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झारखंड में NGT के नियमों को ठेंगा: बालू माफिया के आगे बेबस तंत्र, BJP प्रवक्ता का हेमंत सरकार पर बड़ा हमला
रांची: झारखंड में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के कड़े निर्देशों के बावजूद मानसून सत्र में धड़ल्ले से हो रहा अवैध बालू खनन अब एक बड़ा सियासी मुद्दा बन चुका है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश प्रवक्ता मृत्युंजय शर्मा ने हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि राज्य में कानून का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है और सत्ता के संरक्षण में प्राकृतिक संपदा की खुलेआम तस्करी की जा रही है।
”हेमंत सरकार के राज में झारखंड की नदियों का सीना चीरकर प्राकृतिक संपदा की खुलेआम तस्करी हो रही है। जब सत्ता का सीधा संरक्षण और प्रशासन की मौन सहमति हो, तो अपराधियों के मन से कानून का खौफ पूरी तरह खत्म हो जाता है।”
— मृत्युंजय शर्मा, प्रदेश प्रवक्ता, बीजेपी
इन नदियों पर माफियाओं का ‘पुश्तैनी राज’ – देखें जमीनी हकीकत
सरकारी सुशासन के दावों की पोल खोलती राज्य के अलग-अलग जिलों की यह स्थिति बेहद चिंताजनक है:
गिरिडीह: यहाँ बराकर और इरगा नदियों के घाटों से रोजाना नियमों को ठेंगा दिखाकर सैकड़ों ट्रैक्टरों के जरिए अवैध बालू ढोया जा रहा है।
बोकारो (बेरमो अनुमंडल): यहाँ दामोदर नदी के खेतको घाट को माफियाओं ने अपनी पुश्तैनी जागीर समझ लिया है, जहाँ दिन-रात बालू लदे ट्रैक्टर सड़कों पर बेखौफ दौड़ रहे हैं।
पश्चिमी सिंहभूम (तांतनगर प्रखंड): यहाँ खरकई नदी के घाटों पर भी कमोबेश यही स्थिति है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जब भी खनन विभाग की टीम दिखावे के लिए कार्रवाई करने निकलती है, तस्करों को उनके पहुंचने से पहले ही ‘गुप्त सूचना’ मिल जाती है। यह इस पूरे सिंडिकेट में गहरी प्रशासनिक मिलीभगत की ओर सीधा इशारा करता है।
जनता पर दोहरी मार: चरम पर ‘ब्लैक-मार्केटिंग’
इस बेलगाम माफिया राज का सबसे बड़ा नुकसान राज्य की आम जनता को उठाना पड़ रहा है:
कृत्रिम किल्लत (Artificial Shortage): प्रतिबंध की आड़ में बाजार में बालू की भारी कमी पैदा कर दी गई है।
आसमान छूते दाम: ‘ब्लैक-मार्केटिंग’ के चलते एक ट्रक बालू के दाम में 10 से 15 हजार रुपये तक की भारी वृद्धि हो गई है।
पड़ोसी राज्यों पर निर्भरता: आम आदमी अपना आशियाना बनाने के लिए पड़ोसी राज्यों से 25 से 50 हजार रुपये प्रति ट्रक तक की भारी-भरकम कीमत चुकाकर बालू खरीदने को मजबूर है।
जनता का आक्रोश: मुख्यमंत्री तोड़ें अपनी चुप्पी
अब राज्य की जनता उद्वेलित है और सीधे तौर पर यह सवाल पूछ रही है कि क्या पुलिस, प्रशासन और खनन विभाग के मजबूत गठजोड़ के बिना इतने बड़े पैमाने पर तस्करी संभव है? राज्य के पर्यावरण को दांव पर लगाकर आम आदमी की गाढ़ी कमाई लूटने वाला यह सिंडिकेट आखिर किसका खजाना भर रहा है ?
बीजेपी ने मांग की है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए और झारखंड की जनता को जवाब देना चाहिए कि उनकी आंखों के सामने हो रही इस खुली लूट का असली जिम्मेदार कौन है।