रुपये के इनामी मिसिर बेसरा और 1 करोड़ रुपये के इनामी असीम मंडल इस समय पश्चिम सिंहभूम के सारंडा जंगल में ही छिपे हुए हैं।
सुरक्षा बलों का सख्त संदेश: अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि बचे हुए माओवादियों के पास अब सिर्फ दो ही रास्ते बचे हैं—या तो वे आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटें या पुलिस की गोली का सामना करें।
⚔️ आपूर्ति और कैडर नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त
झारखंड पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, निरंतर चले अभियानों ने नक्सलियों के लॉजिस्टिक्स, राशन आपूर्ति और सूचना तंत्र (Intelligence Network) को पूरी तरह तोड़ दिया है। इससे पहले 21 मई को भी 25 माओवादियों और 2 JJMP उग्रवादियों (कुल 27) ने एक साथ सरेंडर किया था।
28 जुलाई को होने जा रहा यह सामूहिक आत्मसमर्पण राज्य से माओवाद के पूरी तरह खात्मे की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।